छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व और सुशासन में खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक अध्याय लिखा जा रहा है। राज्य सरकार की जनकल्याणकारी ‘मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना’ (Mukhyamantri Khadyanna Sahayata Yojana) के माध्यम से प्रदेश के करोड़ों जरूरतमंद नागरिकों और गरीब परिवारों को भोजन एवं पोषण की गारंटी मिल रही है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को और अधिक पारदर्शी व सुदृढ़ बनाकर राज्य सरकार सुनिश्चित कर रही है कि प्रदेश का कोई भी नागरिक भूखा न सोए। “जनसेवा हमर संस्कार” के ध्येय वाक्य को साकार करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार राज्य के जरूरतमंदों के लिए खाद्य सुरक्षा का मजबूत संबल बनी है।
योजना के मुख्य आंकड़े और प्रभाव
| प्रमुख घटक | आंकड़े एवं विवरण |
| योजना का नाम | मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना |
| मुफ्त अनाज लाभार्थी | 73 लाख+ गरीब व जरूरतमंद परिवार |
| रियायती चावल लाभार्थी | 8.5 लाख+ परिवार |
| प्राथमिकता | अंत्योदय, प्राथमिकता श्रेणी, एकल निराश्रित एवं दिव्यांग कार्डधारी |
| मूल लक्ष्य | ‘अन्न की चिंता दूर’ कर हर घर में पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना |
73 लाख से अधिक परिवारों को निःशुल्क अनाज का सुरक्षा कवच
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के पात्र अंत्योदय, प्राथमिकता श्रेणी, निराश्रितों और दिव्यांगजनों के लिए खाद्यान्न सुरक्षा का मजबूत ढांचा तैयार किया है।
- 73 लाख+ परिवारों को निःशुल्क खाद्यान्न: राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के 73 लाख से अधिक गरीब परिवारों को हर महीने तय पात्रता के अनुसार बिना किसी शुल्क के राशन (चावल व अन्य खाद्यान्न) उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे कमजोर वर्ग के परिवारों का मासिक आर्थिक बोझ काफी कम हुआ है।
- 8.5 लाख+ परिवारों को रियायती चावल: मुफ्त खाद्यान्न के अलावा, राज्य के 8.5 लाख से अधिक परिवारों को बेहद रियायती एवं किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण चावल मुहैया कराया जा रहा है।
- पोषण सुरक्षा पर ध्यान: केवल पेट भरने तक ही नहीं, बल्कि सरकार फोर्टिफाइड चावल (Fortified Rice) और पौष्टिक सामग्री के माध्यम से राज्य से कुपोषण और एनीमिया को दूर करने की दिशा में कार्य कर रही है।
मोदी की गारंटी और विष्णु देव साय के सुशासन का संगम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ के विजन को आगे बढ़ाते हुए छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे जमीनी स्तर पर तत्परता से लागू किया है।
मुख्यमंत्री साय का कहना है कि राज्य की जन-कल्याणकारी नीतियां हर उस गरीब व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए जिसे इनकी सख्त जरूरत है। राशन दुकानों में बायोमेट्रिक प्रणाली (E-KYC/अंगूठा सत्यापन) और डिजिटल निगरानी के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि खाद्यान्न वितरण में पूरी पारदर्शिता बनी रहे और बिचौलियों की भूमिका खत्म हो।
‘जनसेवा हमर संस्कार’: बदल रही है गरीबों की जिंदगी
‘मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना’ का सीधा असर प्रदेश की ग्रामीण और शहरी दोनों अर्थव्यवस्थाओं पर दिखाई दे रहा है। जब गरीब परिवार को राशन खरीदने की चिंता से मुक्ति मिलती है, तो वह अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी जरूरतों पर ध्यान दे पाता है।
वनांचल और सुदूर बस्तर से लेकर सरगुजा तक, उचित मूल्य की दुकानों (Fair Price Shops) के माध्यम से हर महीने समय पर खाद्यान्न पहुंचाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शुरू की गई खाद्य सुरक्षा पहलें छत्तीसगढ़ को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। 73 लाख से अधिक परिवारों के जीवन में आई स्थिरता और राहत यह दर्शाती है कि राज्य में सुशासन और जनसेवा का संकल्प धरातल पर पूरी निष्ठा के साथ उतर रहा है।

