छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और सिंधी समाज के इतिहास से जुड़ा एक ऐतिहासिक और गौरवशाली पल देखने को मिला है। देश की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने रायपुर के लोकभवन स्थित छत्तीसगढ़ मण्डपम में आयोजित एक भव्य समारोह में रायपुर के प्रसिद्ध शदाणी दरबार की पंचम पीठाधीश पूज्य माता साहिब हासी देवी जी की 200वीं जयंती के अवसर पर ₹200 का स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट का आधिकारिक विमोचन किया।
इस गरिमामय आयोजन में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस ऐतिहासिक पहल से देश-विदेश में बसे करोड़ों सिंधी अनुयायियों और श्रद्धालुओं में भारी हर्षोल्लास का माहौल है।
समारोह और सिक्के की मुख्य विशेषताएं: एक नजर में
| आयोजन एवं सिक्के का पहलू | विवरण एवं मुख्य प्रावधान |
| मुख्य अतिथि | महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु |
| विशिष्ट उपस्थिति | राज्यपाल रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय |
| आयोजन स्थल | लोकभवन (छत्तीसगढ़ मण्डपम), रायपुर |
| मुख्य सौगात | पूज्य माता साहिब हासी देवी की स्मृति में ₹200 का स्मारक सिक्का एवं डाक टिकट |
| सिक्के का स्वरूप | एक ओर माता हासी देवी की छवि, दूसरी ओर अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष और ₹200 मूल्यवर्ग अंकित |
कौन थीं पूज्य माता साहिब हासी देवी?
सिंधी समाज की महान संत और आध्यात्मिक विभूति माता साहिब हासी देवी का जन्म वर्ष 1826 में सिंध प्रांत के खानपुर महर में हुआ था।
- प्रथम महिला पीठाधीश्वर: मात्र 26 वर्ष की अल्प आयु में सन 1852 में उन्होंने शदाणी दरबार की बागडोर संभाली और वे इसकी प्रथम महिला पीठाधीश्वर (पंचम पीठाधीश) बनीं।
- मानव सेवा और शिक्षा को समर्पण: उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन दीन-दुखियों की सेवा, भजन-कीर्तन, और समाज में नैतिक संस्कारों के प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। उनके दार्शनिक विचारों और शिक्षाओं ने पीढ़ियों का मार्गदर्शन किया है।
सिक्के पर उकेरी गई हैं माता हासी देवी की प्रेरणादायक छवियां
भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी इस विशेष स्मारक सिक्के और डाक टिकट के माध्यम से माता हासी देवी के महान जीवन दर्शन को अमिट बनाया गया है:
- सिक्के के एक ओर पूज्य माता हासी देवी जी की दिव्य छवि तथा दूसरी ओर राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष और ₹200 का मूल्यवर्ग अंकित किया गया है।
- इसके साथ ही इस सिक्के के जरिए उनके आध्यात्मिक योगदान और विचारों को भावी पीढ़ियों तक सहेजने का ऐतिहासिक प्रयास किया गया है।
“छत्तीसगढ़ के इतिहास में गर्व का स्वर्णिम अध्याय”: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि छत्तीसगढ़ के 26 वर्षों के इतिहास में यह एक अत्यंत दुर्लभ और गौरवपूर्ण अवसर है जब किसी महान संत के सम्मान में इस प्रकार का राष्ट्रीय स्मारक सिक्का जारी किया गया है। शदाणी दरबार के पीठाधीश संत डॉ. युधिष्ठिर लाल जी ने इस पहल के लिए केंद्र और राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया।
रायपुर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के कर-कमलों द्वारा माता हासी देवी की स्मृति में जारी यह ₹200 का सिक्का न केवल सिंधी समाज के लिए बल्कि पूरे देश के लिए आध्यात्मिक एकता और सांस्कृतिक सम्मान का प्रतीक है। यह आयोजन ‘विकसित छत्तीसगढ़’ की सांस्कृतिक समृद्धि को राष्ट्रीय क्षितिज पर और अधिक मजबूती प्रदान करता है।

