हार्ट अटैक और शुगर के इलाज में होता है इस्तेमाल, रोचक है इसका 300 साल पुराना इतिहास!


हममें से ज्यादातर लोगों ने कैक्टस का पौधा देखा होगा। इसे हिंदी में नागफनी कहते हैं। रेतीले जगहों पर उगने वाले इस पौधे की कई खासियत है। जितना अच्छा इसे औषधि के रूप में माना जाता है उतना ही पुराना इसका इतिहास है।

ये बात है 17वीं सदी की, जब अंग्रेज भारत में अपना वर्चस्व कायम करने में लगे थे। तब 1736 में रतलाम से 22 किमी दूर राजा जय सिंह ने सैलाना राज्य को बसाया। 1961 में सैलाना के 13वें राजा के रूप में दिग्विजय सिंह ने सत्ता संभाली, ऐसा कहा जाता है कि उन्हें कांटे बेहद पसंद थे। यही वजह है कि उन्होंने अपने राजमहल में अनूठा कैक्टस गार्डन बनवाया। उन्होंने दुनिया भर से नागफनी के पौधे मंगवाए।


विदेश से आए पौधे भारत की जमीन पर भी जिंदा रहें, इसके लिए हर कैक्टस के साथ उस देश की मिट्टी भी लाई गई ताकि पौधों की देखभाल ठीक से हो सके। आज ये कैक्टस गार्डन पर्यटन स्थल है। देशभर से लोग कैक्टस गार्डन को देखने आते है। भारत में पंचकूला में भी एशिया का सबसे बड़ा कैक्टस गार्डन तैयार किया गया है। 7 एकड़ में फैले इस गार्डन में दुनियाभर के दुर्लभ प्रजातियों वाले कैक्टस को सहेजकर रखा गया है।

कैक्टस का इतिहास

कांटों भरे इन पौधों का इतिहास करोड़ों साल का है। अमेरिका के यूटा में कैक्टस के 5 करोड़ साल पुराने जीवाश्म मिले हैं। संस्कृत में इसका नाम वज्रकंटका रखा गया है, क्योंकि इसके कांटें मजबूत होते हैं। पुराने समय में इन कांटों से ही बच्चों के कान छेदे जाते थे। पुराने लोगों का मानना है कि कैक्टस के कांटों से छेदने पर कान पकते नहीं हैं।

ये तो हो गई कैक्टस के इतिहास की बात लेकिन अब आते हैं इसके हेल्थ से जुड़े फायदों पर। दरअसल जानकारों का मानना है कि कैक्टस जितना गार्डन को सजाने के काम आता है उतना ही आयुर्वेदिक रूप से भी इसका महत्व है। चिकित्सा विज्ञान ने इस बात की प्रूव भी किया है।

जड़ से आयुर्वेदिक दवाएं बनाई जाती है। कैक्टस की कई ऐसी प्रजातियां हैं, जिनके फल, फूल और गूदे को खाया जा सकता है। इससे सब्जी, शरबत और सलाद भी बनाया जाता है।

कैक्टस के फूल से भागते हैं बुखार

आयुर्वेद के जानकारों के मुताबिक लाल-पीले नागफनी के फूलों को उबालकर खाने से बुखार उतरता है। पुरुषों की प्रोस्टेट ग्लैंड बढ़ जाए तो वैद्य दूसरी दवाओं के साथ इन फूलों के पाउडर यानी चूर्ण इस्तेमाल की सलाह भी देते हैं।

ड्रैगन फ्रूट कैक्टस फैमिली का

ड्रैगन फ्रूट आजकल काफी ट्रेंड में है और हर तरफ इसके फायदे बताए जाते हैं। ड्रैगन फ्रूट भी कैक्टस की एक वैरायटी ‘हिलोसेरियस’ का ही फल है। इसी तरह, प्रिकली पियर कैक्टस, पेरूवियन एपल, क्वीन ऑफ द नाइट, बैरल कैक्टस, मून और बिहाइव कैक्टस जैसी कैक्टस की कई प्रजातियों को खाया जाता है।

नागफनी के फायदे

नागफनी के फल में एंटीऑक्सिडेंट्स, आयरन, बीटा कैरोटीन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, पोटैशियम और कई तरह के विटामिंस पाए जाते हैं।


नागफनी खून बढ़ाने, हार्ट अटैक और शुगर से बचाने का भी काम करता है।


हैंगओवर उतारने, बीमारियों से बचाने में भी ये असरदार होता है।


पाइल्स, खून की कमी, मोटापे जैसी कई समस्याओं में ये फल बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसके जूस में 1 चम्मच शहद मिलाकर पीने से सर्दी, जुकाम और खांसी में राहत मिलती है। ल्यूकोरिया और गोनोरिया जैसी बीमारियों में इसका इस्तेमाल होता है।  


कैक्टस में मिलने वाले पोषक तत्व शरीर में खून बनने की प्रक्रिया तेज करते हैं और बैक्टीरिया से बचाने का काम करते हैं।


इसे पीलिया और एनीमिया जैसी बीमारियों में फायदेमंद माना जाता है।


नागफनी डाइजेशन सिस्टम को सुधारती है और आंतों को मजबूत बनाने का काम करता है। इसे खाने से कब्ज और अल्सर में राहत मिलती है।

फाइबर से भरपूर कैक्टस के पत्ते को सलाद के तौर पर खाने से वजन घटाता है।

इसमें मौजूद पोषक तत्व ब्लडप्रेशर, ब्लडशुगर और कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल किया जाता है।
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Dr. Kirti Sisodia

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