

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा और फ्रेंच स्पेस एजेंसी नेशनल सेंटर फॉर स्पेशल स्टडीज मिलकर पृथ्वी के 90 फीसदी पानी की निगरानी करेंगे। इसके लिए इन दोनो एजेंसी ने 16 दिसंबर को पहला सैटेलाइट लॉन्च किया है। इसे इंटरनेशनल सरफेस वॉटर एंड ओशियन टोपोग्राफी (SWOT) के नाम से जाना जाएगा। इसे स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया है।
पानी से होने वाली आपदाओं में होगी मदद
इस मिशन से जुड़े रिसर्चर्स के अनुसार SWOT से मिलने वाले सभी इंन्फॉर्मेशन से हम भविष्य में पानी से होने वाली किसी भी तरह की आपदाओं की जानकारी ले सकेंगे। जिनमें बाढ़ और चक्रवात जैसी आपदाएं शामिल हैं। क्लाइमेट चेंज का ये हिस्सा काफी जन-धन की हानि के लिए जिम्मेदार होती हैं। लेकिन इस सैटेलाइट की मदद से अब ऐसी आपदाओं से बचाव किया जा सकेगा।
10 गुना छोटी चीजों को पकड़ने में सक्षम है सैटैलाइट
SWOT में का-बैंड रडार इंटरफेरोमीटर (KaRIn) लगा है, जिसे नासा कई सालों से तैयार करने में लगा हुआ है। यह उपकरण सैटेलाइट्स की तुलना में पानी के फीचर को 10 गुना बारीकी से पकड़ सकता है। इससे वैज्ञानिक डिटेल में तालाब, नदियों और समुद्रों के गुणों के बारे में रिसर्च कर सकेंगे। उदाहरण के लिए मान लेते हैं नॉर्मल सैटेलाइट्स दुनिया के कुछ हजार तालाबों का ही डेटा एकत्रित कर पाते हैं, लेकिन SWOT 10 लाख से ज्यादा तालाबों की जानकारी दे सकता है।
रात के अंधेरे में भी काम कर सकता है सैटेलाइट
नासा के मुताबिक KaRIn में लगे दो एंटीना रडार पल्स को पानी की सतह पर भेजने में सक्षम हैं, साथ ही वापस सिग्नल रिसीव भी कर सकते हैं। ये रात के अंधेरे और बादल होने पर भी डेटा इकट्ठा कर सकते हैं। वैज्ञानिकों की मानें तो पहली बार 330 फीट से बड़ी नदियों को 3D में देखा जा सकता है और समुद्रों के 100 किलोमीटर से कम के इलाके को इससे मापना आसान होगा।

