छत्तीसगढ़ की महान लोककला संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्वर्णिम पहचान दिलाने वाली पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई की कला-साधना को संजोने और लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दुर्ग जिले के पाटन जनपद अंतर्गत ग्राम बानबरद में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कलाकार दिवस एवं पंडवानी महासम्मेलन के अवसर पर यह महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
इसी वर्ष राज्योत्सव के अवसर से पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई के नाम पर राज्य स्तरीय ‘लोककला अलंकरण’ प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही, उनके गृह ग्राम गनियारी को ‘कला ग्राम’ के रूप में विकसित कर वहां लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए नया ढांचा तैयार किया जाएगा।
प्रमुख घोषणाएं एवं मुख्य बिंदु: एक नजर में
| पहल / घोषणा | विवरण एवं मुख्य प्रावधान |
| नया राज्य अलंकरण | इसी वर्ष राज्योत्सव से डॉ. तीजन बाई लोककला अलंकरण की शुरुआत |
| गनियारी का विकास | डॉ. तीजन बाई के गृह ग्राम गनियारी को ‘कला ग्राम’ के रूप में विकसित करने की घोषणा |
| कलाकारों को प्रोत्साहन राशि | महासम्मत में शामिल 70 सांस्कृतिक दलों को ₹25-25 हजार की प्रोत्साहन राशि देने का ऐलान |
| क्षेत्रीय विकास कार्य | बानबरद मिडिल स्कूल का हाईस्कूल में उन्नयन तथा बीटी रोड निर्माण की स्वीकृति |
राज्योत्सव से दिया जाएगा डॉ. तीजन बाई लोककला अलंकरण
पंडवानी गायन शैली (कापालिक शैली) के माध्यम से देश और दुनिया में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने वाली स्वर्गीय तीजन बाई जी के योगदान को अक्षुण्ण रखने के लिए यह सम्मान शुरू किया जा रहा है।
- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्भुत कला और साधना से छत्तीसगढ़िया संस्कृति को वैश्विक स्तर पर गौरवान्वित किया है।
- उनके नाम पर शुरू हो रहा यह राज्य अलंकरण हर वर्ष प्रदेश के उत्कृष्ट लोक कलाकारों को उनकी साधना के लिए प्रदान किया जाएगा, जिससे नई पीढ़ी को लोककला क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।
गनियारी बनेगा ‘कला ग्राम’: सांस्कृतिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
डॉ. तीजन बाई की कर्मभूमि और जन्मस्थली के रूप में पहचाने जाने वाले ग्राम गनियारी को ‘कला ग्राम’ के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की गई है।
- यहाँ लोककला, नृत्य और संगीत के प्रशिक्षण, शोध और संरक्षण के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं और ढांचा विकसित किया जाएगा।
- इससे गनियारी आने वाले समय में राज्य के लोककला प्रेमियों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र के रूप में उभरेगा।
लोक कलाकारों को मिला प्रोत्साहन और सम्मान
बानबरद में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कलाकार दिवस एवं विशाल पंडवानी महासम्मेलन में प्रदेशभर से आए कलाकारों का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कई राहत भरी घोषणाएं कीं:
- कार्यक्रम में शामिल 70 से अधिक सांस्कृतिक मंडलियों/दलों को मंच से ही ₹25-25 हजार की प्रोत्साहन राशि देने का ऐलान किया गया।
- इसके अतिरिक्त स्थानीय ग्रामीणों की मांग पर ग्राम बानबरद के मिडिल स्कूल को हाईस्कूल में उन्नत करने और संपर्क सड़कों के निर्माण के निर्देश दिए गए।
“लोककला हमारी संस्कृति और इतिहास की अमूल्य धरोहर”: मुख्यमंत्री साय
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पंथी, भरथरी, ददरिया, सुआ और पंडवानी जैसी विधाएं हमारी सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान की रीढ़ हैं। सुशासन सरकार इन लोक विधाओं के संरक्षण, कलाकारों के कल्याण और उन्हें उचित मंच प्रदान करने के लिए पूरी तरह संकल्पित है।
पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई के नाम पर लोककला अलंकरण की शुरुआत और गनियारी को ‘कला ग्राम’ बनाने का फैसला छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति के संरक्षण में एक स्वर्णिम मील का पत्थर साबित होगा। यह पहल आने वाली पीढ़ियों तक हमारी समृद्ध लोक परंपराओं को सुरक्षित और जीवंत रखने का काम करेगी।

