Naxal leaders killed: नक्सलवाद का काउंटडाउन शुरू!

Naxal leaders killed: नक्सलवाद कभी भारत की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में से एक था, लेकिन अब इसके बचे हुए दिन गिने जा रहे हैं। गृह मंत्री अमित शाह के ‘2026 तक नक्सल-मुक्त भारत’ के मिशन के तहत लगातार बड़े ऑपरेशन हो रहे हैं। 2024-25 के बीच 400 से ज्यादा नक्सली मारे गए, और अब सबसे बड़ी कामयाबी मानी जा रही है, 1.5 करोड़ के इनामी नंवबल्ला केशव राव उर्फ बसवराजू का खात्मा।

कौन था बसवराजू?

बसवराजू माओवादी संगठन का महासचिव था। 2010 के दंतेवाड़ा हमले और 2013 के झीरम घाटी नरसंहार का मास्टरमाइंड रहा ये नक्सली, एक दशक से सुरक्षा बलों की हिट लिस्ट में था। नारायणपुर में 21 मई 2025 को हुई मुठभेड़ में बसवराजू समेत 27 नक्सली मारे गए, जिसमें कई टॉप लीडर शामिल थे।

‘हिड़मा’ अगला टारगेट

अब सुरक्षा बलों की नजर है माड़वी हिड़मा पर, जो 2010 के ताड़मेटला हमले का मास्टरमाइंड था। उस हमले में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए थे। हिड़मा नक्सल नेटवर्क का एक ऐसा चेहरा है, जो अब संगठन की बची-खुची ताकत को समेटे हुए है।

14 महीनों में 400+ नक्सली ढेर

2024 से अब तक की मुठभेड़ों में 400 से ज्यादा नक्सली मारे जा चुके हैं, जिनमें कई टॉप कमांडर शामिल हैं,

  • 16 अप्रैल 2024, कांकेर- 29 नक्सली मारे गए, शंकर राव समेत (25 लाख इनामी)
  • 10 फरवरी 2025, बीजापुर- 31 नक्सली ढेर, 11 महिला नक्सली
  • 14 मई 2025, कुर्रेगुट्टा- 31 नक्सली मारे गए
  • 21 मई 2025, नारायणपुर- 27 नक्सली मारे गए, बसवराजू समेत
  • जनवरी से मई 2025- 100+ नक्सली मारे गए और दर्जनों ने सरेंडर किया

ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट की बड़ी जीत

हाल ही में पूरा हुआ ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट, तीन राज्यों – छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र में चलाया गया। इसके तहत

  • 54 नक्सली गिरफ्तार
  • 84 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया

यह ऑपरेशन दिखाता है कि सरकार सिर्फ ताकत के बल पर नहीं, बल्कि आत्मसमर्पण नीति से भी नक्सलवाद को खत्म करने की दिशा में काम कर रही है।

क्यों खास है यह लड़ाई?

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह पहली बार है जब महासचिव स्तर के नक्सली को मार गिराया गया है। इससे ये साबित होता है कि नक्सलवाद की कमर तोड़ी जा चुकी है और अब उसका खात्मा बस वक्त की बात है। सीएम विष्णुदेव साय ने भी कहा है, कि “हमारी सरकार के आने के बाद नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई है और 2026 तक देश से इसे खत्म करना तय है।”

लौट रहे हैं मुख्यधारा में

आज का माहौल अलग है। जो नक्सली आतंक की राह पर थे, अब मुख्यधारा में लौट रहे हैं। सरकार की उदार आत्मसमर्पण नीति के तहत सैकड़ों नक्सली हथियार छोड़ चुके हैं। जो नहीं लौट रहे, वो अब ठिकाने लगाए जा रहे हैं।

हिड़मा की उलटी गिनती

भारत अब नक्सलवाद के उस आखिरी मोड़ पर है, जहां से वापसी नामुमकिन है, नक्सलियों के लिए। बसवराजू के बाद अब हिड़मा की तलाश निर्णायक मोड़ पर है और 2026 की डेडलाइन को देखते हुए ये लड़ाई अब क्लाइमेक्स पर है।

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Rishita Diwan

Content Writer

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