भारत की पहली महिला बोटनिस्ट के बारे में जानते हैं आप, 12 से ज्यादा गन्ने की किस्म डेवलप करने वाली जानकी की अनोखी है कहानी !



Sugarcane Farming: भारत के कई हिस्सों में आज गन्ने की विभिन्न प्रजातियां उगाई जाती है। पर ये बात जानकर आपको हैरानी होगी की कभी भारत में गन्ने की खेती होती ही नहीं थी और इसे हम विदेशों से आयात करते थे। पर जानकी अम्मल भारत की पहली बॉटनिस्ट थी जिनकी कोशिशों से आज भारत में अलग अलग तरह के गन्ने ugaye जाते हैं।

जानकी अम्मल के बारे में…..

जानकी अम्मल भारत की पहली महिला बॉटनिस्ट थी जिन्होंने शुगर केन की कई वैरायटी विकसित की। जानकी अम्मल की कोशिशों से भारत ने विदेश से गन्ने की कई किस्मों का आयात खत्म किया। जानकी अम्मल का जन्म 1897 में थालासेरी में हुआ था। 19 भाई बहनों में 10वें नंबर पर जानकी थीं।

उस दौर में जब लड़कियों के लिए शिक्षा आसान नहीं थी जानकी ने तब वनस्पति विज्ञान में अपना करियर चुना।परंपरागत परिवार से आने वाली जानकी अम्मल परिवार से दूर रहकर अपनी शिक्षा को नया आयाम दिया। जानकी अम्मल ने बॉटनी में स्नातक की डिग्री ली और फिर ऑनर्स पूरा किया। जानकी ने स्नातक के बाद आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका का रुख किया। वे अमेरिका से बॉटनी में पीएचडी कर पहली भारतीय महिला बॉटनिस्ट बनीं। उनकी पढ़ाई से कोयंबटूर के शुगर केन इंस्टिट्यूट को काफी मदद मिली। इंपीरियल सुगरकेन इंस्टिट्यूट गन्ने की किस्म को विकसित करने के लिए स्थापित किया गया था। जानकी अम्मल की कोशिश ने भारत को खाद्यान्न उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बनाया।

भारत में जेनेटिक्स, साइटोलॉजी, एवोल्यूशन में काफी योगदान

जानकी अम्मल ने एक बार कहा था कि, “मैं रहूं ना रहूं, मेरा काम हमेशा जारी रहेगा.” आज उनके द्वारा विकसित किए गए गन्ने की किस्में देश के कई खेतों की शोभा बढ़ा रहे हैं। जानकी अम्मल ने जेनेटिक्स, साइटोलॉजी, एवोल्यूशन जैसे कई सेगमेंट में काम किया उनका योगदान आज देश के काम आ रहा है।

केरल की बायोडायवर्सिटी को सहेजने में भी बड़ा योगदान

साल 1970 की बात है जब भारत सरकार ने केरल के एक इलाके में 8.3 वर्ग किलोमीटर का ट्रॉपिकल फॉरेस्ट बनाने का फैसला किया था। इस फॉरेस्ट में एक हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्लांट लगाए जाने का प्लान तैयार था। इस प्रोजेक्ट से केरल के लोगों को बिजली और जॉब उपलब्ध करवाया जाता।

जानकी अम्मल ने इसका विरोध किया, क्योंकि इस प्रोजेक्ट से केरल की बायोडायवर्सिटी को नुकसान पहुंचता। जानकी अम्मल के नेतृत्व में लोगों ने इसका विरोध किया और केरल की बायोडायवर्सिटी को संरक्षित करने का फैसला लिया। भारत की पहली महिला बोटनिस्ट जेनेटिक्स, साइटोलॉजी, एवोल्यूशनजेनेटिक्स, साइटोलॉजी, एवोल्यूशनजानकी अम्मल ने भारत को जो दिया उसे सदियों याद रक्षा जायेगा।

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Dr. Kirti Sisodia

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