अबूझमाड़ की सेवा को मिला राष्ट्रीय सम्मान

पद्मश्री से अलंकृत हुए डॉ. रामचंद्र गोडबोले और सुनीता गोडबोले

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के दुर्गम और माओवादी प्रभावित अबूझमाड़ क्षेत्र में तीन दशक तक निःस्वार्थ भाव से जनसेवा करने वाले डॉ. रामचंद्र गोडबोले और उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जताई खुशी

इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान अबूझमाड़ की सेवा का प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि गोडबोले दंपति ने बस्तर के दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में मानवता और समर्पण की जो मिसाल पेश की है, वह पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने समाज के सबसे जरूरतमंद लोगों के बीच रहकर सेवा का जो कार्य किया, वह आने वाली पीढ़ियों को समाजसेवा के लिए प्रेरित करेगा।

जनजातीय समाज की सेवा को समर्पित जीवन

डॉ. रामचंद्र गोडबोले और सुनीता गोडबोले ने वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़कर अपना पूरा जीवन जनजातीय समाज की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने बस्तर के बारसूर और अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित लोगों तक निःशुल्क चिकित्सा सेवा पहुंचाई।

जहां सड़क, बिजली और संचार जैसी मूलभूत सुविधाएं भी सीमित थीं, वहां गोडबोले दंपति ने लोगों के बीच भरोसा कायम किया और स्वास्थ्य सेवाओं की नई उम्मीद जगाई।

कुपोषण और स्वास्थ्य जागरूकता पर विशेष कार्य

गोडबोले दंपति ने केवल इलाज तक ही अपने कार्य को सीमित नहीं रखा, बल्कि ग्रामीण और जनजातीय समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने का भी महत्वपूर्ण कार्य किया।

उन्होंने कुपोषण मुक्ति, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और स्वच्छता के प्रति चेतना विकसित करने में अहम भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से हजारों ग्रामीणों और आदिवासी परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकीं।

कठिन परिस्थितियों में भी नहीं छोड़ी सेवा

अबूझमाड़ जैसे दुर्गम और माओवादी प्रभावित क्षेत्र में काम करना किसी चुनौती से कम नहीं था। बावजूद इसके, गोडबोले दंपति ने कभी अपने सेवा कार्य से पीछे हटने का विचार नहीं किया।

घने जंगलों, कठिन पहाड़ियों और सीमित संसाधनों के बीच रहकर उन्होंने हजारों जरूरतमंद लोगों का उपचार किया और उनके जीवन में नई आशा का संचार किया।

समाज के लिए प्रेरणा बना समर्पण

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि गोडबोले दंपति की सेवा भावना समाज में करुणा, दायित्वबोध और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा को और मजबूत करेगी।

आज पद्मश्री सम्मान के माध्यम से देश ने उनके त्याग, समर्पण और मानवता की सेवा को राष्ट्रीय पहचान दी है। गोडबोले दंपति का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्ची सेवा ही सबसे बड़ा सम्मान दिलाती है।

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Sonal Gupta

Content Writer

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