छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर स्थित दंतेवाड़ा जिला अब केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता ही नहीं, बल्कि कृषि क्षेत्र में हो रहे नए प्रयोगों के लिए भी जाना जा रहा है। गीदम ब्लॉक के बींजा गांव के रहने वाले आदिवासी किसान हरसिंह ओयामी ने इस बदलाव की एक बेहतरीन मिसाल कायम की है।
केवल 5 एकड़ जमीन होने के बावजूद, हरसिंह ने परंपरागत खेती छोड़कर Integrated Organic Farming System (IFS) यानी एकीकृत जैविक कृषि मॉडल को अपनाया। परिणामस्वरूप, उनकी सालाना कमाई ₹2,12,000 से बढ़कर ₹3,68,000 पहुंच गई।
आइए जानते हैं कि Harsingh Oyami integrated organic farming model ने कैसे उनकी जिंदगी बदल दी और अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी।
5 एकड़ जमीन पर पहले क्यों नहीं हो पा रही थी अच्छी कमाई?
हरसिंह ओयामी के पास कुल 5 एकड़ कृषि योग्य भूमि थी। हालांकि, आधुनिक तकनीक और सही दिशा-निर्देश के अभाव में उन्हें पर्याप्त लाभ नहीं मिल पा रहा था:
- सीमित खेती: वह केवल खरीफ सीजन में 5 एकड़ पर धान की पारंपरिक खेती करते थे और रबी में 2 एकड़ पर सब्जियां उगाते थे।
- अनुपयोगी संसाधन: उनके पास 10 मवेशी और एक तालाब भी था, लेकिन इनका सही व्यावसायिक उपयोग न होने के कारण अतिरिक्त आय शून्य थी।
- उच्च लागत: रसायनों और बाजार पर निर्भरता के कारण खेती का खर्च अधिक और मुनाफा कम रहता था।
कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) का मार्गदर्शन और नया बदलाव
अपनी स्थिति सुधारने के लिए हरसिंह ने गीदम स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क किया। वैज्ञानिकों की सलाह पर उन्होंने अपने 5 एकड़ फार्म को Integrated Farming System (IFS) में बदल दिया।
हरसिंह ओयामी के एकीकृत मॉडल से आय का पूरा ब्योरा
एकीकृत जैविक खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें एक घटक का वेस्ट (अपशिष्ट) दूसरे घटक का इनपुट बन जाता है। इस चक्र से उत्पादन लागत काफी घट जाती है।
| आय का माध्यम (Source of Income) | एकीकृत मॉडल से प्राप्त आय (Annual Income) |
| कृषि व सब्जियां (धान, मक्का, मौसमी सब्जियां) | ₹1,60,000 |
| मत्स्य पालन (Fish Farming) | ₹30,000 |
| डेयरी और वर्मीकंपोस्ट (Dairy & Vermicompost) | ₹40,000 (₹20k डेयरी + ₹20k खाद) |
| लघु वनोपज (Mahua, Tora, Tamarind) | ₹58,000 |
| सल्फी रस बिक्री (Sulphi Juice) | ₹80,000 |
| कुल सालाना आय (Total Annual Income) | ₹3,68,000 (लगभग ₹30,066/माह) |
एकीकृत जैविक खेती (IFS) अपनाने के मुख्य लाभ
हरसिंह ओयामी का यह मॉडल साबित करता है कि छोटी जोत वाले किसान भी सही तकनीकों के इस्तेमाल से आत्मनिर्भर बन सकते हैं:
- साल भर नियमित आय: केवल फसल कटाई के समय ही नहीं, बल्कि डेयरी, मछली पालन और सल्फी रस बिक्री से उन्हें हर महीने नियमित आय मिलती रहती है।
- लागत में भारी कमी: मवेशियों के गोबर और खेत के कचरे से खुद वर्मीकंपोस्ट (केंचुआ खाद) तैयार करने से उन्हें बाजार से महंगी रासायनिक खादें नहीं खरीदनी पड़तीं।
- पर्यावरण और मृदा स्वास्थ्य में सुधार: जैविक तकनीकों के उपयोग से खेत की मिट्टी की उर्वरता शक्ति में सुधार हुआ है।
- 57.6% की आय वृद्धि: एकीकृत मॉडल अपनाने से उनकी कुल आय में सीधे ₹1.56 लाख से अधिक का इजाफा हुआ।
दंतेवाड़ा के बींजा गांव के की यह सफलता दिखाती है कि बस्तर के दूरस्थ इलाकों में भी नवाचार से कृषि को बेहद लाभदायक बनाया जा सकता है। Integrated Organic Farming Model छोटे किसानों के लिए एक वरदान साबित हो रहा है, जो कम जमीन पर भी बहुस्तरीय आय का रास्ता खोलता है।

