Janmashtami: श्रीकृष्ण के जीवन से 5 अमूल्य जीवन दर्शन

भगवान श्रीकृष्ण का जीवन केवल कथा-कहानियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर युग और हर इंसान के लिए प्रेरणा का स्रोत है। बाल्यकाल से लेकर महाभारत के युद्ध तक, उनके हर कार्य में गहरे जीवन संदेश छिपे हैं। इस जन्माष्टमी, आइए जानते हैं श्रीकृष्ण के पांच ऐसे जीवन दर्शन, जिन्हें अपनाकर हम अपने जीवन को और बेहतर बना सकते हैं।

1. जन्म देने और पालने वाले का सम्मान

श्रीकृष्ण का जन्म माता देवकी के गर्भ से हुआ, लेकिन उनका पालन-पोषण माता यशोदा ने किया। भगवान ने अपने जीवन में कभी भी दोनों के प्रति प्रेम और सम्मान में भेद नहीं किया।

सीख: जिसने जन्म दिया हो और जिसने जीवन पाला हो – दोनों ही समान रूप से आदर और कृतज्ञता के पात्र हैं।

2. प्रकृति से प्रेम और उसका संरक्षण

गोकुल में श्रीकृष्ण ने एक साधारण ग्वाले की तरह जीवन बिताया। गाय चराना, बांसुरी बजाना, और पशु-पक्षियों से स्नेह करना – यह सब उनके स्वभाव का हिस्सा था। वे प्रकृति के सच्चे प्रेमी और रक्षक थे।

सीख: प्रकृति की रक्षा करना और सभी जीवों से प्रेम करना हमारे जीवन का हिस्सा होना चाहिए।

3. श्रेय लेने की होड़ से बचना

महाभारत का युद्ध पांडवों ने श्रीकृष्ण की रणनीति और मार्गदर्शन से जीता। उन्होंने अर्जुन के सारथी बनकर उनका मनोबल बढ़ाया, लेकिन जीत का श्रेय उन्होंने स्वयं नहीं लिया और भीम-अर्जुन को दे दिया।

सीख: बड़ा हो या छोटा, सभी का योगदान महत्वपूर्ण है। सफलता का श्रेय बांटना सीखें, न कि अकेले लेना।

4. माफ करना सीखना

राक्षसी पूतना विष लगाकर कृष्ण को मारने आई थी, लेकिन भगवान ने उसके इस दोष के बजाय यह देखा कि वह मां की तरह उन्हें दूध पिलाने आई है। उन्होंने उसे मृत्यु के बाद मोक्ष प्रदान किया।

सीख: गलतियों के बावजूद, जहां संभव हो वहां क्षमा करना सीखें। यह सबसे बड़ी मानवता है।

5. महिलाओं के सम्मान की रक्षा

द्रौपदी के चीरहरण के समय जब सभा में कोई आगे नहीं आया, तब श्रीकृष्ण ने उनकी लाज बचाई। यह उनके जीवन का एक ऐसा प्रसंग है, जो नारी सम्मान के महत्व को उजागर करता है।

सीख: महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान हर व्यक्ति का कर्तव्य है।

Positive सार

श्रीकृष्ण का जीवन हमें सिखाता है कि प्रेम, क्षमा, समानता, प्रकृति संरक्षण और नारी सम्मान जैसे मूल्यों को अपने जीवन में उतारकर हम न केवल एक अच्छे इंसान बन सकते हैं, बल्कि समाज में भी सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। इस जन्माष्टमी, आइए इन शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लें।

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Dr. Kirti Sisodia

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