प्रेमा माथुर: भारत की पहली महिला कमर्शियल पायलट जिन्हें महिला होने की वजह से नहीं दी गई नौकरी!

दिलचस्प है आजादी की उड़ान भरने वाली भारत की पहली कमर्शियल पायलट की कहानी: प्रेमा माथुर
 
आजादी, आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की एक कहानी और उसकी नायिका प्रेमा माथुर!
 
 
साल 1947 में सिर्फ देश की गुलामी खत्म नहीं हुई थी बल्कि भारतीय महिलाओं के लिए असामनता और भेदभाव की कुरीति भी खत्म हुई। जिसका प्रतीक हैं प्रेमा माथुर। प्रेमा पहली भारतीय महिला कमर्शियल पायलट थीं जिन्हें 37 साल की उम्र में कमर्शियल पायलट का लाइसेंस मिला। 1910 में जन्मी प्रेमा के बड़े भाई हवाई जहाज के बिजनेस में थे, एक बार उन्हें भाई के साथ पायलट के कॉकपिट में बैठने का मौका मिला, यहीं से प्रेमा प्रेरित हुईं। उन्होंने आसमानों की सैर को अपना सपना बना लिया। एक संपन्न परिवार से होने की वजह से प्रेमा को सपोर्ट भी मिला। उन्होंने इलाहाबाद ट्रेनिंग क्लब से कैप्टन अटल के नेतृत्व में ट्रेनिंग लेनी शुरू की।
 
ट्रेनिंग के दौरान प्रेमा को ये समझ में आया कि उनकी राह इतनी भी आसान नहीं है। सफलतापूर्वक ट्रेनिंग पूरा करने के बावजूद प्रेमा को कहीं नौकरी नहीं मिली। कोलकाता में नेशनल एयर रेस कॉम्पीटिशन का आयोजन हुआ। प्रेमा इसका हिस्सा बनना चाहती थीं, लेकिन आयोजकों को ये लगता था कि अकेले महिला अगर पुरुष पायलट्स के साथ जहाज उड़ाएगी तो रेस पर बुरा असर पड़ेगा। लेकिन प्रेमा ने रेस में भाग लेने के लिए एड़ी चोटी की जोर लगा दी और अपनी जिद से आखिर कर वो रेस में भाग लेने में सफल हो गईं। उन्होंने न सिर्फ रेस में हिस्सा लिया बल्कि रेस जीती भी। प्रेमा को रातों रात प्रसिद्धि मिली, हर कोई उस महिला के बारे में जानना चाहता था जिसने अनुभवी पायलेट्स को पीछे छोड़ दिया। इतनी प्रसिद्धि के बाद भी प्रेमा को नौकरी नहीं मिल रही थी। इंटरव्यू में उनसे अजीबो गरीब सवाल पूछे जाते थे, उन्हें एयर होस्टेस बनने की सलाह दी जाती थी। 
 
एयर इंडिया ने उन्हें ये कहते हुए नौकरी देने से मना कर दिया कि लोगों को जब ये पता लगेगा कि एक महिला जहाज उड़ा रही है तो वो विमान की उड़ान पर भरोसा नहीं करेंगे और विमान की सेवा नहीं लेंगे। प्रेमा माथुर को 8 एयरलाइन्स से रिजेक्शन मिलने के बाद 1947 में एक फोनकॉल आया जिसने सब कुछ बदल कर रख दिया। ये फोन कॉल था डेक्कन एयरलाइंस से, जिसने हैदराबाद से अपना ऑपरेशन शुरू किया था। 38 साल की उम्र में उन्हें पहली जॉब मिली और वो पहली महिला कमर्शियल को-पायलट बनीं। 1953 में उन्हें एयर इंडिया ने खुद बुलाकर नौकरी दी और कैप्टन बनाया। 30 साल तक उन्होंने एयर इंडिया को अपनी सेवाएं दी इस दौरान उन्होंने इंदिरा गांधी से लेकर लेडी माउंटबेटन तक को हवाई सफर करवाया। प्रेमा माथुर की कहानी आगे चलकर लिखी गई औरतों की उपलब्धियों की अनगिनत कहानियों की नींव है। उन्होंने जिद, जुनून, आत्मविश्वास और दृढ़ता से लड़ाई लड़ी और रूढ़ियों को तोड़ा। एविएशन के फील्ड में जहां महिलाएं आज खड़ी हैं, उसके पीछे उनकी लंबी लड़ाई, मेहनत और संघर्षपूर्ण यात्रा है, जिसे हम सलाम करते हैं।
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Rishita Diwan

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