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RESEARCH: आर्ट एंड क्राफ्ट बच्चों को बनाती है क्रिएटिव, नन्हें मन को दे सकते हैं क्रिएटिव आकार!

by Rishita Diwan

Date & Time: Nov 09, 2022 7:00 PM

Read Time: 2 minute



आर्ट और क्राफ्ट की मदद से बच्चों में एकाग्रता, रंगों व अक्षरों की समझ के साथ-साथ रचनात्मकता का भी संचार होता है। छोटे बच्चे जिनमें 4-5 साल से 10-12 साल तक के बच्चे जब पर्यावरण से जुड़े कोई चित्र या पेंटिंग बनाते हैं, तो उनकी प्रकृति को लेकर समझ और संवेदनशीलता बढ़ती है, साथ ही उनमें सोचने का नया नज़रिया डेवलप होता है। रिसर्च यह कहती है कि बच्चों में आर्ट एंड क्राफ्ट का आर्ट उनके भविष्य के लिए मददगार साबित होता है। इसलिए बच्चों को कला के प्रति उत्साहित करना आवश्यक है।

बढ़ती है एकाग्रता

जब बच्चे किसी तरह की कोई पेंटिंग या चित्र तैयार करते हैं तब उनमें उस कला के प्रति रूचि उत्पन्न होती है। इसका फायदा ये होता है कि वे अपने दिमाग को क्रिएटिव एंगल पर ले जाते हैं। इससे बच्चे ध्यान केंद्रित होता है। अगर बच्चे किसी चित्र को बनाते, पेपर कटिंग करते हैं या फिर क्ले मॉडलिंग की दिशा में काम करते हैं तो वे अपनी समझ से उसे मनचाहा आकार देते हैं। यही वजह है कि वे उसे बनाते समय अपना पूरा ध्यान लगाते हैं। सही आकार, सही रंगों का चयन ये सब बच्चे एकाग्रता से करते हैं। इस तरह की गतिविधियां बच्चों में फोकस बढ़ाने का काम करती है।

रचनात्मकता को मिलता है बढ़ावा

जब बच्चे को क्राफ्ट के जरिए कोई क्ले माडलिंग या पेपर कटिंग जैसी एक्टिविटी करते हैं तब तब उसमें नए-नए प्रयोग करके उसे और बेहतर बनाने की जिज्ञासा पैदा होती है। मान लेते हैं अगर कोई बच्चा पेंटिंग करता है और रंगों का चयन अपनी पसंद के हिसाब से करता है तो उसकी कल्पना में वो रंग पहले से होता है। जैसे आसमान का रंग नीला ही हो ये ज़रूरी नहीं, कई बच्चे अपना आकाश अपनी पसंद के रंग से तैयार करते हैं। बच्चों की समझ पर भरोसा रखें। इससे उनकी क्षमता का विकास होगा।

प्रयोग करने से पीछे नहीं हटेंगे बच्चे

बच्चे कुछ प्रमुख रंगों के प्रयोग से ही पेंटिंग करते हैं, जैसे- लाल, नीला, पीला, हरा और मिश्रित रंग जैसे- बैंगनी, गुलाबी, नारंगी जैसे रंगों को वे धीर-धीरे समझते हैं। इन रंगों के प्रयोग में जब वे निपुण हो जाते हैं तब फिर धीरे-धीरे उनमें दूसरे 
मिश्रित रंगों की समझ भी बढ़ जाती है। इसके अलावा बच्चे..

अक्षरों की पहचान में माहिर होते हैं।

वेस्ट से बेस्ट बनाने की कला से परिचित होते हैं।

अपनी कल्पना को उकेरने में निपुण होते हैं।

तो अगर आपका बच्चा भी क्रिएटिविटी में समय बिताता है तो उसे ऐसा करने दें।

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