छत्तीसगढ़ की अनूठी लोक संस्कृति, समृद्ध लोक परंपराओं और अटूट पारिवारिक मूल्यों को समर्पित ‘तीजा-पोला तिहार‘ का पावन पर्व पूरे प्रदेश में अपार उत्साह, भक्ति और आत्मीयता के साथ मनाया जा रहा है.
इस शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री निवास में आयोजित विशेष राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान प्रदेश की समस्त माताओं, बहनों और अन्नदाताओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं.
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि तीजा-पोला तिहार केवल एक पारंपरिक त्योहार नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की प्राचीन धरोहर, बेटियों-बहनों के प्रति सम्मान, कृषि आधारित जीवन शैली और हमारी मिट्टी की सोंधी सुगंध का जीवंत उत्सव। यह पर्व राज्य के हर नागरिक को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से गहराई से जोड़ता है।
तीजा-पोला तिहार का महत्व और परंपराएं
छत्तीसगढ़ में भाद्रपद (भादो) माह की अमावस और तृतीया तिथि पर मनाए जाने वाले इन त्योहारों का विशेष धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व है:
| पर्व/परंपरा | महत्व और मुख्य विशेषताएं |
| पोला तिहार (Pora Tihar) | कृषि कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नंदी बैलों के प्रति कृतज्ञता और आभार प्रकट करने का पर्व। |
| तीजा तिहार (Teeja Tihar) | विवाहित महिलाओं द्वारा पति की दीर्घायु, स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए रखा जाने वाला कठोर निर्जला व्रत। |
| पारंपरिक व्यंजन | घरों में चावल आटे और गुड़/शक्कर से बने ठेठरी, खुरमी, चौसेला, अइरसा और सोहारी जैसे स्वादिष्ट व्यंजन तैयार किए जाते हैं। |
| सांस्कृतिक जुड़ाव | विवाहित बेटियों का मायके लौटने की प्राचीन परंपरा, जो पारिवारिक रिश्तों में नई मिठास, स्नेह और आत्मीयता लाती है। |
मुख्यमंत्री निवास में उत्सव का माहौल
रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में ‘तीजा-पोला तिहार’ के उपलक्ष्य में एक भव्य और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया इस दौरान पूरा परिसर पारंपरिक छत्तीसगढ़ी ग्रामीण परिवेश की तर्ज पर सजाया गया था।
- अन्नदाताओं का पूजन एवं सम्मान: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपनी धर्मपत्नी के साथ पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार मिट्टी से बने नंदी बैल (पोला जात) और जाते की विधिवत पूजा-अर्चना की उन्होंने राज्य के किसानों की खुशहाली, अच्छी फसल और प्रदेश की निरंतर प्रगति की कामना की .
- मातृशक्ति का आत्मीय सत्कार: पर्व के अवसर पर राज्य भर के विभिन्न जिलों से पहुंची बहनों और माताओं का आत्मीय स्वागत किया गया । मुख्यमंत्री ने महिलाओं को तीजा का पारंपरिक उपहार और साड़ी भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
- छत्तीसगढ़ी लोक कला का प्रदर्शन: कार्यक्रम में राज्य के प्रख्यात लोक कलाकारों द्वारा ददरिया, सुआ और कर्मा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं, जिसने उपस्थित जनसमूह को झूमने पर मजबूर कर दिया।
पारंपरिक खेलों और व्यंजनों की रही धूम
पोला तिहार के दिन राज्य के ग्रामीण और शहरी अंचलों में बच्चों के लिए विशेष उत्साह देखने को मिलता है। बच्चे मिट्टी से बने खिलौनों, जैसे—पोला बैल, बैलगाड़ी और जांता से खेलते हैं: । कई स्थानों पर पारंपरिक बैल दौड़ और ग्रामीण खेलों का आयोजन भी किया जाता है।
मुख्यमंत्री निवास में पहुंचे अतिथियों को छत्तीसगढ़ के पारंपरिक पकवानों—जैसे ठेठरी, खुरमी, बफौरी और चीला का स्वाद परोसा गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक कला, पारंपरिक त्योहारों, खान-पान और भाषा-बोली के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
मातृशक्ति और कृषि अर्थव्यवस्था को संबल
छत्तीसगढ़ में पोला तिहार जहां हमारी कृषि अर्थव्यवस्था के स्तंभ पशुधन के प्रति सम्मान प्रकट करने का अवसर है, वहीं तीजा तिहार महिलाओं के अदम्य साहस, संयम और परिवार के प्रति उनके समर्पण को रेखांकित करता है।
राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी नीतियां भी इन्हीं सांस्कृतिक मूल्यों से प्रेरित होकर महिलाओं और किसानों के जीवन में आर्थिक समृद्धि लाने की दिशा में क्रियान्वित की जा रही हैं।
तीजा-पोला तिहार छत्तीसगढ़ की माटी की सोंधी महक, पारिवारिक आत्मीयता और अटूट परंपराओं का अनुपम उदाहरण है
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर मुख्यमंत्री निवास में आयोजित हुए इस भव्य लोक उत्सव ने न केवल राज्य की लोक संस्कृति को एक नया गौरव प्रदान किया है, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ी को भी अपनी लोक परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जोड़े रखने का एक सराहनीय कार्य किया है

