क्या प्लास्टिक के जाल में उलझ गए हैं हम?

एक बार फिर से हम 5 जून को “विश्व पर्यावरण दिवस” मना रहे हैं। लेकिन क्या सच में हम इसे जीते हैं? क्या हमारे जीवन में कोई ऐसा ठोस बदलाव आया है जो पर्यावरण की बेहतरी की तरफ हमें ले गया हो? या ये दिन भी महज एक तारीख बनकर रह जाएगा?

ऐसे तमाम सवाल मेरे दिमाग में अक्सर घूमते रहते हैं जब मैं अपने आस-पास प्लास्टिक का पहाड़ देखती हूं और जानती भी हूं कि ये कितना खतरनाक है।

मेरा ख्याल है कि हममे से हर दूसरा व्यक्ति ये जानता है कि प्लास्टिक हमारे साथ क्या कर रहा है इसके बावजूद हम थोड़ी सी सहूलियत, या कभी फैंसी दिखावे के चक्कर में पड़कर रह जाते हैं।

आज स्थिति ये है कि Microplastics हवा में उड़ रहे हैं, पीने के पानी में घुल चुके हैं, और मां के दूध में भी मौजूद पाए गए हैं।

समुद्र और नदियों की सुंदर लहरों में बहती बोतलें, चिड़ियों की आंतों में फंसे पॉलीथीन और कचरे से भरे पहाड़ ये सब किसी बुरे सपने से कम नहीं है। लेकिन दुर्भाग्य है कि ये सब असल जिंदगी में हो रहा है और हम सब देख भी रहे हैं पर कुछ कर नहीं रहे या कर नहीं पा रहे हैं। सोचिए हम हमारी आने वाली पीढ़ियों को क्या देकर जाएंगे।

United Nations Environment Programme (UNEP) के तहत जब इस बार का थीम  “Beat Plastic Pollution.” रखा गया तो मुझे कोई हैरानी नहीं हुई क्योंकि इसकी जरूरत थी। कम से कम वैश्विक स्तर पर एक बार फिर से हम सब इस दिशा में प्रयास करने को तो तैयार हैं।

Ending Plastic Pollution कहने को ये एक थीम या सिर्फ एक लाइन है, पर अगर हम सच में इसके पीछे की सच्चाई को देखें तो ये आज के दौर की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। प्लास्टिक ने हमारी ज़िंदगी को जितनी सहूलियतें दी हैं, उतना ही धीरे-धीरे हमारी धरती, पानी, हवा और यहां तक कि हमारे शरीर तक को नुकसान पहुंचाया है।

मैं नहीं कह रही हूं कि सुबह उठें और किसी सार्वजनिक जगह पर कचरा साफ करने में लग जाएं, अपना काम छोड़ पूरी तरह से समर्पित हो जाएं लेकिन व्यक्तिगत तौर पर तो हम इसे अपना ही सकते हैं।  

सबसे आसान शुरुआत खुद से हो सकती है जैसे प्लास्टिक स्ट्रॉ, चम्मच, थैलियों को Avoid कर सकते हैं। कपड़े के बैग, स्टील की बोतलें, ग्लास कंटेनर इनका इस्तेमाल सीख सकते हैं। Eco-friendly ब्रांड्स को सपोर्ट कर सकते हैं। डस्टबीन न दिखे तो हाथ के कचरे को हाथ में ही रखकर उसे बेहतर जगहे पर फेंक सकते हैं। सुनने में भले ही ये आदर्शपूर्ण बातें लगे पर ये हमारे लिए जरूरी हो चुका है।  

संयुक्त राष्ट्र के Sustainable Development Goals (SDGs) में साफ तौर पर कहा गया है कि बिना पर्यावरण को सुरक्षित किए कोई भी टिकाऊ भविष्य संभव नहीं। प्लास्टिक पर काबू पाना समुद्री जीवन की रक्षा, जैव विविधता को बनाए रखने और स्वच्छ जीवन के लिए ज़रूरी है।

विश्व पर्यावरण दिवस एक रिमाइंडर है, कि अब समय कम है, हमें खुद से सवाल करना होगा कि हमारी आज की सुविधा कल के विनाश की वजह तो नहीं बन रही? और क्या सच में हम अब भी इससे लड़ने को तैयार नही हैं?

ये सवाल करने से ज्यादा इसके जवाब को तलाशने में खुद की और दूसरों की भी मदद करें।

विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं, शुभकामनाएं अपने पर्यावरण को बचाने की, प्लास्टिक को हराने की।

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Dr. Kirti Sisodia

Content Writer

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