नमो दीदी ड्रोन योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बनकर उभर रही है। इस योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को ड्रोन तकनीक से जोड़ा जा रहा है, ताकि वे किसानों को कृषि कार्यों में ड्रोन सेवाएं उपलब्ध कराकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें।
कृषि में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से जहां किसानों को कम समय में उर्वरक और कीटनाशकों के छिड़काव जैसी सुविधाएं मिल रही हैं, वहीं महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए ड्रोन संचालन एक नए व्यवसाय के रूप में सामने आया है।
क्या है नमो ड्रोन दीदी योजना?
नमो ड्रोन दीदी केंद्र क्षेत्र की योजना है, जिसका उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन तकनीक उपलब्ध कराकर कृषि सेवाओं से जोड़ना है। योजना के तहत चयनित महिला समूह किसानों को किराये पर ड्रोन उपलब्ध कराकर मुख्य रूप से तरल उर्वरकों और कीटनाशकों के छिड़काव जैसी सेवाएं दे सकते हैं। सरकार ने योजना के लिए 1,261 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है और कुल 15,000 महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
महिलाओं के लिए रोजगार का नया रास्ता
ड्रोन तकनीक ने ग्रामीण महिलाओं के लिए कृषि से जुड़े पारंपरिक कार्यों के साथ एक नया तकनीकी रोजगार विकल्प तैयार किया है। स्वयं सहायता समूह ड्रोन के माध्यम से किसानों को सेवाएं देकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
योजना के अंतर्गत समूह की एक सदस्य को ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षण दिया जाता है, जबकि दूसरी सदस्य या परिवार के सदस्य को ड्रोन असिस्टेंट के तौर पर प्रशिक्षण दिया जा सकता है। प्रशिक्षण में ड्रोन संचालन के साथ कृषि उपयोग, पोषक तत्व एवं कीटनाशक छिड़काव तथा ड्रोन के रखरखाव से जुड़ी जानकारी शामिल है।
छत्तीसगढ़ में भी बढ़ रहा ड्रोन का उपयोग
कृषि क्षेत्र में ड्रोन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के साथ छत्तीसगढ़ की महिला स्वयं सहायता समूह भी इस तकनीक से जुड़ रही हैं। केंद्र सरकार की फरवरी 2026 की जानकारी के अनुसार, जनवरी 2026 तक छत्तीसगढ़ में 15 स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन उपलब्ध कराए गए थे और संबंधित महिला सदस्यों को ड्रोन पायलट प्रशिक्षण दिया गया था। Information Bureau
यह पहल राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को तकनीक आधारित रोजगार से जोड़ने और कृषि सेवाओं को अधिक आधुनिक बनाने में मदद कर सकती है।
किसानों को भी मिलेगा फायदा
ड्रोन से कृषि क्षेत्र में कम समय में बड़े क्षेत्र में छिड़काव किया जा सकता है। इससे कृषि कार्यों में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ता है और उर्वरक एवं कीटनाशकों के अधिक सटीक उपयोग की संभावनाएं बढ़ती हैं।
सरकार के अनुसार, नमो ड्रोन दीदी योजना का उद्देश्य कृषि में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के साथ फसल उत्पादकता बढ़ाना और संचालन लागत को कम करने में मदद करना भी है।
महिला सशक्तिकरण को मिल रहा बढ़ावा
नमो ड्रोन दीदी योजना केवल कृषि तकनीक से जुड़ी पहल नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का माध्यम भी है। ड्रोन सेवा से होने वाली आय स्वयं सहायता समूहों की आर्थिक गतिविधियों में विविधता ला सकती है।
केंद्र सरकार द्वारा साझा किए गए अध्ययन के अनुसार, ड्रोन मिलने के बाद संबंधित स्वयं सहायता समूहों की गतिविधियां आधुनिक कृषि सेवाओं तक विस्तारित हुई हैं और इससे ग्रामीण महिलाओं के लिए आय के अवसर बढ़े हैं।
महिलाओं को आधुनिक तकनीक और कृषि व्यवसाय से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
नमो दीदी ड्रोन योजना ग्रामीण महिलाओं को आधुनिक तकनीक और कृषि व्यवसाय से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ड्रोन पायलट और ड्रोन असिस्टेंट के रूप में प्रशिक्षण, किसानों को कृषि सेवाएं उपलब्ध कराने का अवसर और स्वयं सहायता समूहों के लिए अतिरिक्त आय की संभावना इस योजना को रोजगार सृजन के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती है।
छत्तीसगढ़ में भी इस योजना का विस्तार ग्रामीण महिलाओं को तकनीकी कौशल और स्वरोजगार से जोड़ने में उपयोगी साबित हो सकता है। आने वाले समय में कृषि क्षेत्र में ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ने के साथ ‘ड्रोन दीदी’ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिला उद्यमिता का नया चेहरा बन सकती हैं।

