G-20 देशों ने देखी भारत की ताकत, भारतीय अर्थव्यवस्था की असीमित क्षमता को सभी ने स्वीकारा!



कोविड लॉकडाउन, रूस-युक्रेन वार और दुनियाभर में हो रहे उठापटक से यह अनुमान लगाया गया था कि पूरी दुनिया 2023 तक आर्थिक मंदी की चपेट में होगा। इस बीच कई देशों में आर्थिक तंगी की समस्या भी देखने को मिली, चूंकि भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से ग्रो करती हुई इकोनॉमी के रूप में अपनी पहचान बनाने में सही साबित हुई। ऐसे समय में जब भारत ने जी-20 देशों की अध्यक्षता की तो आज पूरी दुनिया की नजर भारत पर है। हमारे लिए यह देखना सुखद है कि बाजार और फेड की अपेक्षा बेहतर ढंग से संबद्ध हैं, मजबूत आर्थिक विकास से इस बात का पता लगता है कि मुद्रास्फीति को उन स्तरों पर वापस आने में अधिक समय लगने वाला है, जो एफओएमसी के अनुरूप हैं। फेड का ‘हाइयर फॉर लॉन्गर’ का संदेश अंततः बाजारों में दिखाई दे रहा है। फरवरी, 2020 से पहले के तीन वर्षों के दौरान बाजार को प्रभावित करने वाली घटनाओं को देखते हुए हम बाजार की उलझनों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।

मुश्किल दौर में मजबूती से खड़ी रही भारतीय अर्थवव्यवस्था

इन सभी मुश्किल दौर में, भारतीय बाजार ने फरवरी में ही निवेशकों के 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को नष्ट होते हुए देखा है, क्योंकि बीएसई सेंसेक्स में लगभग 2,500 अंक की गिरावट हुई है। एनएसई निफ्टी 17,350 के बजट दिन के निचले स्तर के एकदम करीब है। भारतीय शेयर बाजार के कमजोर प्रदर्शनों के लिए कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक कारक मुद्रास्फीति है, जो फेड और दूसरे केंद्रीय बैंकों द्वारा उच्च दरों और ब्याज दरों में और वृद्धि के पूर्वानुमान के जिम्मेदार है। जनवरी में मजबूती दिखने के बाद अमेरिकी बाजारों में पिछले चार हफ्तों से गिरावट जारी है। जब अमेरिकी डॉलर अन्य मुद्राओं की तुलना में ऊपर की ओर जाता है, तो हम उभरते हुए बाजारों में मुद्रा का आउटफ्लो देखते हैं। इन्हीं दोनों कारकों से जुड़ा तीसरा कारक, है भारत में विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) की बिकवाली के कारण जारी आउटफ्लो है।

जी-20 की इसी बात पर बैठक में प्रकाश डाला गया कि एक नियम आधारित विश्व व्यवस्था में वैश्वीकरण और आपूर्ति शृंखला के जुड़ाव से लाभ उठाना किस तरह से पोषण और निर्माण के लिए जरूरी है। पिछले तीस वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था तीन गुना ज्यादा हुई है। विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाएं दोगुनी हो गई। बैठक में एक ऐसी वैश्विक अर्थव्यवस्था की रक्षा करने की आवश्यकता को महसूस की गई, जो सामंजस्यपूर्ण तरीके से काम करे। इसे आकार देने में भारत की भूमिका को सभी बड़े देशों ने स्वीकार किया गया। बैठक में क्रिप्टो सुरक्षा, स्थिर सिक्कों और विकेंद्रीकृत वित्त के वैश्विक विनियमन के लिए रूपरेखा बनाने, साइबर सुरक्षा, आसान और सस्ते सीमा पार भुगतान पर भी बातजीत की गई है।

कुल मिलाकर, भारत की जी-20 की अध्यक्षता के सकारात्मक प्रभाव और 2023 एवं उसके बाद सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में भारतीय अर्थव्यवस्था की ताकत को सभी बड़े देशों ने स्वीकार किया है।

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Dr. Kirti Sisodia

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