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Motivation: खुद की बनें ताकत, कुछ स्टेप्स को फॉलो कर निराशाओं से लड़ने हो सकते हैं तैयार!

by Rishita Diwan

Date & Time: Sep 16, 2022 9:00 PM

Read Time: 2 minute



जीवन में निराशाएं कई तरह की होती हैं, कुछ छोटी तो कभी कुछ बड़ी। जैसे, नौकरी का छूट जाना या सेहत का खराब होना या किसी बेहद करीबी के साथ बुरा होना या फिर मन के मुताबिक कोई काम न होना। हालांकि इन स्थितियों से लड़ना आसान बिल्कुल नहीं होता, लेकिन बेहद जरूरी है कि आप इस तरह की निराशाओं और दु:ख-तकलीफों का सामना करने के लिए खुद को हर तरह से तैयार कर लें। निराशाएं आपके आज को प्रभावित न करें इसके लिए आप कुछ कदम उठा सकते हैं...

1) हर स्थिति के लिए खुद से करें सवाल

कभी-कभी ऐसा होता है कि, बुरी खबर के मिलने पर हम अंदर से टूट जाते हैं पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जिंदगी बाकी है। इसीलिए हर स्थिति का सामना करने के लिए जो तैयारी जरूरी होती है, उसमें चिंता फायदेमंद भी साबित होती है। कई बार बुरी खबर पर चिंता करने से ही कुछ मदद मिलती है। लेकिन अगर आप पहले से ही हरसंभव कोशिश करके देख चुके हैं, तो फिर यह बात समझी जा सकती है कि चिंता करने से आपको कोई खास फायदा नहीं मिलेगा। और ये चिंतन आप तब कर पाएंगे जब आप जो हो रहा है उसके लिए खुद से सवाल करेंगे। आपके पास सवाल होंगे तो जवाब भी आपको मिल जाएंगे।

2) हर संभावित स्थितियों के बारे विचार करें

मन में डर होना जरूरी है, तो जहां तक संभव हो सके निराशा का सामना करने के लिए अपने सभी साधन के बारे में पहले ही सोच लें। फिर इसके बाद जो भी संभावित परिणाम आपको अपने सामने ठीक दिखाई दे रहे हैं उन पर अमल करने का प्रयास करें। इस तरह आप अपने अंदर आने वाले वाले काल्पनिक या संभावित डर और एंग्जाइटी को काफी हद तक रोक सकेंगे।

3) कुछ भी हो उम्मीद न छोड़ें

किसी भी दु:ख, तकलीफ या सदमे का पूरी मजबूती के साथ सामना करना आपके सकरात्मक व्यवहार को दर्शाता है। इससे पता चलता है कि आप आशावादी हैं। इसीलिए हर स्थिति में रहकर अपनी निराशाओं को इस तरह संभालें कि इससे आपके वर्तमान पर कोई असर न हो। यह तभी संभव है जब आप हर परिस्थिति में सकारात्मक और शांत रहेंगे, खुद को परेशान नहीं करेंगे। आप चिंता करें, लेकिन उम्मीद का साथ न छोड़ें।

4) बार-बार दुख के बारे में न सोचें

अगर आप बार-बार परेशानियों के बारे में सोचकर अपने दुख को बढ़ाते हैं तो यह आपके ऊपर बहुत ही नकारात्मक प्रभाव डालेगा। अगर आपको लगता है कि समय से पहले आने वाली पीड़ा का अहसास कर उसका दु:ख मनाने से कोई फायदा है, तो यह गलत है। नकारात्मक भावनाओं के साथ बने रहने से पहले भी तकलीफ होगी और बाद में तो होनी ही है। इसलिए उम्मीद रखें, लेकिन ओवर-कॉन्फिडेंस न रहें। नकारात्मक नतीजों को सिरे से नकारना भी ठीक नहीं है। आपको संतुलन बनाना सीखना चाहिए।

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