एक नर्स की कहानी जिन्होंने जनजातीय लोगों के लिए समर्पित किया अपना जीवन!


Shanti Teresa Lakra: कितने ही लोग होते हैं जो अपने जीवन सेवा और समर्पण में बिता देते हैं, ऐसे ही लोगों में शामिल हैं शांति टेरेसा लाकड़ा। साल 2004 में जब अंडमान में सुनामी का कहर बरसा तब शांति ने वहां के कई रिमोट एरिया में कम संसाधनों के बावजूद लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाई। शांति ने लिटिल अंडमान के एक रिमोट एरिया डुगोंग क्रीक में उप-केंद्र में एक नर्स के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं। यह क्षेत्र भारत की सबसे पुरानी जनजातियों में से एक, ओन्गे जनजाति का घर माना जाता है। जिसे नेग्रिटो नस्लीय स्टॉक का हिस्सा कहते हैं। तब इस जनजाती के लोगों की संख्या में 100 से भी कम हुआ करता था। लाकड़ा ने खुद को ओन्गे की स्वास्थ्य सेवा के लिए समर्पित किया। एकदम शुरूआती दिनों की बात करें तो यहां किसी भी प्रकार का बाहरी समर्थन नहीं था। चिकित्सा इतिहास और भाषा की बाधाओं तक पहुंच नहीं होने के कारण, सहायक नर्स ने लगातार यात्रा की, उनसे मेलजोल बढ़ाया और उन्हें केंद्र में चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए मनाया।

मिले हैं कई सम्मान

शांति टेरेसा लाकड़ा को उनके सेवाभाव के लिए फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार (Florence Nightingale Award) और पद्मश्री (Padma Shri) से सम्मानित किया गया है।
एक वेबसाइट को दिए साक्षात्कार में वे सुनामी को याद करती हैं, वे कहती है कि सुनामी ने डुगोंग क्रीक की पूरी बस्तियों को उजाड़ दियआ था। उन्हें जंगल की तरफ हटना पड़ा। कई दिनों तक एक अस्थायी तंबू में रहना पड़ा। लंबे समय तक बाहरी दुनिया या चिकित्सा आपूर्ति की कोई उम्मीद नहीं थी। सूनामी के बाद यहां कई तरह की बीमारियाँ उपजी।

लाकड़ा बताती हैं कि, लगभग नहीं के बराबर सुविधाओं के बीच लोगों को ठीक करना मुश्किल था। दवाओं के लिए काफी भटकना पड़ा। ओन्गे जनजाती की मदद के लिए आपातकालीन दवाएँ लेने के लिए मेसेंजर्स को 12-15 किमी चलने के लिए भेजा जाता था। वे याद करते हुए कहती हैं कि पूरे विनाश के दौरान, एक गर्भवती ओन्गी महिला ने सिर्फ 900 ग्राम वजन के बच्चे को जन्म दिया था। वे कहती हैं कि उन्हें दोनों की जान बचानी थी। उन्हें गर्म रखना था और कंगारू मदर केयर का अभ्यास करवाना था। उनकी टीम ने बहुत कम जलाऊ लकड़ी के साथ कार्य किया। उनकी मेहनत और प्रशासन की मदद से छह महीने के बाद, मां और बच्चा दोनों स्वस्थ होकर वापस आए।

शांति को उनके काम के लिए जाना जाता है। उन्होंने हर तरह के बाधा के बीच सिर्फ अपने काम को आगे रखा। जनजातियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने में वे हमेशा आगे रही हैं। हाल ही में, उन्हें एस्टर गार्डियंस ग्लोबल नर्सिंग अवार्ड 2023 के लिए टॉप 10 फाइनलिस्ट में शामिल किया गया है। वे कहती हैं, “जब तक मैं जीवित हूं, मैं इस काम को जारी रखना चाहती हूं।”

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Dr. Kirti Sisodia

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