G20 से मिला लंबानी कढ़ाई कला को वैश्विक मंच, कलाकारों ने मिलकर बनाया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड!


भारत के G20 प्रेसीडेंसी के अंतर्गत संस्कृति कार्य समूह की बैठक में अनोखा वर्ल्ड रिकॉर्ड बना। जिससे लोगों को भारतीय कला का एक और सुंदर नमूना देखने को मिला। हम्पी में G20 के तीसरे संस्कृति कार्य समूह की बैठक के समय लम्बानी कढ़ाई वस्तुओं का सबसे बड़ा प्रदर्शन कलाकारों द्वारा किया गया। इस कला को इतने बड़े स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड मिला।

महिला कारीगरों की कला का प्रदर्शन

संदुर कुशला कला केंद्र (SKKK) से जुड़ी कलाकारों और 450 से अधिक लंबानी महिला कारीगरों ने मिलकर 1755 पैचवर्क वाली कला को प्रदर्शित किया। इस कला को जीआई-टैग वाली संदूर लंबानी कढ़ाई का उपयोग करके कुछ खास वस्तुओं को तैयार किया। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का यह प्रयास प्रधानमंत्री मोदी के मिशन लाइफ (पर्यावरण के लिए जीवन शैली) के अभियान और पर्यावरण के प्रति जागरूक जीवन शैली और स्थिरता की दिशा में एक ठोस कार्रवाई से जुड़ा हुआ है।

इस खास मौके पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि “लंबानी पैचवर्क कढ़ाई भारत की कई पारंपरिक टिकाऊ प्रथाओं का एक खूबसूरत उदाहरण है और यह टिकाऊ प्रथा प्रधानमंत्री के अभियान, मिशन ‘लाइफ’ (पर्यावरण के लिए जीवन शैली), और संस्कृति कार्य समूह की ‘संस्कृति’ की पहल को आगे बढ़ा रहा है। इस कदम से पर्यावरण के प्रति जागरूक जीवनशैली और स्थिरता की दिशा में ठोस कार्रवाई को बढ़ावा मिलेगा।”

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि, “लंबानी गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का प्रोजेक्ट सीडब्ल्यूजी अभियान ‘कल्चर यूनाइट्स ऑल’ का एक प्रोडक्ट है, जो मानव जाति की विविध और गतिशील सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को प्रदर्शित करता है। एक पैचवर्क के रूप में, ‘संस्कृति सभी को एकजुट करने का कार्य करती है। भले ही दुनिया की संस्कृतियां अलग-अलग हैं फिर भी सब एकसाथ जुड़े हुए हैं।”

लम्बानी कला

लंबानी कढ़ाई कपड़ा अलंकरण का एक सुंदर और जीवंत रूप है। ये काफी मुश्किल लेकिन नायाब है। लम्बानी कला को रंगीन धागों, मिरर के काम और सिलाई पैटर्न की एक समृद्ध श्रृंखला के रूप में जाना जाता है। ये कला कर्नाटक के कई गांवों जैसे संदुर, केरी टांडा, मरियम्मनहल्ली, कादिरामपुर, सीताराम टांडा, बीजापुर और कमलापुर में काफी प्रचलित है। मुख्य रूप से लम्बानी समुदाय की कुशल महिलाओं द्वारा इस समृद्ध कढ़ाई परंपरा को संजोकर रखा गया है। इस कला से जुड़ी महिलाएं आजीविका और जीविका के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में इसका कार्य करती हैं। जो आर्थिक सशक्तिकरण के साथ जीवन पद्धतियों को भी जोड़ने का कार्य करती है।

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Dr. Kirti Sisodia

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