Operation Sindoor: क्यों रखा गया पहलगाम बदले का नाम ‘ऑपरेशन सिंदूर’?

Operation Sindoor: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस हमले में निर्दोष नागरिकों, को निशाना बनाया गया। लेकिन भारत ने इस हमले का जवाब केवल बंदूकों से नहीं दिया, बल्कि सम्मान, आत्मबल और चेतावनी के प्रतीक के रूप में दिया ‘ऑपरेशन सिंदूर’।

क्या है ‘ऑपरेशन सिंदूर’?

‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत की तीनों सेनाओं (थल, वायु और नौसेना) की संयुक्त कार्रवाई है, जिसमें पाकिस्तान और PoK में स्थित 9 आतंकी ठिकानों को बेहद सटीक तरीके से एयर स्ट्राइक करके ध्वस्त किया गया। यह कार्रवाई 6-7 मई 2025 की रात को अंजाम दी गई और मिशन के दौरान सभी जवान सुरक्षित लौटे।

इस ऑपरेशन का नाम सुनकर सोशल मीडिया पर कई अटकलें लगाई गईं, लेकिन असल वजह इससे कहीं ज्यादा भावनात्मक और सांस्कृतिक है।

‘सिंदूर’ क्यों बना ऑपरेशन का नाम?

भारतीय संस्कृति में सिंदूर एक प्रतीक है, नारी शक्ति, विवाह और सम्मान का। पहलगाम हमले में कई विवाहित महिलाएं अपने पति को खो चुकी थीं। उनके सिंदूर उजड़ गए, और यही बात ऑपरेशन सिंदूर की आत्मा है।

यह सिर्फ एक जवाबी हमला नहीं था, बल्कि उन उजड़े सिंदूरों के लिए बदला था। यह आतंक के उस चेहरे को जवाब था, जिसने महिलाओं की आंखों के सामने उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी छीन ली। इसलिए, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और भावनात्मक बयान भी है।

सेना की स्पष्ट रणनीति

भारतीय सेना ने इस ऑपरेशन के दौरान यह सुनिश्चित किया कि किसी निर्दोष नागरिक को नुकसान न पहुंचे। सभी टारगेट्स जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे आतंकवादी संगठनों के ठिकाने थे।

सेना की प्रेस रिलीज के मुताबिक, यह ऑपरेशन पूरी तरह से आतंकी ढांचे के खिलाफ था। इसका उद्देश्य पाकिस्तान के साथ युद्ध छेड़ना नहीं, बल्कि सीमापार आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश देना था।

क्या कहती है यह कार्रवाई?

‘ऑपरेशन सिंदूर’ एक सैन्य कार्रवाई से ज्यादा एक भावनात्मक युद्ध था। यह दिखाता है कि भारत अब आतंकवाद को सिर्फ रणनीति से नहीं, बल्कि सम्मान और आत्मबल की भावना से भी जवाब देगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद पूरे ऑपरेशन की निगरानी की और सभी कदम सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर उठाए गए। ऑपरेशन के बाद भारत ने अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और सऊदी अरब जैसे प्रमुख देशों को इसकी जानकारी भी दी, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि भारत की कार्रवाई नपी-तुली, जिम्मेदार और गैर-उकसाऊ थी।

जवाब देना जानता है भारत

‘ऑपरेशन सिंदूर’ एक ऐसा मिशन है जो ये साबित करता है कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। यह ऑपरेशन उन हर आंखों का जवाब था, जिनसे सिंदूर छीन लिया गया था। यह उन हर आवाज़ का प्रतिशोध था, जिसे आतंक ने चुप करा दिया था। और यह उस भारत की पहचान है, जो अब सिर्फ सहता नहीं “सीधा जवाब देता है”।

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Rishita Diwan

Content Writer

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