छत्तीसगढ़ सरकार की श्री रामलला दर्शन योजना के तहत प्रदेश के पात्र श्रद्धालुओं को अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए निःशुल्क तीर्थयात्रा कराई जाती है। इस योजना में यात्रा, भोजन और ठहरने की व्यवस्था सरकार की ओर से की जाती है। जानिए योजना का उद्देश्य, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, चयन के नियम और अब तक कितने श्रद्धालु इसका लाभ उठा चुके हैं।
छत्तीसगढ़ को भगवान श्रीराम का ननिहाल माना जाता है। मान्यता है कि माता कौशल्या का जन्म छत्तीसगढ़ के चंदखुरी में हुआ था। इसी सांस्कृतिक और धार्मिक जुड़ाव के चलते अयोध्या में प्रभु श्रीराम के दर्शन प्रदेश के श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं।
इसी आस्था को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने जनवरी 2024 में श्री रामलला दर्शन (अयोध्या धाम) योजना शुरू करने का निर्णय लिया। योजना का उद्देश्य प्रदेश के पात्र नागरिकों को उनके जीवनकाल में एक बार अयोध्या धाम की तीर्थयात्रा के लिए सरकारी सहायता उपलब्ध कराना है। इसके तहत श्रद्धालुओं को विशेष ट्रेनों के माध्यम से अयोध्या ले जाया जाता है।
क्या है श्री रामलला दर्शन योजना?
श्री रामलला दर्शन योजना छत्तीसगढ़ शासन के पर्यटन विभाग की तीर्थयात्रा संबंधी योजना है। इसे 24 जनवरी 2024 को जारी अधिसूचना के तहत लागू किया गया।
इस योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के मूल निवासी 18 से 75 वर्ष तक के पात्र श्रद्धालुओं को जीवनकाल में एक बार अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में रामलला के दर्शन के लिए यात्रा की सुविधा दी जाती है।
यात्रा का संचालन छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल और अधिकृत एजेंसी के माध्यम से किया जाता है। यात्रा की व्यवस्था में IRCTC की भी भूमिका रहती है।
योजना के तहत श्रद्धालुओं को मिलती हैं ये सुविधाएं
इस योजना की खास बात यह है कि चयनित श्रद्धालुओं को तीर्थयात्रा के लिए अपनी ओर से यात्रा का खर्च नहीं उठाना पड़ता। सरकार की ओर से निर्धारित व्यवस्थाओं के तहत उन्हें कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
- अयोध्या आने-जाने के लिए विशेष ट्रेन की व्यवस्था।
- यात्रा के दौरान भोजन की सुविधा।
- अयोध्या में ठहरने की व्यवस्था।
- स्थानीय आवागमन और दर्शन की व्यवस्था।
- सुरक्षा, चिकित्सा और यात्रा मार्गदर्शन के लिए आवश्यक इंतजाम।
- निर्धारित रेलवे स्टेशन तक पहुंचाने और यात्रा के बाद वापस छोड़ने के लिए जिला प्रशासन की ओर से परिवहन व्यवस्था।
यात्रा के कुछ निर्धारित कार्यक्रमों में अयोध्या के साथ वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ धाम के दर्शन भी शामिल किए गए हैं। हालांकि, इसका कार्यक्रम प्रत्येक यात्रा के अनुसार तय होता है।
कौन उठा सकता है योजना का लाभ? जानिए पात्रता
योजना के राजपत्र में जारी नियमों के अनुसार आवेदन करने वाले व्यक्ति को निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होती हैं:
- आवेदक छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना चाहिए।
- उसकी आयु 18 वर्ष से कम और 75 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- आवेदक ने पहले इस योजना के तहत यात्रा का लाभ नहीं लिया हो।
- यात्रा के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम होना जरूरी है।
- वर्तमान शासकीय सेवक इस योजना के पात्र नहीं हैं।
योजना के शुरुआती चयन नियमों में 55 वर्ष या उससे अधिक उम्र के आवेदकों को प्राथमिकता देने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, अंतिम चयन जिला स्तर पर उपलब्ध सीटों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होता है
बुजुर्गों के लिए सहायक ले जाने की भी सुविधा
योजना में वरिष्ठ नागरिकों की सुविधा का भी ध्यान रखा गया है। 65 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे व्यक्ति, जो अकेले यात्रा के लिए आवेदन करते हैं, उन्हें अपने साथ एक सहायक ले जाने की पात्रता दी गई है।
राजपत्र में सहायक के लिए 21 वर्ष से अधिक और 50 वर्ष से कम आयु की शर्त निर्धारित है। समूह में यात्रा करने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी सहायक से संबंधित अलग प्रावधान हैं।
कैसे होता है श्रद्धालुओं का चयन?
योजना के तहत यात्रियों का चयन जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति करती है।
चयन प्रक्रिया के कुछ प्रमुख नियम इस प्रकार हैं:
- ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 75 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों के लिए 25 प्रतिशत हितग्राहियों का प्रावधान है।
- 55 वर्ष या उससे अधिक उम्र के आवेदकों को शुरुआती चरण में प्राथमिकता दी जाती है।
- निर्धारित कोटे से अधिक आवेदन आने पर लॉटरी के माध्यम से चयन किया जाता है।
- चयनित यात्रियों के अतिरिक्त 25 प्रतिशत की प्रतीक्षा सूची भी बनाई जाती है।
- शुरुआती दिशा-निर्देशों में एक यात्रा के लिए 850 यात्रियों का प्रावधान है, जिसे आवश्यकता के अनुसार 1,000 तक बढ़ाया जा सकता है।
चयनित यात्रियों की सूची जिला प्रशासन के माध्यम से सार्वजनिक की जाती है।
श्री रामलला दर्शन योजना के लिए आवेदन कैसे करें?
योजना के लिए आवेदन निर्धारित प्रारूप में ऑफलाइन किया जा सकता है। इसके लिए आवेदक अपने क्षेत्र की ग्राम पंचायत या शहरी क्षेत्र में संबंधित नगरीय निकाय में संपर्क कर सकते हैं।
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज:
- निर्धारित प्रारूप में आवेदन पत्र।
- हालिया रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो।
- निवास प्रमाण के लिए राशन कार्ड, आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस या बिजली बिल जैसे स्वीकार्य दस्तावेज।
- आवेदक का मोबाइल नंबर।
- आपातकालीन स्थिति में संपर्क के लिए दो व्यक्तियों के नाम और उनकी जानकारी।
- यात्रा से पहले आवश्यक स्वास्थ्य जांच।
आवेदन की अंतिम तिथि और अगली यात्रा के लिए सीटों की उपलब्धता जिला प्रशासन की ओर से जारी सूचना पर निर्भर करती है। इसलिए इच्छुक श्रद्धालु अपने जनपद पंचायत, ग्राम पंचायत, नगरीय निकाय या जिला कलेक्टर कार्यालय से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
अब तक 45 हजार से अधिक श्रद्धालु कर चुके हैं रामलला के दर्शन
श्री रामलला दर्शन योजना के तहत अब तक बड़ी संख्या में प्रदेशवासी अयोध्या की तीर्थयात्रा कर चुके हैं।
छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग की 29 अप्रैल 2026 की जानकारी के अनुसार, उस समय तक 45,900 श्रद्धालु योजना के माध्यम से रामलला के दर्शन कर चुके थे। दुर्ग और राजनांदगांव रेलवे स्टेशन से रवाना हुए 850 श्रद्धालुओं की यात्रा पूरी होने के बाद यह संख्या बढ़कर 46,750 होने की जानकारी दी गई थी।
इसी रिपोर्ट के अनुसार, यात्रियों को अयोध्या के साथ काशी विश्वनाथ के दर्शन कराने की व्यवस्था भी कुछ यात्रा कार्यक्रमों में शामिल की गई थी।
आस्था और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी योजना
छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम को भांजे के रूप में देखने की एक विशेष सांस्कृतिक परंपरा है। माता कौशल्या की जन्मभूमि होने के कारण प्रदेश का रामायण और रामकथा से गहरा जुड़ाव माना जाता है।
श्री रामलला दर्शन योजना इसी धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव के बीच प्रदेश के पात्र श्रद्धालुओं को अयोध्या तक पहुंचने का अवसर देती है। विशेष रूप से ऐसे बुजुर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर लोग, जिनके लिए लंबी तीर्थयात्रा करना आसान नहीं होता, उनके लिए यह योजना महत्वपूर्ण है।
अयोध्या में रामलला के दर्शन की यह यात्रा केवल एक तीर्थयात्रा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की आस्था, सांस्कृतिक विरासत और राम से जुड़े पारंपरिक रिश्ते को अनुभव करने का अवसर भी है।

