CGPSC 2024: कोर्ट के बाबू से अब DSP बनेंगे तुषार!

CGPSC 2024

राजनांदगांव के ममता नगर के तुषार मंडावी ने यह साबित कर दिया कि सपने छोटे-बड़े नहीं होते, बस उन्हें देखने का साहस और उन्हें पाने की लगन बड़ी होती है। Hindi Medium Background, साधारण परिवार और सीमित संसाधनों के बावजूद तुषार ने CGPSC 2025 में अपने पहले ही प्रयास में DSP पद हासिल किया। जिस कोर्ट में पिता सुरक्षा गार्ड और खुद सहायक ग्रेड-3 (Babu) के रूप में काम करते थे, उसी कोर्ट से निकलकर उन्होंने सफलता का परचम लहराया।

न्यायालय में बाबू थे तुषार

तुषार मंडावी जिला न्यायालय में सहायक ग्रेड-3 के पद पर कार्यरत थे। सरकारी नौकरी करते हुए CGPSC जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी करना किसी भी सामान्य युवक के लिए भारी चुनौती हो सकती है, लेकिन तुषार के लिए नहीं। समय की कमी, काम का दबाव और सीमित साधन—फिर भी उन्होंने दिन-रात मेहनत की, नियमित अध्ययन किया और पहले ही प्रयास में सफलता प्राप्त कर ली।तुषार की यह यात्रा हर उस युवक के लिए प्रेरणा है जो नौकरी के साथ बड़े सपने देखने की हिम्मत रखता है।

हिन्दी मीडियम बैकग्राउंड

तुषार ने हिंदी माध्यम से उच्च शिक्षा ली और आज उनकी सफलता उन युवाओं को नया विश्वास दे रही है जो भाषा को बाधा मान बैठते हैं। तुषार ने साबित किया कि सफलता न भाषा देखती है, न साधन बस आपके अंदर मौजूद जुनून और अनुशासन को देखती है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, परिवार और मार्गदर्शक DSP नवीन एक्का को दिया।

तुषार की मेहनत को मिली मंज़िल

21 नवंबर को घोषित CGPSC 2025 फाइनल रिजल्ट में तुषार मंडावी का चयन DSP पद के लिए हुआ। इस वर्ष CGPSC ने कुल 246 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की, जिसमें DSP की 21 सीटें थीं। पूरे प्रदेश में इस परीक्षा के टॉपर देवेश प्रसाद साहू रहे, लेकिन तुषार की कहानी युवाओं में प्रेरणा जगाने के लिए एक मिसाल बन गई।उनकी उपलब्धि से न केवल उनका परिवार गर्वित है, बल्कि पूरा राजनांदगांव और छत्तीसगढ़ भी।

क्यों खास है तुषार मंडावी की कहानी?

क्योंकि यह कहानी बताती है, गरीबी या साधनों की कमी कभी भी सपनों की राह नहीं रोक पाती कि नौकरी के साथ भी बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैंकि पहला प्रयास भी आखिरी प्रयास जैसा हो सकता है, अगर मेहनत 100% हो कि साधारण परिवारों के बच्चे भी Extra-ordinary मुकाम हासिल कर सकते हैं। तुषार की सफलता सिर्फ एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है। यह संघर्ष, अनुशासन, परिवार के समर्थन और एक युवा के अटूट विश्वास की कहानी है।

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Rishita Diwan

Content Writer

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