हैदराबाद का सब्जी मार्केट कचरे से बनाता है बिजली, जानें इस यूनिक आइडिया के पीछे की पूरी कहानी!

भारत में सालाना 1.3 अरब टन तक खाद्यान्न कचरे के तौर पर फेंका जाता है। अगर आप किसी अनाज या सब्जी मंडी में जाएंगे तो वहां आपको दिखाई देगा कि कैसे खराब फल-सब्जियों के ढेर सड़क किनारे मौजूद कचरे के रूप में पड़े होते हैं। गड्ढे या कूड़ेदान में फैले ये सड़ी हुई सब्जियां बदबू और गंदगी फैलाते हैं। कई बार ये खराब सब्जियों और फलों के अवशेष लैंडफिल साइट पर फेंक दी जाती है जिससे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचता है। लेकिन हैदराबाद का सब्जी मार्केट ऐसा नहीं करता है। दरअसल बोअनपल्ली मार्केट में इन कचरों से बायोगैस तैयार किया जा रहा है।
 

रोजाना 10 टन कचरे से बनाया जा रहा बायोगैस

हैदराबाद की बोवन पल्ली मार्केट में रोजाना 10 टन कचरे से बायोगैस तैयार किया जा रहा है। इस क्लीन एनर्जी का उपयोग बिल्डिंग, स्ट्रीट लाइट और 170 दुकानों को रोशन करने के लिए हो रहा है।
 

लैंडफिल साइट पर कैसे पहुंचता है कचरा?

देश के कई इलाके में शहर के बाहर कूड़े के पहाड़ आसान से देखने को मिल जाते हैं। यहां पर कचरा कई तरीके से पहुंचाया जाता है। इसमें घरेलू कचरे के साथ सब्जी मंडी, अनाज मंडी और होटल-रेस्टोरेंट आदि का भी कचरा शामिल होता है।
 
लेकिन हैदराबाद के बोवन पल्ली मार्केट के द्वारा कचरे के इस तरह निपटान का आइडिया काफी नया और उपयोगी साबित हो रहा है। यहां रोजाना करीब 10 टन कचरा जुटाकर बोवनपल्ली मार्केट में कई लोगों का जीवन बदला जा रहा है। 
 
इस मार्केट से रोजाना जो कचरा निकलता है उससे 800 यूनिट बिजली और 30 किलो बायोफ्यूल तैयार होता है। बोवन पल्ली मार्केट के कचरे से बनी बिजली से 100 से अधिक स्ट्रीट लाइट, 170 स्टाल, एक प्रशासनिक भवन और वाटर सप्लाई नेटवर्क को बिजली दी जाती है।
 
2020 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट पहले ट्रायल बेसिस पर चलाया गया। पर इसके शानदार नतीजों से इसे उपयोग में लाया गया, बाद में बायो वेजिटेबल प्लांट यहां लगाया गया है। निश्चित ही बोवन पल्ली मार्केट दूसरे शहरों के लिए रोल मॉडल बनकर उभरेगा।
 
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Dr. Kirti Sisodia

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