कोंडागांव (छत्तीसगढ़)। बस्तर संभाग में दशकों के डर, असुरक्षा और माओवादी दहशत का दौर अब इतिहास बन रहा है। केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त और प्रभावी नीतियों के चलते बस्तर संभाग तेजी से माओवाद से मुक्ति की ओर बढ़ रहा है। वर्षों तक जिन अंदरूनी और वनांचल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का पहुंचना एक सपना था, आज वहां शांति और विश्वास का नया सवेरा हुआ है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव जिले के दूरस्थ और संवेदनशील इलाकों तक सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं को पहुंचाने के लिए विशेष प्राथमिकता के साथ काम किया जा रहा है। अब बस्तर की पहचान बदल रही है और विकास के बंद द्वार खुल रहे हैं।
सड़क योजना से गांव
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत कोण्डागांव जिले के उन सुदूर गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ने का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है, जो कभी माओवादी गतिविधियों के मुख्य केंद्र हुआ करते थे। विशेष रूप से केशकाल और मर्दापाल क्षेत्र के जिन गांवों तक कभी शासन की योजनाएं नहीं पहुंच पाती थीं, आज वहां निर्माण कार्यों की गूंज है।
ग्रामीणों को मुख्य मार्गों से जोड़ने और आवागमन को सुगम बनाने के उद्देश्य से जिले में लगभग 103.60 किलोमीटर की 29 महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है। इस पूरी महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल लागत ₹78 करोड़ 24 लाख है। इसमें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना परियोजना क्रियान्वयन इकाई कोण्डागांव के अंतर्गत अकेले 19 सड़कों का निर्माण किया जा रहा है, जिसकी कुल लंबाई 68.37 किलोमीटर और लागत 50 करोड़ 27 लाख रुपये है।
आपके क्षेत्र में कहाँ-कहाँ बन रही हैं सड़कें
कार्यपालन अभियंता (PMGSY) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले के अलग-अलग ब्लॉकों में सड़कों का जाल कुछ इस तरह बिछाया जा रहा है:
- केशकाल और फरसगांव क्षेत्र
(PMGSY-4 वर्ष 2025-26)
इस क्षेत्र के अंतर्गत कुल 11 सड़कों को मंजूरी दी गई है, जिसकी कुल लंबाई 39.23 किलोमीटर है। इनमें प्रमुख मार्ग निम्नलिखित हैं,
- बावनमारी से बेडमामारी मार्ग
- बटराली होनहेड़ आरडी से उपरचंदेली और होनहेड़ से घोडाझर
- बिंझे से चिखलाडीही और कलेपाल से पराली
- तोडासी से गादड़ और रावबेड़ा से गिरगोली
- कुवेमारी से भण्डारपाल, कुएंमारी से कुदारवाही तथा भण्डारपाल से मडगांव
- फरसगांव क्षेत्र के पतोड़ा से कुम्हारपारा (लंबाई 04 किलोमीटर)
2. मर्दापाल क्षेत्र
मर्दापाल के वनांचल अंचलों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कुल 12 सड़कों की स्वीकृति मिली है, जिनकी कुल लंबाई 45 किलोमीटर है। इनमें शामिल हैं,
- पुजारीपारा से कटुलपारा और खासपारा खचगांव गोदाम से मांझीपारा
- पल्ली-बरसूर मार्ग से कीलम और खोड़सानार से पदेली
- मर्दापाल-बयानार मार्ग से लखापुरी और लखापुरी से एहरा
- बेतबेड़ा से ढोलमांदरी और बयानार मार्ग से बड़को
- कुदूर मार्ग से पटेलपारा और छोटेउसरी मार्ग से टिमेनार
- बयानार मार्ग से नहाकानार और तोडम मुख्य मार्ग से मुंडापारा
- कोंडागांव-कोरमेल मार्ग से पटेलपारा खडपड़ी
3. कोंडागांव क्षेत्र
इसके अतिरिक्त कोंडागांव मुख्य क्षेत्र के अंतर्गत भी 6 महत्वपूर्ण सड़कों का निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है, जिसकी कुल लंबाई 20.36 किलोमीटर है।
बदल जाएगी ग्रामीणों की तकदीर
इन पक्की सड़कों का निर्माण केवल कंक्रीट का ढांचा नहीं है, बल्कि यह कोंडागांव के ग्रामीण इलाकों के लिए लाइफलाइन साबित होने वाली हैं। सड़क संपर्क बेहतर होने से क्षेत्र को कई बड़े लाभ मिलेंगे,
- स्वास्थ्य और शिक्षा तक त्वरित पहुंच– अब आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस या स्वास्थ्य सेवाएं गांवों तक आसानी से पहुंच सकेंगी। साथ ही, अंदरूनी क्षेत्रों के बच्चों के लिए हाई स्कूल और कॉलेज तक आना-जाना सुगम हो जाएगा।
- आर्थिक समृद्धि और बाजार कनेक्टिविटी– स्थानीय किसानों और वनोपज संग्राहकों को अपनी फसल, फल और पारंपरिक कलाकृतियों को बड़े बाजारों तक ले जाने में आसानी होगी, जिससे बिचौलियों का अंत होगा और उनकी आय बढ़ेगी।
- पर्यटन विकास को बढ़ावा– बस्तर और कोंडागांव अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जलप्रपातों और समृद्ध जनजातीय संस्कृति के लिए जाने जाते हैं। सड़कों के विस्तार से इन अछूते पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की पहुंच आसान होगी, जिससे स्थानीय रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
बस्तर अब दहशत के साये से बाहर निकलकर प्रगति के पथ पर दौड़ रहा है। सरकार और जनता के बीच बढ़ता यह आपसी विश्वास इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ का यह वनांचल क्षेत्र देश के सबसे विकसित और समृद्ध ग्रामीण अंचलों में शुमार होगा।

