छत्तीसगढ़ में ‘लखपति दीदी योजना’ (Lakhpati Didi Yojana) ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल बन गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विजन “सशक्त नारी, सशक्त छत्तीसगढ़” के तहत, राज्य में अब तक 13 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी का दर्जा प्राप्त कर चुकी हैं। इसके साथ ही, 31 लाख से ज्यादा महिलाएं विभिन्न स्व-सहायता समूहों (Self-Help Groups – SHG) से जुड़कर स्वरोज़गार की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रही हैं।
लखपति दीदी योजना और इसके लक्ष्य
लखपति दीदी ग्रामीण विकास मंत्रालय और छत्तीसगढ़ के बिहान मिशन (Bihan Yojana) की एक संयुक्त पहल है।
- आय का लक्ष्य: स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं की वार्षिक पारिवारिक आय को ₹1,00,000 या उससे अधिक तक पहुँचाना।
- आर्थिक उद्यमिता: इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को केवल वित्तीय समावेशन तक सीमित न रखकर, उन्हें कुशल उद्यमी और आत्मनिर्भर बनाना है।
- लखपति ग्राम का निर्माण: राज्य सरकार अब ‘लखपति दीदी ग्राम पोर्टल’ के माध्यम से व्यक्तिगत सफलता को आगे बढ़ाते हुए पूरे के पूरे ‘लखपति ग्राम’ (Lakhpati Gram) विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।
व्यवसाय के लिए वित्तीय सहायता
सरकार महिलाओं को अपना स्वतंत्र व्यवसाय स्थापित करने के लिए सीधे आर्थिक सहायता और बेहद आसान ऋण उपलब्ध करा रही है:
- बिना गारंटी का लोन: स्व-सहायता समूहों (SHGs) को अपना व्यवसाय शुरू करने और उसे बढ़ाने के लिए बैंकों से ₹20 लाख तक का बिना गारंटी (Collateral-free) लोन दिया जाता है।
- ब्याज अनुदान (Interest Subvention): ₹3 लाख तक के ऋण पर 7% की दर से ब्याज में छूट दी जाती है ताकि लोन चुकाना आसान हो।
- रिवॉल्विंग फंड: छोटे समूहों को ₹20,000 से ₹30,000 तक का आंतरिक (Revolving) फंड प्रदान किया जाता है ताकि वे अपनी तत्काल और रोज़मर्रा की जरूरतों को पूरा कर सकें।
- ओवरड्राफ्ट सुविधा: जन-धन खाता रखने वाली प्रत्येक SHG महिला सदस्य ₹5,000 तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा का लाभ ले सकती है।
कौशल विकास और स्वरोज़गार प्रशिक्षण
बिहान मिशन के माध्यम से महिलाओं को उनकी रुचि के अनुसार निःशुल्क व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है।
- आधुनिक तकनीक: महिलाओं को ‘नमो ड्रोन दीदी’ जैसी पहलों के तहत ड्रोन चलाने और मरम्मत करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
- कुटीर उद्योग: अगरबत्ती, धूप निर्माण, सिलाई, हस्तशिल्प और खाद्य प्रसंस्करण जैसे लघु उद्योगों की ट्रेनिंग दी जाती है।
- कृषि व पशुपालन: जैविक कृषि, बागवानी, डेयरी फार्मिंग और मुर्गी पालन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्थायी आजीविका से जोड़ा जाता है।
योजना के लिए पात्रता
इस योजना का लाभ लेने के लिए महिलाओं को कुछ आसान शर्तों को पूरा करना होता है:
- निवास: महिला का छत्तीसगढ़ राज्य का स्थायी निवासी होना आवश्यक है।
- समूह सदस्यता: आवेदिका का किसी पंजीकृत स्व-सहायता समूह (SHG) का सदस्य होना अनिवार्य है।
- आयु सीमा: महिला की आयु 18 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
- दस्तावेज़: पहचान के लिए आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक और SHG सदस्यता का वैध प्रमाण पत्र आवश्यक है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के अनुसार, राज्य की महिलाएं आज केवल घरों तक सीमित नहीं हैं; वे नवाचार और अपनी कड़ी मेहनत के दम पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुकी हैं। 13 लाख महिलाओं का लखपति बनना महज़ एक शुरुआत है; भविष्य में सरकार का लक्ष्य इन मेहनती मातृशक्तियों को सशक्त बनाकर आर्थिक स्वतंत्रता के नए शिखर तक ले जाना है।

