

• मंगल ग्रह से वैज्ञानिकों को मिला सिग्नल
• 16 मिनट में रिसीव हुआ सिग्नल
• साइंटिस्ट्स कर रहे हैं डीकोड
पृथ्वी पर मंगल ग्रह से सिग्नल भेजा गया है। ये सिग्नल पहली बार भेजा गया है जिसे धरती पर 16 मिनट बाद रिसिव किया गया। इस सिग्नल को यूरोपियन स्पेस एजेंसी के एक्सोमार्स ट्रेस गैस ऑर्बिटर (ExoMars Trace Gas Orbiter (TGO)) ने धरती पर भेजा है।
‘ए साइन इन स्पेस’ प्रोजेक्ट
‘ए साइन इन स्पेस’ प्रोजेक्ट के तहत इस सिग्नल को धरती पर भेजा गया है। जिसे भेजने के 16 मिनट बाद रिसिव किया गया है। 24 मई को रात 9 बजे मार्स के ऑर्बिट में घूम रहे TGO ने सिग्नल भेजा। इस एक्सपेरिमेंट का उद्देश्य है कि ये पता लगाना है कि अगर किसी दूसरे ग्रह या एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियल सिविलाइजेशन (एलियन्स) से हमारी धरती पर कोई सिग्नल भेजा जाएगा तो उसे हम रिसीव कर सकते हैं या नहीं।
एक्सपेरिमेंट की सफलता से एलियन्स से कनेक्ट होना होगा आसान
इससे जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि TGO से भेजे गए सिग्नल को वेस्ट वर्जीनिया के ग्रीन बैंक टेलीस्कोप, इटली के मेडिसिना रेडियो एस्ट्रोनॉमिकल स्टेशन, कैलिफोर्निया के एलन टेलीस्कोप ऐरे और न्यू मैक्सिको के वेरी लार्ज ऐरे ने भी रिसिव किए हैं। वहीं, सर्च फॉर एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस इंस्टीट्यूट (SETI) के साइंटिस्ट और ‘ए साइन इन स्पेस’ प्रोजेक्ट के चीफ इस बारे में बात करते हुए कहते हैं कि हमने हमेशा शक्तिशाली और परिवर्तनकारी घटनाओं को सामने लाने की दिशा में काम किया है, ये आश्चर्य से भरा है। एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियल सिविलाइजेशन (एलियन्स) से सिग्नल या मैसेज मिलना पूरी मानव जाति के लिए एक बड़ा परिवर्तनकारी अनुभव है।
सिग्नल डीकोड कर रहे हैं वैज्ञानिक
इंटरनेशनल एक्स्पर्ट्स और स्पेस साइंटिस्ट्स की अपनी टीम के साथ मिलकर इसके लिए राय मांगी जा रही है ताकि मंगल ग्रह से मिले इस सिग्नल को डीकोड करने के लिए मदद मिले। डिकोडिंग की प्रोसेस से पता चलेगा कि आखिर पृथ्वी पर भेजे गए सिग्नल या मैसेज में क्या है।
भले ही ये प्रयोग किसी एक्सपेरिमेंट की तरह हो लेकिन वैज्ञानिकों के द्वारा किया गया यह कार्य नई जनरेशन को मंगल से जुड़े नए और महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में मिली नई जानकारी से जोड़ेगा।

