Padma Shri Budhri Tati: बस्तर की ‘बड़ी दीदी’ जिन्होंने शिक्षा से बदल दी हजारों जिंदगियाँ

Bastar, Abujhmad, Tribal Education, Women Empowerment और Social Service की बात हो तो एक नाम विशेष सम्मान के साथ लिया जाता है—पद्मश्री बुधरी ताती। बस्तर के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में दशकों तक शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता का अलख जगाने वाली बुधरी ताती आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो संसाधनों की कमी भी बदलाव की राह नहीं रोक सकती।

जब शिक्षा एक सपना थी…

आज जिन इलाकों में स्कूल और सड़कें दिखाई देती हैं, कभी वहाँ बुनियादी सुविधाएँ भी नहीं थीं। बस्तर और विशेष रूप से Abujhmad Region के कई गाँव शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास की मुख्यधारा से कटे हुए थे।

ऐसे समय में बुधरी ताती ने उन क्षेत्रों का रुख किया, जहाँ पहुँचना भी आसान नहीं था। उन्होंने गाँव-गाँव जाकर लोगों को शिक्षा का महत्व समझाया और बालिकाओं को स्कूल से जोड़ने का अभियान शुरू किया।

क्यों कहलाती हैं “बड़ी दीदी”?

बस्तर के लोग उन्हें किसी पद या सम्मान से नहीं, बल्कि प्यार से “बड़ी दीदी” कहकर पुकारते हैं।

यह नाम उन्हें किसी संस्था ने नहीं दिया, बल्कि उन हजारों परिवारों ने दिया जिनके जीवन में उन्होंने आशा की नई किरण जगाई। उनकी सरलता, आत्मीयता और समाज के प्रति समर्पण ने उन्हें लोगों के बीच परिवार के सदस्य जैसा स्थान दिलाया।

बालिका शिक्षा को बनाया आंदोलन

बुधरी ताती का मानना था कि किसी भी समाज का विकास उसकी बेटियों की शिक्षा से शुरू होता है।

उन्होंने ऐसे क्षेत्रों में भी Girls Education को बढ़ावा दिया, जहाँ सामाजिक और भौगोलिक चुनौतियाँ बहुत अधिक थीं। अनेक बालिकाएँ, जो कभी स्कूल नहीं जा पाती थीं, आज शिक्षित होकर अपने पैरों पर खड़ी हैं।

उनके प्रयासों ने शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया।

महिला सशक्तिकरण की मिसाल

शिक्षा के साथ-साथ उन्होंने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया।

सिलाई, कढ़ाई और अन्य कौशल आधारित प्रशिक्षणों के माध्यम से अनेक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला। आज कई महिलाएँ अपने परिवार की आय बढ़ाने में योगदान दे रही हैं।

यही कारण है कि बुधरी ताती को बस्तर में Women Empowerment Icon के रूप में भी देखा जाता है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उम्मीद की रोशनी

जहाँ कई लोग जाने से भी डरते थे, वहाँ बुधरी ताती ने वर्षों तक काम किया।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा और जागरूकता का काम केवल सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि साहस का भी परिचायक था। उन्होंने यह साबित किया कि विकास और विश्वास ही किसी भी क्षेत्र में स्थायी बदलाव ला सकते हैं।

पद्मश्री: सेवा को मिला राष्ट्रीय सम्मान

भारत सरकार द्वारा प्रदान किया गया Padma Shri Award केवल बुधरी ताती के व्यक्तिगत योगदान का सम्मान नहीं है, बल्कि उन सभी जमीनी कार्यकर्ताओं की पहचान भी है जो बिना किसी प्रचार के समाज परिवर्तन में लगे हुए हैं।

यह सम्मान बस्तर, छत्तीसगढ़ और पूरे आदिवासी समाज के लिए गर्व का विषय है

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

आज जब सफलता को अक्सर पद, पैसा और प्रसिद्धि से जोड़ा जाता है, तब बुधरी ताती का जीवन हमें बताता है कि वास्तविक सफलता लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में है।

उन्होंने न कोई आंदोलन चलाया, न मंचों से बड़े भाषण दिए, लेकिन उनके कार्यों ने हजारों लोगों का भविष्य बदल दिया।

Sonal Gupta

Content Writer

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