INDIA का पहला ग्रीन हाइड्रोजन ब्लेंडिंग कामकाज गुजरात में हुआ शुरू, कई हैं इसके फायदे !



• NTPC ने शुरू किया भारत का पहला ग्रीन हाइड्रोजन ब्लेंडिंग प्रोजेक्ट
• NTPC के कवास टाउनशिप सूरत में ग्रीन हाइड्रोजन ब्लेंडिंग कामकाज
• 6 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

Green Hydrogen Blending Project: देश में थर्मल पावर की दिग्गज कंपनी नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन (NTPC) ने भारत के पहले ग्रीन हाइड्रोजन ब्लेंडिंग प्रोजेक्ट की शुरूआत कर दी है। ग्रीन हाइड्रोजन ब्लेंडिंग एनटीपीसी (NTPC) के कवास टाउनशिप सूरत में पाइप्ड नेचुरल गैस नेटवर्क से शुरू हुआ है। एनटीपीसी (NTPC) के द्वारा बयान जारी कर कहा गया है कि यह प्रोजेक्ट एनटीपीसी और गुजरात गैस लिमिटेड का जॉइंट प्रोजेक्ट के रूप में काम करेगा।

PM Modi ने की थी शुरूआत

एनटीपीसी (NTPC) कवास और गुजरात गैस लिमिटेड के कई अधिकारी इस मौके पर थे। एनटीपीसी कवास में हाइड्रोजन ब्लेंडिंग ऑपरेशन शुरू होने के बाद जागरूकता कार्यक्रम भी शुरू किया गया। नेशनल थर्मल पावर कंपनी की तरफ से कहा गया कि इस प्रोजेक्ट की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2022 में जुलाई में की थी। एनटीपीसी (NTPC) के इस बिल्डिंग प्रोजेक्ट से h2-NG गैस की कवास टाउनशिप के घरों में सप्लाई होगी।

नेशनल ग्रीन हाईड्रोजन मिशन को मंजूरी

सूरत के कवास में एनटीपीसी (NTPC) के ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट में 1 मेगा वाट के फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट से बिजली का इस्तेमाल कर पानी के इलेक्ट्रोलाइसिस की प्रक्रिया तैयार की जा रही है। NTPC ने बताया कि पेट्रोलियम और नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड ने PNG में 5 फ़ीसदी ग्रीन हाइड्रोजन के ब्लेंडिंग की मंजूरी दे दी है, आगे इसे बढ़ाकर 20 फ़ीसदी पर ले जाया जाएगा।

इसके साथ ही ऑयल इंपोर्ट पर खर्च कम करने और 6 लाख से ज्यादा लोगों को नौकरियां देने के लिए केंद्र सरकार ने नेशनल ग्रीन हाईड्रोजन मिशन के लिए हामी भर दी है। कैबिनेट ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के लिए 19,744 करोड़ रुपये दिए हैं। मौजूदा योजना के तहत सालाना 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है।

6 लाख लोगों को रोजगार

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर (Anurag Thakur) ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कैबिनेट नेशनल ग्रीन हाईड्रोजन मिशन पर काम कर रहा है। पीएम मोदी ने ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार के इस मिशन से 6,00,000 लोगों को रोजगार तो मिलेगा ही साथ ही इससे सालाना ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन में 50 मिलियन मीट्रिक टन की कमी भी आएगी।

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Dr. Kirti Sisodia

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