छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जनजातीय समाज के महान जननायक, शिक्षाविद् और प्रखर स्वतंत्रता सेनानी बाबा कार्तिक उरांव की जन्मशती के अवसर पर एक भव्य और गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए बाबा कार्तिक उरांव की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया।
यह आयोजन न केवल महान स्वतंत्रता सेनानी के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का माध्यम बना, बल्कि उनके जीवन आदर्शों और जनजातीय उत्थान के सपनों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक बड़ा मंच भी साबित हुआ।
बाबा कार्तिक उरांव जन्मशती समारोह: मुख्य बिंदु
| कार्यक्रम का पहलू | विवरण एवं मुख्य प्रावधान |
| प्रमुख आयोजन | बाबा कार्तिक उरांव की जन्मशती पर आदमकद प्रतिमा का अनावरण |
| मुख्य अतिथि | मुख्यमंत्री विष्णु देव साय |
| आयोजन स्थल | रायपुर, छत्तीसगढ़ |
| मुख्य उद्देश्य | महान आदिवासी जननायक के बलिदान, शिक्षा और समाज सुधार के कार्यों को चिरस्थायी बनाना |
| संदेश | जनजातीय अधिकारों, आरक्षण सुरक्षा और सामाजिक एकता को मजबूत करना |
कौन थे बाबा कार्तिक उरांव और उनका ऐतिहासिक योगदान?
बाबा कार्तिक उरांव का जीवन भारत के जनजातीय समाज और विशेषकर आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित रहा है।
- उच्च शिक्षा और तकनीकी दक्षता: उन्होंने ब्रिटेन में रहकर इंजीनियरिंग की उच्च शिक्षा प्राप्त की थी और हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (HEC) रांची में इंजीनियर के रूप में अपनी सेवाएं दीं, लेकिन देश सेवा के लिए उन्होंने अपना जीवन राजनीति और समाज सुधार को समर्पित कर दिया।
- संवैधानिक अधिकारों के प्रखर रक्षक: उन्होंने संसद में आदिवासियों के अधिकारों और उनके धर्मांतरण तथा पहचान की रक्षा के लिए मुखर होकर आवाज उठाई। उनका पूरा जीवन समाज में शिक्षा का प्रसार करने और आदिवासियों को संगठित करने में बीता।
प्रतिमा अनावरण के दौरान मुख्यमंत्री साय का प्रेरणादायक संबोधन
इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव आधुनिक भारत के निर्माण और जनजातीय समाजों के सशक्तिकरण के महान स्तंभ थे।
- मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव का यह मानना था कि शिक्षा ही विकास का एकमात्र ऐसा मार्ग है जो समाज को गरीबी और पिछड़ेपन से बाहर निकाल सकता है।
- राज्य सरकार उनके आदर्शों पर चलते हुए बस्तर से लेकर सरगुजा तक जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार कर रही है।
‘विकसित छत्तीसगढ़’ में जनजातीय नायकों का सम्मान
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में महापुरुषों और जनजातीय नायकों की स्मृतियों को सहेजने के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं।
- रायपुर में स्थापित यह आदमकद प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा और समाज उत्थान के लिए प्रेरित करती रहेगी।
- यह पहल ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के निर्माण में सांस्कृतिक स्वाभिमान और जनजातीय गौरव को सर्वोच्च स्थान देने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
राजधानी रायपुर में बाबा कार्तिक उरांव की जन्मशती पर उनकी आदमकद प्रतिमा का अनावरण छत्तीसगढ़ के इतिहास में एक गौरवशाली अध्याय है। यह आयोजन उनके विचारों को अमर रखने और समाज को एकजुट करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

