50 रुपये की नाव सवारी से 35 लाख रुपये का राजस्व! चित्रकोट की कुडूक मछुआ समिति को मिला राज्य अलंकरण, जानिए सफलता की कहानी

छत्तीसगढ़ के बस्तर स्थित विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात में पर्यटकों को नौका विहार कराने वाली कुडूक मछुआ सहकारी समिति ने ग्रामीण आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। 62 मछुआ परिवारों से जुड़ी इस समिति ने अपनी कमाई से सात नौकाएं खरीदीं और कार्यालय भवन भी बनाया। वर्ष 2025-26 में समिति को 35 लाख रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। इसी उपलब्धि के लिए समिति को ठाकुर प्यारेलाल सिंह राज्य अलंकरण 2026 से सम्मानित किया गया है।

छत्तीसगढ़ के बस्तर की पहचान प्राकृतिक सुंदरता, जलप्रपातों और समृद्ध जनजातीय संस्कृति के लिए है। लेकिन यहां की एक और पहचान अब ग्रामीण सहकारिता और सामूहिक आर्थिक आत्मनिर्भरता के रूप में सामने आ रही है। जगदलपुर के विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात में पर्यटन गतिविधियों से स्थानीय मछुआ परिवारों को जोड़ने वाली प्राथमिक कुडूक मछुआ सहकारी समिति मर्यादित ने अपने सामूहिक प्रयासों से एक उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।

समिति की इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित राज्योत्सव 2026 में सम्मान मिला। राज्य शासन ने सहकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए समिति को प्रतिष्ठित ठाकुर प्यारेलाल सिंह राज्य अलंकरण 2026 प्रदान किया। यह सम्मान समिति की ओर से धनसिंह बघेल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से प्राप्त किया।

2009 में हुई शुरुआत, आज 62 मछुआ परिवारों की आजीविका का आधार

चित्रकोट की प्राथमिक कुडूक मछुआ सहकारी समिति का पंजीयन 23 मार्च 2009 को हुआ था। करीब 17 साल पहले शुरू हुई यह पहल आज बस्तर के 62 मछुआ परिवारों को आजीविका से जोड़ रही है।

समिति ने मत्स्याखेट के साथ-साथ चित्रकोट जलप्रपात आने वाले पर्यटकों के लिए नौका विहार की सुविधा को भी अपनी प्रमुख गतिविधियों में शामिल किया। इससे स्थानीय परिवारों को पर्यटन से सीधे आय अर्जित करने का अवसर मिला।

इस पहल की खास बात यह है कि समिति ने अपनी कमाई को केवल सदस्यों के बीच वितरित करने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उससे भविष्य की जरूरतों के लिए संसाधन भी विकसित किए।

50 रुपये में चित्रकोट जलप्रपात में नौका विहार

चित्रकोट जलप्रपात को भारत के प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। यहां आने वाले पर्यटकों के लिए समिति की ओर से मात्र 50 रुपये प्रति व्यक्ति की दर से नौका विहार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

इस किफायती सेवा ने पर्यटकों को आकर्षित करने के साथ स्थानीय मछुआ परिवारों के लिए आय का एक नियमित माध्यम तैयार किया है।

समिति ने अपनी अर्जित आय से सात कार्यशील नौकाएं खरीदी हैं। इसके साथ ही अपना कार्यालय भवन भी तैयार कराया है। इस तरह समिति ने बाहरी वित्तीय सहायता पर निर्भर रहने के बजाय अपनी कमाई से संचालन संबंधी संसाधन विकसित किए।

35 लाख से अधिक राजस्व, 5.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ

समिति की आर्थिक उपलब्धियां भी उल्लेखनीय हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान नौका विहार से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से समिति को 35 लाख रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ।

वहीं, इसी वित्तीय वर्ष में समिति ने लगभग 5.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया। समिति की ओर से सदस्यों को 2.5 प्रतिशत की दर से लाभांश भी वितरित किया गया।

31 मार्च 2026 तक समिति का संचित लाभ लगभग 37 लाख रुपये पहुंच चुका था।

यहां राजस्व, शुद्ध लाभ और संचित लाभ के बीच अंतर समझना जरूरी है। 35 लाख रुपये से अधिक की राशि राजस्व है, 5.50 लाख रुपये वित्तीय वर्ष का शुद्ध लाभ और 37 लाख रुपये पिछले वर्षों सहित संचित लाभ है।

सहकारिता के दम पर ग्रामीण आत्मनिर्भरता की मिसाल

चित्रकोट की कुडूक मछुआ सहकारी समिति की सफलता केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है। यह दिखाती है कि स्थानीय संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और सामूहिक प्रयास ग्रामीण परिवारों की आजीविका को मजबूत बना सकते हैं।

समिति के मॉडल में तीन प्रमुख पहलू दिखाई देते हैं:

  • सामूहिक भागीदारी: 62 मछुआ परिवार एक सहकारी संस्था के माध्यम से मिलकर काम कर रहे हैं।
  • आय का पुनर्निवेश: अपनी कमाई से सात नौकाओं की खरीद और कार्यालय भवन का निर्माण किया गया।
  • पर्यटन से रोजगार: चित्रकोट आने वाले पर्यटकों को नौका विहार की सुविधा देकर स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां विकसित की गईं।

इस तरह मत्स्याखेट और पर्यटन को एक साथ जोड़कर स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के अवसर तैयार किए गए हैं।

ठाकुर प्यारेलाल सिंह राज्य अलंकरण 2026 से सम्मानित

Press Release:Press Information Bureau

छत्तीसगढ़ के 26वें राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित राज्योत्सव 2026 में प्राथमिक कुडूक मछुआ सहकारी समिति मर्यादित, चित्रकोट को सहकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए ठाकुर प्यारेलाल सिंह राज्य अलंकरण से सम्मानित किया गया।

समिति की ओर से धनसिंह बघेल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हाथों यह सम्मान ग्रहण किया।

यह सम्मान समिति से जुड़े मछुआ परिवारों के सामूहिक प्रयास, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और पर्यटन गतिविधियों में स्थानीय भागीदारी बढ़ाने के काम को राज्य स्तर पर मिली पहचान है।

बस्तर पर्यटन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मॉडल?

बस्तर में चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़, कांगेर घाटी और अन्य प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के कारण पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं। लेकिन पर्यटन का वास्तविक लाभ तभी स्थानीय अर्थव्यवस्था तक पहुंचता है, जब वहां रहने वाले लोगों को इससे सीधे रोजगार और आय के अवसर मिलें।

चित्रकोट की कुडूक मछुआ सहकारी समिति ने इसी दिशा में एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। पर्यटकों को नौका विहार की सुविधा देने के साथ स्थानीय मछुआ परिवारों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ा गया है।

ऐसे मॉडल को अन्य पर्यटन स्थलों पर भी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अपनाया जा सकता है। इसके लिए पर्यटकों की सुरक्षा, नौकाओं का रखरखाव, प्रशिक्षित संचालन और पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन महत्वपूर्ण होंगे।

चित्रकोट की यह कहानी बताती है कि पर्यटन केवल घूमने-फिरने का माध्यम नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों की आर्थिक आत्मनिर्भरता का आधार भी बन सकता है। 50 रुपये की नौका सवारी से शुरू हुई यह पहचान आज राज्य अलंकरण तक पहुंच चुकी है।

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