सुशासन में अवसर और सम्मान: साय सरकार ने ‘संशोधित अतिथि व्याख्याता नीति-2026’ को दी मंजूरी; स्थानीय प्रतिभाओं को मिलेगी वरीयता

छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, अकादमिक गुणवत्ता में सुधार लाने और उच्च शिक्षित युवाओं को सम्मानजनक रोजगार अवसर प्रदान करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में ‘संशोधित अतिथि व्याख्याता नीति-2026’ (Revised Guest Lecturer Policy 2026) को कार्योत्तर स्वीकृति (Ex-Post Facto Approval) प्रदान कर दी गई।

पूर्ववर्ती नीतियों में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों और विसंगतियों को दूर करते हुए बनाई गई यह नई नीति प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों और राजकीय विश्वविद्यालयों में कार्यरत तथा नए अतिथि व्याख्याताओं के लिए सुरक्षा, पारदर्शिता और प्रोत्साहन का नया अध्याय शुरू करेगी।

संशोधित नीति-2026 के प्रमुख प्रावधान:

नीतिगत पहलूसंशोधन एवं नए प्रावधान
स्थानीयता प्राथमिकतामेरिट में समान अंक होने पर छत्तीसगढ़ के मूल निवासी अभ्यर्थी को प्राथमिकता
अनुभव का अंक भारराजकीय विश्वविद्यालयों में प्रति सत्र (न्यूनतम 5 माह) अध्यापन पर 5 अंक (अधिकतम 30 अंक)
मानदेय प्रणालीकालखण्ड (पीरियड) के स्थान पर ‘कार्य-दिवस’ (Working Days) आधारित मानदेय
पुनर्नियोजन अवसरविस्थापित अतिथि व्याख्याताओं को रिक्त पदों पर प्राथमिकता व समायोजन
सेवा शर्तें व अवकाशस्पष्ट कार्य-अवधि, कार्य-दायित्व और आकस्मिक अवकाश का स्पष्ट प्रावधान

1. छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को मेरिट में वरीयता

संशोधित नीति की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता स्थानीय युवाओं का हित संरक्षण है। नई व्यवस्था के तहत यदि चयन के दौरान मेरिट सूची में दो अभ्यर्थियों के अंक समान (Tie) होते हैं, तो बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों के स्थान पर छत्तीसगढ़ के मूल निवासी अभ्यर्थी को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे राज्य के स्थानीय नेट/सेट (NET/SET) एवं पीएचडी धारक युवाओं को उच्च शिक्षा क्षेत्र में अपनी सेवाएं देने का पहला अवसर मिलेगा।

2. अनुभव के दायरे का विस्तार: राजकीय विश्वविद्यालयों का अध्यापन भी शामिल

पूर्व नीति में राजकीय विश्वविद्यालयों में अध्यापन अनुभव को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी। संशोधित नीति-2026 में प्रावधान किया गया है कि शासकीय महाविद्यालयों के साथ-साथ राज्य के राजकीय विश्वविद्यालयों में किसी एक शैक्षणिक सत्र के दौरान न्यूनतम 5 महीने का अध्यापन कार्य पूरा करने पर 5 अनुभव अंक दिए जाएंगे। अभ्यर्थियों को अनुभव के आधार पर अधिकतम 30 अंक तक प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

3. विस्थापित अतिथि व्याख्याताओं का पुनर्नियोजन

विगत वर्षों में नियमित भर्तियों, तबादलों या पदों के पुनर्गठन के कारण जो अतिथि व्याख्याता विस्थापित (Displaced) हो गए थे, उन्हें राहत देते हुए राज्य सरकार ने रिक्त पदों पर उनके पुनर्नियोजन का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। उनके पूर्व अनुभवों का सम्मान करते हुए उपलब्ध रिक्तियों पर उन्हें प्राथमिकता के साथ शैक्षणिक अवसर प्रदान किए जाएंगे।

4. कालखण्ड के स्थान पर ‘कार्य-दिवस आधारित’ मानदेय व्यवस्था

अतिथि व्याख्याताओं के मानदेय भुगतान में पारदर्शिता और एकरूपता लाने के लिए पुरानी ‘कालखण्ड’ (पीरियड-वार) प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है। अब ‘कार्य-दिवस आधारित’ (Per Working Day Based) मानदेय प्रणाली लागू होगी। इससे प्रतिदिन शिक्षण और अकादमिक दायित्व निभाने वाले शिक्षकों को वित्तीय स्थिरता मिलेगी और प्रशासनिक विसंगतियां दूर होंगी।

5. स्पष्ट कार्य-अवधि, दायित्व एवं आकस्मिक अवकाश सुविधा

शिक्षकों के आत्मसम्मान और कार्य-संतुलन को ध्यान में रखते हुए संशोधित नीति में अतिथि व्याख्याताओं और अन्य अतिथि शैक्षणिक अमले के लिए:

  • कार्य की समय सीमा और अकादमिक दायित्वों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
  • आकस्मिक अवकाश (Casual Leave) के अधिकार और नियम तय किए गए हैं, जिससे वे तनावमुक्त होकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षण प्रदान कर सकें।

“उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों का सम्मान हमारी प्राथमिकता”: मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि शासकीय महाविद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों को निर्बाध और उच्च गुणवत्ता की शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार का प्राथमिक लक्ष्य है। वर्षों से महाविद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे अतिथि व्याख्याता उच्च शिक्षा की रीढ़ हैं। संशोधित नीति-2026 के माध्यम से उन्हें न केवल प्रक्रियागत सुरक्षा मिली है, बल्कि उनके योगदान को उचित सम्मान भी दिया गया है।

‘संशोधित अतिथि व्याख्याता नीति-2026’ छत्तीसगढ़ में सुशासन और शैक्षणिक सुधारों का एक ठोस उदाहरण है। यह नीति एक ओर जहां स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देती है, वहीं दूसरी ओर कार्य-दिवस आधारित मानदेय और विस्थापितों के पुनर्नियोजन जैसे संवेदनशील प्रावधानों से प्रदेश के उच्च शैक्षणिक माहौल में एक नया विश्वास और सकारात्मकता लेकर आई है।

Sonal Gupta

Content Writer

ALSO READ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Owner/Editor In Chief: Dr.Kirti Sisodia 
Devendra Nagar, Raipur, Chhattisgarh 492001
Mob. – 6232190022

Email – Hello@seepositive.in

GET OUR POSITIVE STORIES