मनुष्य इंसान नहीं, एक एहसास खोजता है
और शायद तभी जीवन में वह व्यक्ति भी आता है जो आपको पूरा नहीं करता… बल्कि आपके भीतर पहले से मौजूद पूर्णता को छू लेता है। फिर प्रेम पकड़ नहीं बनता- सहारा नहीं बनता-डर नहीं बनता।
और शायद तभी जीवन में वह व्यक्ति भी आता है जो आपको पूरा नहीं करता… बल्कि आपके भीतर पहले से मौजूद पूर्णता को छू लेता है। फिर प्रेम पकड़ नहीं बनता- सहारा नहीं बनता-डर नहीं बनता।