Jash Learn: जशपुर की अनोखी पहल, जहां एक फोन कॉल से बच्चों ने सीखा गणित, 75% विद्यार्थियों ने हासिल की सफलता

“पहले गणित में झिझक होती थी, अब 20 तक पहाड़ा याद है।”

जशपुर जिले की कक्षा 5वीं की छात्रा नव्यता यादव का यह आत्मविश्वास केवल एक बच्चे की उपलब्धि नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे एक महत्वपूर्ण बदलाव की कहानी है।

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में शुरू हुई अभिनव शैक्षणिक पहल ‘जश लर्न (Jash Learn)’ अब ग्रामीण शिक्षा में एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभर रही है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों की Basic Mathematics Skills को मजबूत बनाना तथा सीखने की प्रक्रिया में शिक्षक, पालक और विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करना है।

हाल ही में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने निवास बगिया से इस कार्यक्रम का जिला स्तरीय शुभारंभ किया। फरसाबहार विकासखंड में सफल Pilot Project के रूप में संचालित इस पहल को अब जिले के सभी विकासखंडों में विस्तार दिया जाएगा।

एक फोन कॉल से शुरू हुआ Learning Revolution

जिला प्रशासन जशपुर ने Youth Impact संस्था के सहयोग से फरसाबहार विकासखंड में ‘जश लर्न’ कार्यक्रम की शुरुआत की थी।

इस कार्यक्रम के तहत कक्षा तीसरी और चौथी के चयनित विद्यार्थियों को DIET Jashpur के छात्र-अध्यापकों द्वारा नियमित रूप से मोबाइल फोन के माध्यम से शैक्षणिक सहयोग प्रदान किया गया।

बच्चों की जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी मूलभूत गणितीय क्रियाओं में दक्षता का आकलन किया गया। जिन विद्यार्थियों को किसी विशेष गणितीय अवधारणा में कठिनाई थी, उन्हें सरल भाषा में नियमित मार्गदर्शन और अभ्यास कराया गया।

सबसे खास बात यह रही कि इस पूरी प्रक्रिया में अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई, जिससे बच्चों की पढ़ाई स्कूल के साथ-साथ घर पर भी जारी रही।

अब 20 तक पहाड़ा याद है

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विद्यार्थियों वंदना यादव, नव्यता यादव, आयुषी तिर्की और कुसुम डडसेना से संवाद किया।

ग्राम झारमुंडा की कक्षा 5वीं की छात्रा नव्यता यादव और धनपुर की कक्षा 5वीं की छात्रा वंदना यादव ने बताया कि नियमित फोन आधारित मार्गदर्शन और अभ्यास से उन्हें जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी गणितीय संक्रियाएं अच्छी तरह समझ में आने लगी हैं।

नव्यता ने मुख्यमंत्री को बताया,

“मुझे अब 20 तक पहाड़ा आ जाता है। पहले गणित में झिझक होती थी, अब सीखकर अच्छा लगता है।”

बच्चों के अनुभव सुनकर मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि शिक्षा में तकनीक, शिक्षक और अभिभावकों की संयुक्त सहभागिता से सीखने के बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

90 Student Teachers, 260 बच्चे और 75% सफलता

अप्रैल 2026 से शुरू हुए इस Pilot Project में DIET Jashpur के 90 प्रशिक्षु छात्र-शिक्षकों ने फरसाबहार विकासखंड के 260 विद्यार्थियों को मोबाइल आधारित शिक्षण सहायता प्रदान की।

परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे।

लगभग 75 प्रतिशत विद्यार्थियों ने जोड़, गुणा, भाग एवं अन्य मूलभूत गणितीय संक्रियाओं में सफलता पूर्वक दक्षता प्राप्त की।

बच्चों की गणितीय समझ, सीखने की गति तथा आत्मविश्वास में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया।

DIET जशपुर की प्रशिक्षु छात्रा सृष्टि के अनुसार, गणित में कमजोर बच्चों को उनके अभिभावकों की मौजूदगी में फोन कॉल के माध्यम से मूल गणितीय कौशल सिखाने में मदद की गई। इससे बच्चों को स्कूल के अलावा घर पर भी सीखने का अवसर मिला।

Education में Technology और Community Participation का सफल मॉडल

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज और राष्ट्र के विकास की सबसे मजबूत आधारशिला है।

उन्होंने आधुनिक तकनीक और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के इस प्रयास को सराहनीय बताया।

मुख्यमंत्री के अनुसार, जब शिक्षक, पालक और विद्यार्थी एक साथ जुड़कर कार्य करते हैं, तब शिक्षा के परिणाम और अधिक प्रभावी होते हैं।

इसी सोच के साथ ‘जश लर्न’ कार्यक्रम में DIET Jashpur के छात्र-शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने मोबाइल आधारित शिक्षण के माध्यम से बच्चों की गणितीय दक्षता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अब पूरे जिले में होगा विस्तार

फरसाबहार में मिले सकारात्मक परिणामों को देखते हुए जिला प्रशासन ने ‘जश लर्न’ कार्यक्रम को जशपुर जिले के सभी विकासखंडों में लागू करने का निर्णय लिया है।

इसके लिए सभी CAC को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

साथ मिलकर सीखें, आगे बढ़ें” की भावना पर आधारित यह पहल अब जशपुर जिले में शिक्षा के क्षेत्र में एक नवाचारपूर्ण और प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रही है।

एक ऐसा मॉडल, जो यह साबित करता है कि कभी-कभी शिक्षा में बड़ा बदलाव लाने के लिए बड़ी इमारतों की नहीं, बल्कि एक फोन कॉल, एक शिक्षक और सीखने की इच्छा की जरूरत होती है।

Sonal Gupta

Content Writer

ALSO READ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Owner/Editor In Chief: Dr.Kirti Sisodia 
Devendra Nagar, Raipur, Chhattisgarh 492001
Mob. – 6232190022

Email – Hello@seepositive.in

GET OUR POSITIVE STORIES