अमेरिकी स्टार्टअप मैराथन फ्यूजन का दावा: पारे से बनाया असली सोना, जानें इस ऐतिहासिक प्रयोग का सच

सदियों से इंसान धातुओं को सोने में बदलने का सपना देखता आया है। इतिहास में प्राचीन कीमियागर (Alchemists) ‘पारस पत्थर’ की तलाश करते रहे जो लोहे या पारे को छूते ही सोना बना दे।

अब सैन फ्रांसिस्को स्थित अमेरिकी टेक स्टार्टअप मैराथन फ्यूजन (Marathon Fusion) ने दावा किया है कि उसने न्यूक्लियर फ्यूजन (Nuclear Fusion) तकनीक के जरिए पारे (Mercury) को असली और स्थिर सोने (Gold-197) में बदल दिया है। कंपनी का कहना है कि उसने इस मामले में यूरोपीय परमाणु अनुसंधान संगठन (CERN) के पिछले रिकॉर्ड से 10 गुना बेहतर सफलता हासिल की है।

इस दावे के बाद वैज्ञानिक जगत और गोल्ड मार्केट में हलचल मच गई है। आइए 5 आसान बिंदुओं में समझते हैं कि मैराथन फ्यूजन का यह प्रयोग क्या है, यह कैसे काम करता है और क्या इससे बाजार में सोने के दाम कम होंगे।

पारे से सोना बनाने का वैज्ञानिक फॉर्मूला क्या है?

रसायन विज्ञान (Chemistry) के नियमों के अनुसार हर धातु की पहचान उसके परमाणु केंद्र (Nucleus) में मौजूद प्रोटॉन (Protons) की संख्या से तय होती है।

  • पारे का परमाणु: पारे (Mercury) के केंद्र में 80 प्रोटॉन होते हैं।
  • सोने का परमाणु: सोने (Gold) के केंद्र में 79 प्रोटॉन होते हैं।
  • न्यूक्लियर ट्रांसम्यूटेशन (Nuclear Transmutation): यदि पारे के परमाणु से सिर्फ 1 प्रोटॉन कम कर दिया जाए, तो वह तुरंत सोने में बदल जाता है।

मैराथन फ्यूजन ने फ्यूजन रिएक्टर से निकलने वाले बेहद तेज रफ्तार वाले न्यूट्रॉन्स (Neutrons) की बौछार पारे के ‘मरकरी-198′ आइसोटोप पर की। न्यूट्रॉन सोखने के बाद यह अस्थाई रेडियोएक्टिव ‘मरकरी-197’ में बदला और कुछ ही घंटों में एक इलेक्ट्रॉन अवशोषित करके ‘गोल्ड-197′ (असली, स्थिर सोना) बन गया।

CERN के रिकॉर्ड से 10 गुना आगे निकलने का दावा

इससे पहले 2015 से 2018 के बीच जेनेवा स्थित CERN के लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (LHC) में लेड (सीसे) के परमाणुओं को टकराकर सोने के लगभग 86 अरब न्यूक्लियाई (लगभग 29 पिकोग्राम) बनाए गए थे। हालांकि, वे परमाणु एक सेकंड से भी कम समय में बिखर गए थे।

मैराथन फ्यूजन ने दावा किया है कि न्यूट्रॉन न्यूक्लियर ट्रांसम्यूटेशन तकनीक के जरिए उसने CERN के रिकॉर्ड से 10 गुना अधिक मात्रा में और पूरी तरह से स्थिर (Non-Radioactive) सोना तैयार किया है। इसके साथ ही कंपनी ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाले मेडिकल आइसोटोप्स (जैसे कॉपर-64 और कॉपर-67) बनाने का भी सफल परीक्षण किया है।

क्या प्रयोगशाला में पहले भी सोना बनाया गया है?

विज्ञान की मदद से कृत्रिम रूप से सोना बनाना कोई नई बात नहीं है, लेकिन व्यावसायिक तौर पर यह बेहद महंगा और जटिल रहा है।

  • 1980 का ऐतिहासिक प्रयोग: नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक ग्लेन सीबोर्ग (Glenn Seaborg) ने पार्टिकल एक्सीलेटर का इस्तेमाल करके बिस्मथ (Bismuth) धातु के कुछ हजार परमाणुओं को सोने में बदला था।
  • लागत की चुनौती: सीबोर्ग ने तब अनुमान लगाया था कि इस प्रक्रिया से 1 औंस (लगभग 28 ग्राम) सोना बनाने में 1 क्वाड्रिलियन डॉलर (खरबों रुपये) का खर्च आएगा, जो खदान से सोना निकालने की तुलना में बेहद महंगा था।

क्या बाजार में बिकेगा फ्यूजन से बना सोना? जानिए कमर्शियल प्लान

मैराथन फ्यूजन के को-फाउंडर एडम रुतकोव्स्की (Adam Rutkowski) ने 1 गीगावाट (1 GW) क्षमता वाले एक प्रस्तावित कमर्शियल फ्यूजन पावर प्लांट का खाका पेश किया है।

  • वार्षिक उत्पादन अनुमान: कंपनी का अनुमान है कि जब व्यावसायिक फ्यूजन पावर प्लांट काम करना शुरू करेंगे, तो बिजली उत्पादन के साथ-साथ उप-उत्पाद (Byproduct) के रूप में सालाना 2 टन सोना बनाया जा सकेगा।
  • व्यावसायिक चुनौतियां: वर्तमान में दुनिया भर में कोई भी कमर्शियल न्यूक्लियर फ्यूजन पावर प्लांट ग्रिड से नहीं जुड़ा है। इसके अलावा, परमाणु प्रतिक्रिया से बने सोने में रेडियोएक्टिव अवशेष हो सकते हैं, जिन्हें पूरी तरह से सुरक्षित बनाने के लिए सालों तक स्टोर रखना पड़ सकता है।

क्या इससे बाजार में सोने की कीमतें गिरेंगी?

बाजार विश्लेषकों और वैज्ञानिकों का मानना है कि इस खोज से फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

  • नगण्य मात्रा: कंपनी ने अभी तक यह खुलासा नहीं किया है कि उसने लैब में कुल कितना ग्राम सोना तैयार किया है।
  • खदानों की तुलना में बहुत कम: दुनिया भर की खदानों से हर साल लगभग 3,600 टन से अधिक सोना निकाला जाता है। यदि यह कंपनी भविष्य में 2 टन सोना बना भी लेती है, तो भी यह वैश्विक आपूर्ति का बहुत छोटा हिस्सा होगा।

सैन फ्रांसिस्को के स्टार्टअप मैराथन फ्यूजन का यह प्रयोग यह साबित करता है कि आधुनिक भौतिक विज्ञान के जरिए पारे को सोने में बदलना पूरी तरह से संभव है। हालांकि, व्यावसायिक रूप से ‘फ्यूजन गोल्ड’ को बाजार में आने और माइन्ड गोल्ड (Mined Gold) को टक्कर देने में अभी दशकों का समय लगेगा।

(Disclaimer):
यह लेख अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स, वैज्ञानिक दावों और कंपनी द्वारा जारी प्राथमिक डेटा पर आधारित है। स्वतंत्र वैज्ञानिक समीक्षा (Peer Review) और डेटा सत्यापन के बाद ही इस तकनीक की व्यावसायिक क्षमता का सटीक आकलन किया जा सकेगा।

Sonal Gupta

Content Writer

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