छत्तीसगढ़ में सुशासन और लोक कल्याण के नए युग का आगाज़ हो चुका है। राज्य सरकार द्वारा संचालित ‘सेवा की कहानी’ पहल के माध्यम से दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों से लेकर शहरी अंचलों तक समाज के हर वर्ग के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।
सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से जनजातीय परिवारों की समृद्धि, वर्षों से काबिज भूमि पर भू-स्वामित्व के अधिकार, कुपोषण से मुक्ति दिलाती पोषण-पहल और दिव्यांगजनों का आर्थिक-सामाजिक सशक्तिकरण—ये सभी प्रयास छत्तीसगढ़ की बदलती तस्वीर की बानगी पेश कर रहे हैं।
1. स्टॉप डैम से बदली जनजातीय किसानों की तकदीर
वनांचल और पहाड़ी क्षेत्रों में सिंचाई पानी के अभाव से जूझ रहे आदिवासी किसानों के लिए ‘स्टॉप डैम’ (Stop Dams) जीवनदायिनी साबित हो रहे हैं।
- बारहमासी सिंचाई सुविधा: नदियों और नदी-नालों पर निर्मित स्टॉप डैमों से भू-जल स्तर में सुधार आया है और किसानों को खरीफ के साथ-साथ रबी फसलों (जैसे सब्जियां, दलहन और तिलहन) के लिए पर्याप्त पानी मिल रहा है।
- आर्थिक समृद्धि: सिंचाई की सुविधा मिलते ही जनजातीय परिवारों का पलायन रुका है। अब वे अपनी ही जमीनों पर बहुफसलीय खेती कर अपनी वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर रहे हैं।
2. वर्षों से काबिज भूमि पर मिला पट्टा, सुरक्षित हुआ भविष्य
बरसों से अपनी ही जमीन पर अधिकार के इंतजार में बैठे जरूरतमंद और भूमिहीन परिवारों का सपना अब साकार हो रहा है। राज्य सरकार द्वारा विशेष अभियान चलाकर उन्हें भू-स्वामित्व (पट्टा) के पक्के दस्तावेज सौंपे जा रहे हैं।
- अधिकार और सुरक्षा: पट्टा मिलने से परिवारों को न केवल अपनी जमीन पर कानूनी कब्जा मिला है, बल्कि उन्हें बेदखली के डर से हमेशा के लिए मुक्ति मिल गई है।
- शासकीय योजनाओं का लाभ: भूमि अधिकार मिलने के बाद अब ये हितग्राही प्रधानमंत्री आवास योजना, कृषि ऋण, और अन्य सरकारी अनुदानों का लाभ आसानी से उठा पा रहे हैं।
3. ‘कोरिया मोदक’: सेहत की मिठास से संवर रहा मातृत्व
कुपोषण और एनीमिया से मुक्ति दिलाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा शुरू की गई नवाचार पहल ‘कोरिया मोदक’ (Koriya Modak) गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के जीवन में नया सवेरा ला रही है।
- पौष्टिक एवं स्वादिष्ट आहार: स्थानीय स्तर पर महुआ, रागी, गुड़, मूंगफली और तिल जैसे पौष्टिक तत्वों से तैयार किया गया ‘कोरिया मोदक’ गर्भवती महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है।
- रानी की सफलता की कहानी: इस पहल का सीधा लाभ रानी जैसी अनेक महिलाओं को मिला है, जिन्होंने अपनी गर्भावस्था के दौरान नियमित रूप से इसका सेवन किया। इससे न केवल उनका हीमोग्लोबिन स्तर सुधरा, बल्कि उन्होंने एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया और मातृत्व के सफर को सुगम बनाया।
4. सहायक उपकरणों से दिव्यांगजनों को मिला आत्मनिर्भरता का संबल
समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुँचाने की कड़ी में दिव्यांगजनों को निःशुल्क सहायक उपकरण (जैसे ट्राई-साइकिल, व्हीलचेयर, बैसाखी और श्रवण यंत्र) वितरित किए जा रहे हैं।
- स्वावलंबन की ओर कदम: सहायक उपकरण मिलने से दिव्यांगजनों की दूसरों पर निर्भरता समाप्त हो रही है।
- सामाजिक और आर्थिक जुड़ाव: उपकरण प्राप्त करने के बाद कई दिव्यांगजन अब अपनी छोटी दुकानें चला रहे हैं, पढ़ाई पूरी कर रहे हैं या दैनिक कार्यों के लिए आसानी से आवाजाही कर पा रहे हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बढ़ा है।
‘सेवा की कहानी’ केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन में विश्वास, सम्मान और खुशहाली लाने का एक सशक्त माध्यम बन चुकी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की ये जनहितकारी नीतियां ‘समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ़’ के निर्माण को तेजी से साकार कर रही हैं।

