सरकारी योजनाएं तब सबसे अधिक प्रभावी साबित होती हैं, जब वे लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लेकर आएं। मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के विकासखंड मोहला के ग्राम रामगढ़ की रहने वाली श्रीमती केजू बाई सलामे इसकी एक प्रेरक मिसाल हैं। शासन की योजनाओं का लाभ और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में भी लगातार आगे बढ़ रही हैं।
स्व-सहायता समूह से मिली नई सोच
केजू बाई बिहान के रोशनी स्व-सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बचत और आर्थिक प्रबंधन की बेहतर समझ विकसित की। इसी दौरान उनमें स्वरोजगार शुरू करने का आत्मविश्वास भी बढ़ा और उन्होंने अपने गांव में किराना दुकान शुरू की।
आज यही दुकान उनके परिवार की आय का प्रमुख स्रोत बन चुकी है।
व्यवसाय बढ़ाने में मिल रही है नियमित मदद
केजू बाई बताती हैं कि उन्हें महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने एक हजार रुपये की सहायता राशि मिलती है। उनके अनुसार यह राशि केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि उनके छोटे व्यवसाय को आगे बढ़ाने की पूंजी साबित हुई है।
वे इस राशि का उपयोग दुकान के लिए आवश्यक किराना सामग्री खरीदने में करती हैं। इससे दुकान में सामान की उपलब्धता बनी रहती है, ग्राहकों का भरोसा बढ़ा है और बिक्री में भी लगातार वृद्धि हुई है।
दुकान की आय से बदल रही है आर्थिक स्थिति
केजू बाई का कहना है कि पहले सीमित संसाधनों के कारण दुकान का विस्तार करना आसान नहीं था। लेकिन अब नियमित सहायता मिलने से वे अपने व्यवसाय को अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ा रही हैं।
दुकान से होने वाली आय से परिवार की दैनिक जरूरतें पूरी हो रही हैं और भविष्य के लिए बचत करना भी संभव हो पाया है।
‘लखपति दीदी’ बनने का लक्ष्य
बढ़ते व्यवसाय और लगातार बढ़ती आय के साथ केजू बाई अब ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उनका लक्ष्य अपने किराना व्यवसाय का विस्तार करना है, ताकि आय में और वृद्धि हो सके।
साथ ही वे चाहती हैं कि गांव की अन्य महिलाएं भी स्वरोजगार अपनाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें और अपने परिवार की आय बढ़ाने में योगदान दें।
योजना से बढ़ा आत्मविश्वास
केजू बाई ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि सम्मान, आत्मविश्वास और आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बन रही है।
उनका मानना है कि शासन की योजनाओं और अपनी मेहनत के सहयोग से वे आज आत्मनिर्भर जीवन की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रही हैं।

