Mor Gaon Mor Pani 2.0: बलरामपुर में वर्षा की हर बूंद बन रही जल सुरक्षा की नई ताकत, 40 लाख लीटर से अधिक Rainwater Recharge

Balrampur Water Conservation Model: कंटूर ट्रेंच के जरिए बदल रही जल संरक्षण की तस्वीर: Balrampur, Chhattisgarh: जल संकट आज देश के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। ऐसे समय में छत्तीसगढ़ का बलरामपुर जिला ‘Mor Gaon Mor Pani 2.0’ अभियान के माध्यम से Water Conservation और Groundwater Recharge का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभर रहा है। छत्तीसगढ़ शासन की जल संरक्षण संबंधी प्राथमिकताओं को धरातल पर उतारते हुए जिले में वैज्ञानिक पद्धति से Contour Trench निर्माण का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, जिससे वर्षा की हर बूंद को सहेजकर भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।

वैज्ञानिक तकनीक से हो रहा Rainwater Harvesting

शंकरगढ़, कुसमी, राजपुर और रामचंद्रपुर विकासखंड के पहाड़ी एवं ढलान वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर कंटूर ट्रेंच बनाए जा रहे हैं। इन संरचनाओं का उद्देश्य वर्षा जल को बहकर नष्ट होने से रोकना और उसे भूमि के भीतर समाहित करना है।

यह तकनीक न केवल Rainwater Harvesting को बढ़ावा देती है, बल्कि भू-जल स्तर में सुधार, मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण और भूमि की उर्वरता को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

2,500 कंटूर ट्रेंच से 40 लाख लीटर से अधिक वर्षा जल का संचयन

अभियान के तहत अब तक जिले में 2,500 कंटूर ट्रेंच का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इनके माध्यम से लगभग 40.08 लाख लीटर वर्षा जल का संचयन और भू-गर्भ में अवशोषण सुनिश्चित हुआ है।

इसका सकारात्मक प्रभाव आसपास के क्षेत्रों के कुओं, बोरवेल और अन्य पारंपरिक जल स्रोतों पर भी देखने को मिलेगा। आने वाले समय में इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है।

Ridge to Valley Watershed Model से मिल रही दीर्घकालिक सफलता

बलरामपुर जिले में Ridge to Valley Watershed Management की अवधारणा पर कार्य किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 10 विभिन्न कार्यों के जरिए कुल 5,124 कंटूर ट्रेंच बनाए जा रहे हैं।

इस मॉडल में पहाड़ी क्षेत्रों से तेज़ी से बहने वाले वर्षा जल को छोटे-छोटे ट्रेंचों में रोककर धीरे-धीरे जमीन के भीतर पहुंचाया जाता है। इससे कई महत्वपूर्ण लाभ मिल रहे हैं—

  • भू-जल स्तर में लगातार सुधार
  • मिट्टी के कटाव पर प्रभावी नियंत्रण
  • खेतों में लंबे समय तक नमी का संरक्षण
  • फसलों के लिए प्राकृतिक सिंचाई की सुविधा
  • वर्षा जल का अधिकतम उपयोग

Climate Change से मुकाबले में भी अहम पहल

बढ़ते Climate Change के दौर में जल संरक्षण केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण विकास से भी जुड़ा हुआ है। ‘मोर गांव मोर पानी 2.0’ अभियान इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।

भू-जल स्तर बढ़ने से गर्मी के मौसम में जल संकट कम होगा, किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा और गांवों के पारंपरिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन संभव होगा। साथ ही हरित आवरण में वृद्धि, कृषि उत्पादन में सुधार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की भी उम्मीद है।

जनभागीदारी से बन रहा जल सुरक्षा का नया मॉडल

‘मोर गांव मोर पानी 2.0’ केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी पर आधारित एक व्यापक Water Conservation Campaign है। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, जल सुरक्षा और सतत विकास की दिशा में यह अभियान भविष्य के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभर रहा है।

यदि इसी प्रकार वर्षा जल संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन पर लगातार कार्य होता रहा, तो बलरामपुर आने वाले वर्षों में देश के अग्रणी Water Conservation Models में अपनी पहचान स्थापित कर सकता है।

Sonal Gupta

Content Writer

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