छत्तीसगढ़ का अबूझमाड़ (Abujhmad) लंबे समय तक देश के सबसे दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में गिना जाता रहा है। नक्सल्वाद के चलते यहां वर्षों तक शिक्षा अवसंरचना (education infrastructure), स्कूल तक पहुंच (school access) और बुनियादी सुविधाएं (basic facilities) सीमित रहीं। लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं।नारायणपुर जिला प्रशासन द्वारा शुरू किया गया “स्कूल केंता अभियान (School Keinta Abhiyan)” आज एक बड़े ग्रामीण भारत में शिक्षा सुधार मॉडल (education reform model in rural India) के रूप में सामने आ रहा है। स्थानीय गोंडी बोली में “केंता (Keinta)” का अर्थ है – “स्कूल तुम्हें बुला रहा है (School is calling you)”।
22,364 घरों का सर्वे (Door-to-Door Survey): शिक्षा अंतर (Education Gap) की असली तस्वीर सामने आई
इस अभियान के तहत प्रशासन ने घर-घर सर्वे (door-to-door survey) करते हुए कुल 22,364 घरों का डेटा तैयार किया।
इस सर्वे में सामने आया कि:
- 2,965 बच्चे (children) स्कूल से बाहर (out-of-school children) थे
- इनमें से
- 1,360 बच्चे (children) ने कभी स्कूल में प्रवेश (admission) ही नहीं लिया था
- 1,605 बच्चे (children) बीच में पढ़ाई छोड़ चुके थे (school dropouts)
ये आंकड़े बताते हैं कि अबूझमाड़ में समस्या सिर्फ स्कूलों की कमी नहीं थी, बल्कि पहुंच (access), जागरूकता (awareness) और शिक्षा की निरंतरता (continuity of education) भी बड़ी चुनौती थी।
बंद स्कूल फिर खुले (Reopened Schools), नए स्कूल ढांचे (School Infrastructure) की शुरुआत
सर्वे के बाद प्रशासन ने जमीनी स्तर (ground level) पर तेजी से काम शुरू किया:
- 10 बंद पड़े स्कूल (schools) फिर से शुरू किए गए
- 24 नए प्राथमिक विद्यालय (primary schools) दूरस्थ गांवों (remote villages) में खोले गए
इन प्रयासों का सीधा असर यह हुआ कि:
- 800+ बच्चे (children) फिर से शिक्षा व्यवस्था (education system) से जुड़े
- इनमें से लगभग 500 बच्चे (children) पहली बार स्कूल पहुंचे
यह बदलाव ग्रामीण भारत में “अंतिम छोर तक शिक्षा पहुंच (last mile education delivery)” का मजबूत उदाहरण बन रहा है।
शिक्षा नवाचार (Education Innovation): स्थानीय संस्कृति + आधुनिक कौशल (Modern Skills) के साथ सीखना
स्कूल केंता अभियान केवल नामांकन (enrollment) तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक समग्र शिक्षा मॉडल (holistic learning model) बनाया गया है।
गर्मी की छुट्टियों (summer camps) में आयोजित विशेष शिविरों (special camps) में बच्चों को:
- स्थानीय कला (local art) और लोक संस्कृति (folk culture)
- कहानी सुनाना (storytelling) और पारंपरिक ज्ञान (traditional knowledge)
- बुनियादी विज्ञान प्रयोग (basic science experiments)
- आधुनिक कौशल (modern skills) जैसे ड्रोन संचालन प्रशिक्षण (drone operation training – basic exposure)
से जोड़ा जा रहा है।
यह मॉडल आज के समय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020 – National Education Policy) के दृष्टिकोण (vision) के अनुरूप माना जा रहा है, जिसमें अनुभव आधारित शिक्षा (experiential learning) पर जोर दिया गया है।
आंगनवाड़ी केंद्र (Anganwadi Centers) और “शिक्षादूत (Shiksha Doot)” मॉडल
प्रारंभिक बाल शिक्षा (early childhood education) को मजबूत करने के लिए:
- 49 नए आंगनवाड़ी केंद्र (Anganwadi centers) शुरू किए गए
साथ ही एक नवाचार (innovation) के तहत:
- स्थानीय युवाओं (local youth) को “शिक्षादूत (Shiksha Doot – Education Ambassadors)” बनाया गया
ये शिक्षादूत (Shiksha Doot):
- माता-पिता (parents) को शिक्षा के प्रति जागरूक करते हैं (education awareness)
- बच्चों को स्कूल से जोड़ते हैं (school enrollment support)
- स्कूल छोड़ने की समस्या (dropout prevention) में मदद करते हैं
स्थानीय भाषा (local language) और जनजातीय जुड़ाव (tribal connect) के कारण यह मॉडल काफी प्रभावी (effective) साबित हो रहा है।
चुनौतियां (Challenges) अभी भी बाकी हैं
हालांकि प्रगति (progress) प्रभावशाली है, लेकिन अबूझमाड़ जैसे दूरस्थ जनजातीय क्षेत्र (remote tribal region) में चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं:
- मानसून (monsoon) में संपर्क और परिवहन समस्या (connectivity issues)
- दूरस्थ स्कूलों में शिक्षक उपलब्धता (teacher availability)
- नियमित उपस्थिति (regular attendance) सुनिश्चित करना
- कठिन भौगोलिक क्षेत्र (difficult terrain) और परिवहन बाधाएं (transport barriers)
इसलिए दीर्घकालिक स्थिरता (long-term sustainability) के लिए निरंतर निगरानी (continuous monitoring) जरूरी है।
निष्कर्ष (Conclusion): ग्रामीण शिक्षा परिवर्तन (Rural Education Transformation) का एक मॉडल
स्कूल केंता अभियान (School Keinta Abhiyan) यह साबित करता है कि यदि मजबूत प्रशासन (strong governance), सामुदायिक भागीदारी (community participation) और स्थानीय रणनीति (local strategy) साथ आए, तो सबसे कठिन क्षेत्रों में भी शिक्षा परिवर्तन (education transformation) संभव है।
- 22,000+ घरों (households) का सर्वे
- 2,965 स्कूल से बाहर बच्चों (out-of-school children) की पहचान
- 30+ स्कूलों (schools) का पुनः संचालन/स्थापना
- 800+ बच्चों (children) का पुनः नामांकन (re-enrollment)
ये सिर्फ आंकड़े (numbers) नहीं हैं, बल्कि अबूझमाड़ शिक्षा क्रांति (Abujhmad education revolution) की शुरुआत हैं।
आज यह अभियान भारत में ग्रामीण शिक्षा विकास (rural education development), जनजातीय शिक्षा उत्थान (tribal education upliftment) और स्कूल ड्रॉपआउट रिकवरी मॉडल (school dropout recovery model) के रूप में देखा जा रहा है।

