Sushasan-tihar: ‘जनता की सुनें, सुनाएं नहीं’- मुख्यमंत्री साय!

Vishnu Deo Sai: छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, संवेदनशील और जवाबदेह बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने एक बड़ी पहल की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में ‘सुशासन’ का अर्थ केवल फाइलों का निपटारा नहीं, बल्कि आम जनता के साथ अधिकारियों का मानवीय और सम्मानजनक व्यवहार है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दो टूक निर्देश देते हुए कहा है कि प्रशासन का चेहरा शालीनता और संवेदनशीलता से भरा होना चाहिए।

प्रशासन का मानवीय चेहरा

संवाद ही समाधान का आधार

मुख्यमंत्री साय ने प्रशासनिक अधिकारियों को आगाह किया है कि वे जनता की समस्याओं को केवल एक ‘केस’ की तरह न देखें, बल्कि उसे पूरी गंभीरता और धैर्य के साथ सुनें। अक्सर यह देखा जाता है कि सरकारी कार्यालयों में आम नागरिक अपनी समस्याओं को लेकर संकोच और भय में रहते हैं। इस खाई को पाटने के लिए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि अधिकारी ‘लोगों को सुनें, उन्हें सुनाएं नहीं’।

जब एक किसान, मजदूर या गृहणी किसी शासकीय कार्यालय पहुँचती है, तो अधिकारी का पहला कर्तव्य उनके प्रति सम्मान प्रकट करना और उनकी बात को ध्यान से सुनना है। संवाद में यह संवेदना ही जनता के मन में शासन के प्रति विश्वास पैदा करती है। मुख्यमंत्री का मानना है कि यदि व्यवहार में विनम्रता हो, तो आधी समस्याओं का समाधान बातचीत से ही हो जाता है।

सुशासन तिहार 2026

समस्याओं का मौके पर निपटारा

छत्तीसगढ़ में 1 मई से 10 जून तक “सुशासन तिहार 2026” का आयोजन किया जा रहा है। यह अभियान प्रदेशभर के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में चलाया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य पंचायत और वार्ड स्तर पर समाधान शिविर लगाकर जनसमस्याओं का त्वरित निराकरण करना है।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने खुद मोर्चा संभालते हुए यह स्पष्ट किया है कि वे स्वयं क्षेत्रों का आकस्मिक निरीक्षण (Surprise Inspection) करेंगे। इस निरीक्षण में केवल फाइलों की जांच नहीं होगी, बल्कि अधिकारियों के व्यवहार को भी परखा जाएगा। सुशासन तिहार के माध्यम से सरकार सीधे जनता के दरवाजे तक पहुँच रही है, ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक सुलभता से पहुँच सके।

अनुभव ही असली प्रगति

अक्सर विकास को केवल आंकड़ों और ग्राफ के माध्यम से मापा जाता है, लेकिन मुख्यमंत्री श्री साय ने विकास की एक नई परिभाषा दी है। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी योजना की सफलता इस बात से तय होती है कि जमीनी स्तर पर जनता का अनुभव कैसा है। अधिकारियों को केवल ऑफिस तक सीमित रहने के बजाय फील्ड में सक्रिय रहने और लोगों से सीधे जुड़ने की सलाह दी गई है।

शालीनता और तत्परता को प्रशासन की असली ताकत बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब प्रशासन हर नागरिक के लिए सुलभ और सहयोगात्मक बन जाता है, तो शिकायतों की संख्या अपने आप कम होने लगती है। पारदर्शिता और जवाबदेही को कार्य का मूल आधार बनाने की अपेक्षा हर स्तर के अधिकारी से की गई है।

विकसित छत्तीसगढ़ का सपना

मुख्यमंत्री का विजन ‘विकसित छत्तीसगढ़’ का है, और उनका मानना है कि यह सपना तभी साकार होगा जब प्रशासन का हर स्तर भ्रष्टाचार मुक्त और सेवाभावी बने। सुशासन केवल नीतियों के निर्माण से नहीं, बल्कि उनके क्रियान्वयन के दौरान अपनाए गए व्यवहार से स्थापित होता है। “सुशासन तिहार” के दौरान जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है, ताकि जनता की आवाज सीधे शासन के कानों तक पहुँचे।

मुख्यमंत्री ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि छत्तीसगढ़ में अब ‘अफसरशाही’ नहीं, बल्कि ‘जनसेवा’ का शासन होगा। अधिकारियों की पदोन्नति और मूल्यांकन में उनके लोक-व्यवहार को एक महत्वपूर्ण पैमाना माना जाएगा।

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Rishita Diwan

Content Writer

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