भारतीय सिनेमा की नींव रखने वाली सरस्वती बाई, जिनके दम पर बनी भारत की पहली फिल्म !

आज भारतीय सिनेमा का बाजार दुनियाभर के सबसे महंगे सिनेमा व्यवसायों में से एक है। और ये देन है दादा साहब फालके की... जो भारतीय सिनेमा के पितामह कहे जाते हैं। उन्होंने भारतीय सिनेमा की नींव रखी और 1913 में राजा हरिशचंद्र नाम की एक फिल्म बनाई। इस फिल्म को भारत की पहली फिल्म होने का गौरव मिला है।

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प्रेम बिहारी नारायण CALLIGRAPHER OF INDIAN CONSTITUTION

प्रेम बिहारी नारायण की कहानी संविधान की पांडुलिपि से जुड़ी है। संविधान की पांडुलिपि यानि कि वह मूल किताब जिसे हाथ से लिखा गया है।

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एक ऐसी गोंड रानी की कहानी जिनके सामने मुगलों ने भी मानी हार, शौर्य और सूझबूझ के दम पर बचाया अपना राज्य

इतिहास में कई अनदेखे और अनसुलझे रहस्य हैं, जो इंसानों की जिंदगी में गहरी छाप छोड़ने की क्षमता रखते हैं। ऐसी ही एक प्रभावशाली ऐतिहासिक कहानी है जिसका असर आज भी देखा जा सकता है। ये कहानी है एक अनोखी रानी की, जिन्होंने स्त्री गरीमा और राज्य की रक्षा के लिए अपने प्राण की आहुति दे दी। 18वीं शताब्दी की यह कहानी काफी दिलचस्प है यह गाथा है गिन्नौरगढ़ की आखिरी गोंड रानी 'रानी कमलापति' की।

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