75 Years of Independence: 2013 में मंगलयान की सफलता ने रचा इतिहास, पहले प्रयास में सफल होने वाला देश बना भारत!



15 अगस्त 2022 को आजादी के अमृत महोत्सव का उत्सव हम मना रहे हों और विज्ञान के क्षेत्र में प्राप्त की गई उपलब्धियों को याद न करें ऐसा हो सकता है क्या। वैसे तो भारत ने अंतरिक्षा विज्ञान के क्षेत्र में कई सफलता हासिल की है लेकिन 2013 की उफलब्धि ने इतिहास रच दिया। दरअसल यही वो साल था जब भारत ने मंगलयान मिशन पर सफलता हासिल की। मंगलयान की सफलता ISRO (इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन) की एक ऐसी कामयाबी है, जिसने देश को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी देशों की कतार में खड़ा दिया।


2008 में हुई थी मिशन की घोषणा

वर्ष 2008 में ISRO के तत्कालीन अध्यक्ष माधवन नायर ने मंगल ग्रह के लिए एक मानव रहित मिशन की घोषणा की थी। 2010 में इस पर काम की शुरुआत हुई। और 2012 में सरकार ने इसकी अनुमति दी। यह इसरो की महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में से एक थी, इसीलिए वैज्ञानिकों ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए अपना पूरा जोर लगा दिया। 5 नवंबर 2013 को 2 बजकर 38 मिनट पर आंध्रप्रदेश के श्री हरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV सी-25 द्वारा मंगलयान को लांच किया गया। और इतिहास रचने में सफल हुआ।

पहले प्रयास में सफल हुआ भारत

मंगल पर यान भेजना ISRO के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। , क्योंकि विकसित देशों की अंतरिक्ष एजेंसियां भी पहली बार में ऐसा नहीं कर सकी थीं. कुल अभियानों में से दो तिहाई अभियान असफल रहे थे. वैज्ञानिकों ने अभियान पर पूरी नजर रखी ओर 24 सितंबर 2014 को यान के मंगल पर पहुंचते ही भारत विश्व में पहला ऐसा देश बन गया जो पहले ही प्रयास में सफल हुआ. खास बात ये है कि अब तक अमेरिका, रूस और यूरोप के बाद भारत ही पहला ऐसा देश है जो ये कारनामा कर सका.

इतिहास में दर्ज हो गया वो दिन

मंगलयान को 2013 में लांच किया गया, लेकिन मंगल की कक्षा में पहुंचने के लिए इसने 10 महीने लगा दिए. 22 सितंबर 2014 को यान ने मंगल के गुरुत्वीय क्षेत्र में प्रवेश किया. इसके बाद यान को बस अंतिम लक्ष्य को पाना था. 24 .सितंबर 2014 को सुबह 7 बजकर 17 मिनट पर 440 न्यूटन लिक्विड एपोजी मोटर को सक्रय किया गया. यान को मंगल तक पहुंचाने के लिए इसकी गति को कंट्रोल करना बेहद जरूरी था. अब तक प्रति सेकेंड 22.1 किमी प्रति सेकेंड की स्पीड से दौड़ रहे यान की स्पीड को 4.4 किमी प्रति सेकेंड तक लाया गया और सफलतापूर्वक मंगल की कक्षा में प्रवेश करा दिया गया.

खुशी से झूम उठे वैज्ञानिक, पीएम मोदी भी बने इस पल के साक्षी

यान के मंगल की कक्षा में प्रवेश होना वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ी खुशी थी, इस उपलब्धि को पाते ही वैज्ञानिक खुशी से झूम उठे, इस क्षण का दूरदर्शन पर सीधा प्रसारण किया गया. भारत के इस गौरवशाली क्षण को देखने के लिए पीएम प्रधानमंत्री खुद बेंगलुरु स्थित इसरो केंद्र में उपस्थित रहे थे.
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Dr. Kirti Sisodia

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