छत्तीसगढ़ अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने वनों, जलप्रपातों और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के लिए देश-विदेश में पहचाना जाता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यटन को केवल भ्रमण स्थल तक सीमित न रखकर इसे स्थानीय समुदायों की आर्थिक प्रगति, आजीविका और स्वावलंबन का एक मजबूत माध्यम बना रही है।
राज्य में ईको-टूरिज्म और सामुदायिक पर्यटन (Community-based Tourism) को प्राथमिकता देते हुए 240 प्राकृतिक पर्यटन केंद्रों का कायाकल्प किया गया है।
इससे न केवल पर्यटकों का अनुभव बेहतर हुआ है, बल्कि स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी निर्मित हुए हैं।
छत्तीसगढ़ पर्यटन विकास के प्रमुख आंकड़े
राज्य सरकार द्वारा पर्यटन क्षेत्र में शुरू की गई सामुदायिक विकास रणनीतियों के परिणामस्वरूप उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल हुई हैं:
| प्रमुख बिंदु | आंकड़े व विवरण |
| विकसित प्राकृतिक पर्यटन केंद्र | 240 केंद्र राज्य भर में संवारे गए |
| स्वावलंबी पर्यटन केंद्र | 50+ केंद्र स्वयं सहायता समूहों व समितियों द्वारा प्रबंधित व आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर |
| सकल राजस्व (Gross Income) | ₹2.21 करोड़ की आय स्थानीय समितियों एवं पर्यटन गतिविधियों से अर्जित |
| नया सफारी मार्ग (कवर्धा) | 35 किमी नया प्राकृतिक सफारी मार्ग विकसित |
प्रमुख पर्यटन मॉडल: धुड़मारास और शिशुपाल इको ट्रेल
राज्य के सुदूर ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में ईको-टूरिज्म के जरिए स्थानीय युवाओं को सीधे आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है:
1. धुड़मारास (बस्तर) – ग्रामीण एवं साहसिक पर्यटन का अनूठा उदाहरण
बस्तर के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के समीप स्थित धुड़मारास गांव आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईको-टूरिज्म मॉडल के रूप में उभर चुका है।
- रोजगार सृजन: धुड़मारास में पर्यटन गतिविधियों के संचालन से स्थानीय ग्रामीणों को 40 प्रत्यक्ष तथा 20 अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुए हैं।
- पर्यटन गतिविधियां: यहां कयाकिंग, बांस की नाव (बैंबू राफ्टिंग), होम-स्टे और स्थानीय बस्तरिया व्यंजनों का आनंद पर्यटकों को लुभा रहा है।
2. शिशुपाल पर्वत इको ट्रेल (महासमुंद)
महासमुंद जिले में स्थित ऐतिहासिक और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर शिशुपाल पर्वत पर ट्रेकिंग और प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष सुविधाएं विकसित की गई हैं।
- आजीविका सृजन: इको ट्रेल पहल के माध्यम से 832 मानव-दिवस की आजीविका का सृजन स्थानीय निवासियों के लिए किया गया है।
3. कवर्धा में 35 किमी नया सफारी मार्ग
कबीरधाम (कवर्धा) क्षेत्र में वन्यजीव और प्रकृति पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 35 किलोमीटर का नया सफारी मार्ग तैयार किया गया है, जिससे क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
स्थानीय समुदाय बना पर्यटन का मुख्य संचालक
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पर्यटन स्थलों का प्रबंधन स्थानीय विकास समितियों, स्व-सहायता समूहों और वन प्रबंधन समितियों के हाथों में सौंपा गया है।
- 50 से अधिक केंद्र बने स्वावलंबी: स्थानीय स्तर पर टिकट बिक्री, गाइड सेवाएं, कैंटीन, हस्तशिल्प बिक्री और वाहन व्यवस्था से होने वाली आय सीधे स्थानीय समितियों को मिलती है, जिससे 50 से अधिक केंद्र पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो चुके हैं।
- स्थानीय संस्कृति का संरक्षण: पर्यटक अब छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, खान-पान, लोक कला और परंपराओं को करीब से समझ पा रहे हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ ‘पर्यटन से समृद्धि’ के मंत्र को साकार कर रहा है। प्राकृतिक सौंदर्य का संरक्षण करते हुए स्थानीय युवाओं और महिलाओं को रोजगार देकर स्वावलंबी बनाने की यह नीति छत्तीसगढ़ को देश के पर्यटन मानचित्र पर एक मजबूत और अनुकरणीय पहचान दिला रही है।

