Positivity: सफलता में प्लानिंग का होता है बड़ा रोल, जानें कैसे



अक्सर बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि अच्छी योजना आपको काम को अंजाम तक पहुंचाती है। इसके उलट अगर आप उलझे हुए हैं या काम को बिखरा हुआ या टुकड़ों में बांटकर करते हैं। या फिर टालते रहते हैं और कामों को अपने मूड के हिसाब से करते हैं तो जरा संभल जाएं, क्योंकि यह आपके लिए खतरनाक हो सकता है। लेकिन वहीं अगर आप छोटे से छोटे कामों को भी योजनाबद्ध तरीके से करते हैं तो आप अपने जीवन को एक सकारात्मक दिशा दे सकते हैं।

दृढ़-निश्चय सफलता की सबसे पहली शर्त

वही व्यक्ति सफल होता है जो लगातार बिना रुके आगे बढ़ता है। जिसका निश्चय अडिग होता है, वो तब तक संतुष्ट नहीं होता या रुकता नहीं है जब तक लक्ष्य को प्राप्त न कर ले। दृढ़- निश्चय, सफलता की सबसे पहली शर्त है। साथ में साहस और आत्मविश्वास का होना भी आवश्यक है। जिन लोगों में दृढ़-निश्चय का अभाव होता है, वह सफलता के मार्ग पर कुछ कदम तो जरूर चलते हैं पर जल्दी ही थक-हारकर पलायन कर लेते हैं। तो अपने कामों के प्रति दृढ़ निश्चयी बनें और लगन से काम करें।

रोज छोटे-छोटे संकल्प लें और उन्हें पूरा करें

अगर आप कोई काम शुरू करते हैं तो अपने मूड से सलाह नहीं ले, यानी अपने मूड के हिसाब से नहीं, अपने लक्ष्य और योजना के हिसाब से काम करें। जॉर्ज बर्नार्ड शॉ को लेकर एक बात काफी प्रसिद्ध है, कि उन्हें कई बार लिखने का मूड नहीं होता था, लेकिन वो लिखते रहते थे क्योंकि उन्होंने साहित्यकार बनने के अपने लक्ष्य को नजरों से दूर नहीं जाने दिया। उन्होंने संकल्प किया कि वो हर दिन लिखेंगे, चाहे मूड कुछ भी हो।

सही सवाल पूछना जरूरी

सवाल पूछना सबसे जरूरी है लेकिन उतना ही जरूरी सुनना भी है। एक अच्छा सवाल ही अच्छा जवाब खोज के निकालता है। अगर हम सही सवाल नहीं पूछेंगे तो हमें अच्छे जवाब कैसे मिलेंगे। गलत सवाल हमेशा गलत जवाब ही लेकर आती है जीवन में उन्नति के लिए पूछना हमेशा फायदेमंद होता है। क्योंकि हम सभी जानकारी की कामना करते हैं। वहीं हमारे निर्णय उतने ही अच्छे होते हैं जितनी अच्छी हमारी जानकारी होती है।

अस्थायी हार को स्थायी न मानें

आपकी कोई योजना असफल होती है तो वह अस्थायी भी हो सकती है, हारने का यह मतलब नहीं है कि यह स्थायी विफलता है। इसका मतलब यह भी हो सकता है कि आपकी योजना सही नहीं थी। दूसरी योजनाओं के बारे में फिर से सोच सकते हैं, नई योजना बना सकते हैं। अपने कार्यों को फिर से आरंभ करें। बल्ब बनाने से पहले थॉमस एडिसन दस हजार बार फेल हुए थे। पर वे रुके नहीं। नहीं रुकने का मतलब होता है आप जीत के करीब हैं।

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Dr. Kirti Sisodia

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