छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत अपने सपनों का पक्का घर बना रहे ग्रामीण परिवारों के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक पहल की है।
नवा रायपुर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘ई-रेत संगवारी’ पोर्टल (E-Ret Sangwari Portal) का विधिवत शुभारंभ किया।
इस नई व्यवस्था के तहत योजना के पात्र लाभार्थियों को मकान निर्माण के लिए निःशुल्क और पारदर्शी रूप से रेत की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
‘ई-रेत संगवारी‘ पोर्टल क्या है और इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी?
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान स्वीकृत किया जाता है।
हालांकि, निर्माण प्रक्रिया के दौरान रेत जैसी बुनियादी सामग्री की खरीद पर लाभार्थियों का एक बड़ा बजट खर्च हो जाता था और कई बार रेत प्राप्त करने में विभिन्न प्रक्रियागत कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ता था।
इसी समस्या को स्थायी रूप से हल करने के लिए राज्य सरकार ने ‘ई-रेत संगवारी‘ पोर्टल की शुरुआत की है। इसके माध्यम से रेत की मांग से लेकर स्वीकृति, परमिट जारी करने और आपूर्ति तक की पूरी व्यवस्था को पूरी तरह से डिजिटल, सुगम और पारदर्शी बना दिया गया है।
पोर्टल की मुख्य विशेषताएं और लाभ
| मुख्य विशेषता | विवरण एवं कार्यप्रणाली |
| निःशुल्क रेत आपूर्ति | PMAY-G के स्वीकृत आवास निर्माण के लिए लाभार्थियों को निःशुल्क रेत दी जाएगी। |
| ऑनलाइन और पारदर्शी प्रक्रिया | रेत की मांग और स्वीकृति का पूरा काम ई-पोर्टल के जरिए ऑनलाइन होगा। |
| क्यूआर कोड आधारित ई-परमिट | निर्माण सामग्री के सुगम परिवहन के लिए डिजिटल QR कोड युक्त Transport Permit जारी होंगे। |
| दफ्तरों के चक्कर से मुक्ति | बिचौलियों के हस्तक्षेप को समाप्त कर सीधा पोर्टल से अप्रूवल मिलेगा। |
| तेज आवास निर्माण | निर्माण सामग्री सुलभ होने से स्वीकृत मकानों का निर्माण कार्य समय पर पूरा होगा। |
डिजिटल प्रक्रिया से बढ़ेगी पारदर्शिता
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ बिना किसी अड़चन के पहुंचाना है।
- डिजिटल ट्रैकिंग: ई-रेत संगवारी पोर्टल के माध्यम से ग्राम पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर निर्माण सामग्री के आवंटन की रियल-टाइम ट्रैकिंग की जाएगी।
- सरकारी दफ्तरों से राहत: ग्रामीण परिवारों को रेत की स्वीकृति प्राप्त करने के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
- आर्थिक बचत: मुफ्त रेत की व्यवस्था से गरीब परिवारों के हजारों रुपये बचेंगे, जिससे वे मकान के अन्य निर्माण कार्यों को बेहतर गुणवत्ता के साथ पूरा कर सकेंगे।
इसी मंच से ‘टिन पोर्टल‘ का भी हुआ शुभारंभ
‘ई-रेत संगवारी’ के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने दंतेवाड़ा और बस्तर अंचल के आदिवासी समुदायों के हितों को ध्यान में रखते हुए ‘टिन पोर्टल‘ (TIN Portal) की भी शुरुआत की। इस पोर्टल का मुख्य उद्देश्य टिन अयस्क के खनन और संग्रहण में लगे स्थानीय और आदिवासी परिवारों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाना और बिचौलियों के प्रभाव को खत्म कर प्रक्रिया में निष्पक्षता लाना है।
‘ई-रेत संगवारी’ पोर्टल की शुरुआत से छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के क्रियान्वयन को नई गति मिलेगी। निःशुल्क रेत, ऑनलाइन प्रक्रिया और डिजिटल पारदर्शिता के माध्यम से राज्य के हजारों गरीब परिवार बिना किसी रुकावट के अपने सपनों का सुरक्षित और स्वाभिमानी पक्का घर बना सकेंगे।

