नारी शक्ति वंदन अधिनियम, राजनीति में महिलाओं की 33% भागीदारी का युग

  • नारी शक्ति वंदन अधिनियम
  • सशक्तिकरण की एक ऐतिहासिक पहल

हाल ही में रायपुर के दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन महासम्मेलन’ ने देश के राजनीतिक परिदृश्य में महिलाओं की भूमिका को लेकर एक नई ऊर्जा का संचार किया है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस कार्यक्रम में नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ‘ऐतिहासिक कदम’ करार दिया। यह अधिनियम न केवल एक कानूनी बदलाव है, बल्कि देश की निर्णय लेने की प्रक्रिया (Decision-making process) में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का एक साहसिक संकल्प है।

पंचायत से संसद तक

एक नए भारत का उदय

इस सम्मेलन का मुख्य स्वर “पंचायत से पार्लियामेंट तक निर्णय में नारी—नए भारत की तैयारी” था। मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि 21वीं सदी का यह सबसे महत्वपूर्ण निर्णय महिलाओं को देश के विकास में मुख्यधारा में लाने का काम करेगा। वर्तमान में देश की पंचायत राज संस्थाओं में 14 लाख से अधिक महिलाएं अपनी नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवा रही हैं। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि जब महिलाओं को अवसर मिलते हैं, तो वे न केवल आत्मनिर्भर बनती हैं, बल्कि समाज की तस्वीर भी बदल देती हैं। पूर्व राज्यसभा सांसद सरोज पाण्डेय ने जानकारी दी कि यह अधिनियम वर्ष 2029 तक पूर्ण रूप से प्रभावी हो जाएगा, जिसके बाद लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित होंगी।

महतारी गौरव वर्ष

महिला सशक्तिकरण केवल एक चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि वर्तमान सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस वर्ष को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में घोषित किया है। ‘महतारी वंदन योजना’ के माध्यम से राज्य की लगभग 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। यह वित्तीय स्वतंत्रता (Financial independence) महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसरों की ओर अग्रसर कर रही है। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ और ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ जैसी केंद्रीय योजनाओं ने भी इस दिशा में मील का पत्थर साबित होकर जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव किए हैं।

सनातन परंपरा और नारी का सम्मान

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति में नारी के सर्वोच्च स्थान को याद दिलाया। उन्होंने कहा कि हमारी परंपरा में हम भगवान से पहले भगवती की पूजा करते हैं। शक्ति, ज्ञान और समृद्धि के प्रतीक के रूप में देवी दुर्गा, सरस्वती और लक्ष्मी की आराधना भारतीय जीवन पद्धति का अभिन्न हिस्सा है। इसी भाव को आधुनिक शासन व्यवस्था में उतारते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस अधिनियम को लागू करने का साहसिक निर्णय लिया गया, जो दशकों से लंबित मांग को पूरा करने वाला सिद्ध हुआ।

भविष्य की राह

नारी शक्ति वंदन अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन महिलाओं के आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। जब महिलाएं संसद और विधानसभा के गलियारों में निर्णय लेती नजर आएंगी, तो समाज में उनके प्रति दृष्टिकोण में व्यापक परिवर्तन आएगा। यह सम्मेलन न केवल योजनाओं के बारे में जानकारी देने वाला था, बल्कि उन सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बना, जो भविष्य की नीति-निर्धारक बनने की क्षमता रखती हैं। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद रूपकुमारी चौधरी, सांसद बृजमोहन अग्रवाल और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने इस संकल्प को और अधिक मजबूत बनाया।

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Rishita Diwan

Content Writer

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