Didi E-Rickshaw Yojana:
अब ई-रिक्शा से भर रही हैं सफलता की उड़ान
Didi E-Rickshaw Yojana: छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं ने प्रदेश की महिलाओं को न केवल आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि उनके जीवन में स्वावलंबन का एक नया अध्याय भी लिखा है। धमतरी जिले के ग्राम तेन्दूकोन्हा की रहने वाली श्रीमती सुषमा सतनामी इसका एक जीवंत उदाहरण हैं। कभी निर्माण कार्यों में मजदूरी (रेजा) करने वाली सुषमा आज धमतरी की सड़कों पर गर्व के साथ ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार की आर्थिक गाड़ी को नई रफ्तार दे रही हैं।
मजदूरी के संघर्ष से स्वरोजगार की राह
सुषमा सतनामी और उनके पति श्री मनोज सतनामी दोनों ही श्रम कार्यों से जुड़े थे। पति राजमिस्त्री का काम करते थे और सुषमा एक निर्माणी श्रमिक (रेजा) के रूप में कार्य करती थीं। दो बच्चों (जो वर्तमान में 7वीं और 5वीं कक्षा में हैं) की परवरिश और पढ़ाई की चिंता उनके लिए एक बड़ी चुनौती थी। दैनिक मजदूरी से होने वाली आय इतनी सीमित थी कि भविष्य के लिए कोई जमा पूंजी जुटा पाना नामुमकिन था।
सुषमा बताती हैं, “बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्चों के लिए हमेशा संघर्ष करना पड़ता था। हम चाहते थे कि हमारे बच्चे पढ़-लिखकर कुछ बनें, लेकिन मजदूरी की आय में यह मुश्किल लग रहा था।”
योजना ने दिखाई रोशनी
सुषमा का भाग्य तब बदला जब उन्हें छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल द्वारा संचालित ”दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना” के बारे में पता चला। श्रम विभाग के कार्यालय से जानकारी मिलने के बाद उन्होंने आवश्यक दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन किया।
चूंकि सुषमा मंडल में पिछले 3 वर्षों से पंजीकृत थीं और उनकी आयु पात्रता मानदंडों (18 से 50 वर्ष) के भीतर थी, इसलिए विभाग ने उनके आवेदन का सूक्ष्म परीक्षण किया। दस्तावेज़ सही पाए जाने पर शासन की ओर से सीधे उनके बैंक खाते में 1 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई।
आत्मनिर्भरता का नया सफर
700 रुपये तक की दैनिक आय
सहायता राशि प्राप्त होने के बाद सुषमा ने अपना ई-रिक्शा खरीदा। आज वह धमतरी शहर में ई-रिक्शा चलाती हैं। इस स्वरोजगार ने उनके जीवन में व्यापक बदलाव किया है,
- स्थिर आय- अब सुषमा प्रतिदिन 500 से 700 रुपये तक कमा लेती हैं।
- बेहतर परवरिश- अब वे अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च बिना किसी मानसिक तनाव के उठा पा रही हैं।
- सम्मानजनक जीवन- एक श्रमिक से ‘ई-रिक्शा चालक’ बनने तक का सफर उन्हें समाज में एक नई पहचान और आत्मविश्वास दे रहा है।
योजना की पात्रता और लाभ की प्रक्रिया
छत्तीसगढ़ शासन की इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिला निर्माणी श्रमिकों को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना है। इसकी मुख्य शर्तें और लाभ निम्नलिखित हैं,
- पंजीकरण- महिला श्रमिक का कर्मकार कल्याण मंडल में कम से कम 03 वर्ष पुराना पंजीकरण होना अनिवार्य है।
- आयु सीमा- आवेदक महिला की आयु 18 वर्ष से कम और 50 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- वित्तीय सहायता- ई-रिक्शा खरीदने के लिए शासन द्वारा 1 लाख रुपये की भारी सब्सिडी/सहायता प्रदान की जाती है।
- पारदर्शिता- आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है और राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते (DBT) में हस्तांतरित की जाती है।
मुख्यमंत्री और श्रम विभाग का आभार
सुषमा सतनामी ने अपनी इस सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री और श्रम मंत्री को दिया है। उनका कहना है कि इस योजना ने उन्हें मजदूरी के दलदल से बाहर निकालकर एक ‘बिजनेस वुमन’ की तरह जीने का अवसर दिया है। सुषमा की यह कहानी छत्तीसगढ़ की हर उस महिला के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को सच करना चाहती है।
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