छत्तीसगढ़ में महिलाओं और बालिकाओं के कल्याण, सुरक्षा और उनके मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए राज्य शासन द्वारा लगातार संवेदनशील और प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। “शक्ति का वंदन, नारी शक्ति का अभिनंदन” के इस पावन भाव को चरितार्थ करते हुए, समाज में महिलाओं के विरुद्ध होने वाली हिंसा, घरेलू प्रताड़ना और आपातकालीन संकट के दौर से गुजर रही पीड़िताओं को त्वरित राहत देने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ (Sakhi One Stop Centre) का संचालन किया जा रहा है।
यह केंद्र पीड़ित महिलाओं को एक ही छत के नीचे पांच प्रमुख बहु-विभागीय सहायताएं उपलब्ध कराता है, जिससे उन्हें न्याय पाने और समाज में पुनः सम्मान के साथ जीने का अवसर मिलता है।
सखी वन स्टॉप सेंटर: प्रमुख विशेषताएं और सुविधाएं
| सहायता का मुख्य क्षेत्र | विवरण एवं मिलने वाली सेवाएं |
| चिकित्सकीय सहायता (Medical Support) | हिंसा या दुर्घटना से पीड़ित महिलाओं को तुरंत नजदीकी अस्पताल में प्राथमिक उपचार और मेडिकल चेकअप की सुविधा। |
| विधिक परामर्श (Legal Aid & Advice) | अनुभवी वकीलों और विधिक सलाहकारों के माध्यम से कानूनी अधिकारों की जानकारी तथा कोर्ट-कचहरी के मामलों में सहायता। |
| पुलिस सहयोग (Police Assistance) | एफआईआर (FIR) दर्ज कराने, पुलिस सुरक्षा और कानूनी प्रक्रियाओं में त्वरित प्रशासनिक मदद। |
| मनोवैज्ञानिक परामर्श (Psycho-Social Counseling) | मानसिक सदमे, डिप्रेशन और पारिवारिक तनाव से उबरने के लिए एक्सपर्ट्स द्वारा विशेष काउंसलिंग। |
| अस्थायी आश्रय (Temporary Shelter) | संकट और खतरे की स्थिति में पीड़ित महिलाओं तथा उनके आश्रित बच्चों को सुरक्षित रहने के लिए कुछ दिनों का अस्थायी प्रवास। |
वर्ष 2017 से छत्तीसगढ़ के जिलों में विस्तार और डिजिटल संचालन
छत्तीसगढ़ में सखी वन स्टॉप सेंटर की शुरुआत वर्ष 2017 से प्रदेश के 27 जिलों में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को लिंग आधारित हिंसा (Gender-Based Violence) से बचाना है।
बिलासपुर स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासक श्रीमती पूनम तिवारी बताती हैं कि यह केंद्र केंद्र सरकार की निर्भया फंड योजना के अंतर्गत ‘निर्भया डैशबोर्ड’ के जरिए पूरी पारदर्शिता और डिजिटल मॉनिटरिंग के साथ संचालित होता है। यहाँ आने वाली महिलाओं के मामलों को पूरी गोपनीयता के साथ दर्ज किया जाता है और संबंधित विभागों के समन्वय से त्वरित कार्रवाई की जाती है।
किन समस्याओं में ली जा सकती है मदद?
सखी वन स्टॉप सेंटर के दरवाजे हर उस महिला और बालिका के लिए खुले हैं जो किसी भी प्रकार के संकट में हैं। यहाँ मुख्य रूप से निम्नलिखित मामलों में सहायता प्रदान की जाती है:
- घरेलू हिंसा (Domestic Violence): पति या परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़ना।
- लैंगिक हिंसा और उत्पीड़न: कार्यस्थल या सार्वजनिक स्थानों पर छेड़छाड़ और शोषण।
- बाल विवाह और दहेज प्रताड़ना: बाल विवाह के दबाव या दहेज के लिए तंग किए जाने पर कानूनी व सामाजिक सुरक्षा।
- अज्ञात या संकटग्रस्त महिलाएं: ऐसी महिलाएं जो बेसहारा हैं या जिन्हें आपातकालीन मदद की आवश्यकता है।
“हर परिस्थिति में साथ, हर महिला को सुरक्षा और न्याय का अधिकार”
राज्य शासन का यह प्रयास है कि प्रदेश की कोई भी महिला खुद को अकेला या असहाय महसूस न करे। ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ में तैनात प्रशिक्षित महिला कर्मचारी, काउंसलर और सुरक्षाकर्मी पूरी तत्परता के साथ पीड़िताओं की सहायता करती हैं।
इसके साथ ही, समाज में जागरूकता फैलाने के लिए विभिन्न अभियानों के माध्यम से महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है, ताकि वे अन्याय के खिलाफ खुलकर अपनी आवाज उठा सकें।
“शक्ति का वंदन, नारी शक्ति का अभिनंदन” के संकल्प को धरातल पर उतारता सखी वन स्टॉप सेंटर छत्तीसगढ़ में महिला सुरक्षा, स्वावलंबन और त्वरित न्याय का एक सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है।
एक ही छत के नीचे चिकित्सा, पुलिस, कानूनी और मनोवैज्ञानिक सहायता मिलने से पीड़ित महिलाओं का आत्मविश्वास लौट रहा है, जो राज्य में मजबूत सुशासन और महिला-हितैषी नीतियों का एक बेहतरीन उदाहरण है।

