अनुभव और तर्क : मानसिकता का संतुलन

मानव जीवन की समझ न स्त्री होने से आती है, न पुरुष होने से। यह आती है मानसिकता और अनुभव से। हम अक्सर लिंग के आधार पर सोच को बाँट देते हैं, जबकि सच तो ये है कि सोच की दिशा उस यात्रा से बनती है, जिससे हम गुज़रे होते हैं।

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