अनूठा है केरल का मां हेमांबिका मंदिर, मूर्ति नहीं केवल हाथों की होती है पूजा



वैसे तो भारत के सभी राज्यों में प्राचीन मंदिरों का अद्भुत इतिहास मिल जाएगा। जहां उत्तर भारत में देवी दुर्गा के कई मंदिर हैं तो दक्षिण भी मंदिरों के मामले में काफी समृद्ध है। इन मंदिरों में से एक है केरल का माता हेमांबिका मंदिर। केरल के पडक्कल जिले में मौजूद हेमांबिका मंदिर यहां के बाकी मंदिरों की तुलना में थोड़ा छोटा है लेकिन इसका इतिहास बड़ा है।

मंदिर में नहीं है मूर्ति

अब मंदिर में मूर्ति नहीं है तो पूजा किसकी होती है, दरअसल इस मंदिर में मूर्ति की जगह हाथों की पूजा की जाती है। इन्हीं को आदिशक्ति देवी के रूप में पूजा जाता है। इस मंदिर को इमूर भगवती मंदिर भी कहते हैं। यह केरल के पडक्कल जिले की कलेकुलंगरा तहसील में बना है। ऐसी मान्यता है कि भगवान परशुराम ने इस मंदिर की स्थापना की थी।

प्राचीन है मंदिर

मंदिर का मौजूदा स्ट्रक्चर करीब 1500 साल प्राचीन है। इस मंदिर को लेकर दो तरह की कहानियां कही जाती हैं। इन पौराणिक कथाओं में एक है- एक राक्षस के हमले से बचने के लिए माता पार्वती जी भाग रही थीं और वो इस जगह मौजूद तालाब में गिर गईं। उन्होंने दोनों हाथ उठाकर शिव को बचाने के लिए आवाज दी, शिव आए और उन्होंने राक्षस का वध किया। पानी के ऊपर उठे पार्वती के वो ही दो हाथ यहां मूर्ति के रूप में स्थापित हैं।

दूसरी कहानी में कहा जाता है- कल्लेकुलंगरा का एक पुजारी लगभग 15 किलोमीटर दूर मलमपुझा के अकमलावरम मंदिर में रोज पूजा करते थे। जब वह बूढ़ा हो गया, तो उसने देवी मां से कुछ वैकल्पिक रास्ता निकालने की इच्छा जाहिर की। 

एक दिन कल्लेकुलंगरा के तालाब में नहाते समय उन्होंने एक महिला को डूबते हुए देखा, जिसके केवल दो हाथ दिख रहे थे। जब स्थानीय लोगों ने महिला को बचाने की कोशिशें की तब वह हाथ मूर्ति बन गए। लोगों ने उन्हीं दो हाथों की मूर्ति को यहां स्थापित किया और इस तरह यह मंदिर लगभग 1,500 साल पहले अस्तित्व में आया।

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Dr. Kirti Sisodia

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