छत्तीसगढ़ के समृद्ध सांस्कृतिक वैभव, प्राकृतिक सौंदर्य और ग्रामीण जीवन शैली को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक पहल की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा और पर्यटन मंत्री के मार्गदर्शन में पर्यटन विभाग द्वारा ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ (Chendru State Rural Tourism Award) शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
इस राज्य स्तरीय पुरस्कार का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचलों में होमस्टे (Homestays), कृषि पर्यटन (Agro-Tourism), साहसिक गतिविधियों, स्थानीय संस्कृति और हस्तशिल्प के संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों, स्व-सहायता समूहों (SHGs) एवं संस्थाओं को प्रोत्साहित करना है।
चयनित प्रतिभागी अथवा संस्था को राज्य स्तर पर 1 लाख रुपये की नकद राशि, ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
पुरस्कार एवं योजना का संक्षिप्त विवरण
| योजना घटक | विवरण एवं मुख्य प्रावधान |
| पुरस्कार का नाम | ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ (Chendru State Rural Tourism Award) |
| पुरस्कार राशि | ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) नकद, ट्रॉफी एवं प्रशस्ति पत्र |
| विभाग | छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल (Tourism Department, Chhattisgarh) |
| लक्षित क्षेत्र | ग्रामीण होमस्टे, एग्रो-टूरिज्म, हस्तकला, जैविक भोजन एवं संस्कृति संरक्षण |
| नामकरण का आधार | बस्तर के सुप्रसिद्ध ‘टाइगर बॉय’ चेन्दरू मंडावी (Chendru Mandavi) की स्मृति |
‘टाइगर बॉय’ को समर्पित ऐतिहासिक पहल
इस पुरस्कार का नामकरण बस्तर के सुप्रसिद्ध बालक चेन्दरू मंडावी (Chendru Mandavi) के नाम पर किया गया है, जिन्हें दुनिया भर में ‘टाइगर बॉय’ (Tiger Boy) के नाम से जाना जाता था।
1950 के दशक में स्वीडिश फिल्म निर्देशक अर्न सोक्सडोर्फ की ऑस्कर विजेता डॉक्यूमेंट्री और हॉलीवुड फिल्म के माध्यम से बस्तर और चेन्दरू की अनोखी मित्रता ने वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई थी।
राज्य सरकार द्वारा चेन्दरू के नाम पर पुरस्कार स्थापित करने से न केवल बस्तर के गौरवशाली इतिहास को सम्मान मिला है, बल्कि ग्रामीण युवाओं में पर्यटन क्षेत्र के प्रति नया उत्साह भी पैदा हुआ है।
पुरस्कार हेतु पात्रता और चयन के मुख्य क्षेत्र
पर्यटन विभाग द्वारा तय किए गए मापदंडों के अनुसार, ‘चेन्दरू पुरस्कार’ के लिए निम्नलिखित क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले नागरिक व समूह आवेदन कर सकेंगे:
- ग्रामीण होमस्टे (Rural Homestays): ऐसे स्थानीय परिवार जो पर्यटकों को प्रामाणिक ग्रामीण परिवेश, पारंपरिक भोजन और आतिथ्य प्रदान कर रहे हैं।
- एग्रो-टूरिज्म व इको-टूरिज्म (Agro & Eco-Tourism): खेतों, बागानों और वनांचल क्षेत्रों में पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन गतिविधियां संचालित करने वाले उद्यमी।
- संस्कृति एवं कला संरक्षण: बस्तर, सरगुजा और मैदानी अंचलों के पारंपरिक लोक संगीत, नृत्य, हस्तशिल्प (जैसे ढोकरा आर्ट, टेराकोटा, काष्ठ कला) को बढ़ावा देने वाले समूह।
- स्थानीय रोजगार सृजन: ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से स्थानीय महिलाओं और युवाओं को स्थायी रोजगार से जोड़ने वाली संस्थाएं।
“गांवों की समृद्धि और रोजगार का माध्यम बनेगा पर्यटन”: राज्य सरकार
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गांवों में असीम प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध लोक संस्कृति विद्यमान है। ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ के माध्यम से राज्य के दूरस्थ वनांचल गांवों तक पर्यटकों की पहुंच बढ़ेगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस पुरस्कार के लिए पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिसमें राज्य स्तरीय विशेषज्ञ समिति आवेदनों का मूल्यांकन और मैदानी निरीक्षण कर विजेताओं का चयन करेगी।
‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ की शुरुआत छत्तीसगढ़ के पर्यटन इतिहास में एक मील का पत्थर है। ₹1 लाख की सम्मान राशि और राज्य स्तरीय पहचान से प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में होमस्टे और एग्रो-टूरिज्म को अभूतपूर्व प्रोत्साहन मिलेगा, जो ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के विजन को धरातल पर साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

